अगर मंदिर विरोधी नहीं है कांग्रेस तो सिब्बल ने क्यों कहा कि सुनवाई 2019 से पहले नहीं: सीएम योगी
कोटा। राजस्थान में आगामी 7 दिसंबर को विधानसभा के लिए मतदान होने हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां कोई भी चाल चलने से पीछे नहीं हट रहीं। इसी क्रम में बीजेपी के स्टार प्रचारक और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर का पत्ता फेंका है। कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कोटा में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर कांग्रेस अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं करती है तो कपिल सिब्बल ने किस आधार पर इस मामले की सुनवाई 2019 चुनावों के बाद कराने की मांग की थी। जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि 11 दिसंबर को जब चुनाव परिणाम आएंगे तो राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाएगी।

कांग्रेस के कुशासन ने समाज को बांटा
कांग्रेस के प्रशासन ने देश के अंदर सर्वाधिक दिनों तक शासन किया लेकिन बदले में कांग्रेस ने क्या दिया। कांग्रेस के कुशासन ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और उनसे बने तीन अन्य प्रदेश उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ को बीमारु राज्य बना दिया था। कांग्रेस का विकास और सुशासन पर ध्यान नहीं था लेकिन उससे भी आगे चलकर कांग्रेस ने समाज को बांटा है।

1947 में देश के विभाजन का कारण कांग्रेस की सत्ता लिप्सा थी
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि 1947 में देश के विभाजन का कारण कांग्रेस की सत्ता लिप्सा थी। उसके बाद कांग्रेस ने देश को जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर देश को बांटने का काम किया। इस देश के वंचितों पिछड़ों और समाज के प्रत्येक तबके को उसका हक मिले, कांग्रेस के पास इसकी न कोई नीति थी और न कोई नेक नियति थी। योगी ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सत्रह चुनाव हार चुकी है। आने वाले 11 दिसंबर को जब पांच राज्यों के परिणाम आएंगे तो पांचों राज्यों में भाजपा सरकार बनाएगी।
कांग्रेस ने विकास किया तो पीएम मोदी को गरीबों के जनधन अकाउंट क्यों खोलने पड़े
योगी ने पूछा, कांग्रेस के जो नेता मंचों पर चढ़कर कह रहे हैं कि कांग्रेस ने विकास किया था तो इनसे पूछा जाना चाहिए कि मोदी जी को 32 करोड़ गरीबों के जनधन अकाउंट क्यों खोलने पड़े। सीएम योगी ने पूछा कि अगर कांग्रेस अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का विरोधी नहीं होती तो फिर कपिल सिब्बल ने किस हैसियत से सुप्रीम कोर्ट में यह बात कही थी कि रामजन्मभूमि मुद्दे की सुनवाई 2019 से पहले नहीं होनी चाहिए।












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