चिन्मयानंद पर बलात्कार का केस क्यों नहीं दर्ज कर रही है यूपी पुलिस?

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शाहजहांपुर में लॉ कॉलेज की छात्रा के आरोपों और शिकायत के बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ यौन शोषण का मामला दर्ज नहीं किया है.

हालांकि यह मामला अब एसआईटी को सुपुर्द हो गया है लेकिन लड़की और उसके पिता की ओर से बार-बार की जा रही मांग के बावजूद इस मामले में एफ़आईआर दर्ज न होने से कई सवाल उठ रहे हैं.

बुधवार को इस मामले में नया मोड़ आया जब पहले स्वामी चिन्मयानंद का एक नग्न वीडियो वायरल हुआ जिसमें वो किसी लड़की से मसाज करा रहे हैं और मोबाइल फ़ोन पर कुछ टाइप कर रहे हैं.

इसके बाद एक दूसरा वीडियो भी सामने आया है जिसमें स्वामी चिन्मयानंद से पांच करोड़ की फ़िरौती मांगने संबंधी बातचीत है. बीबीसी इन दोनों ही वीडियोज़ की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकता.

इस मामले में स्वामी चिन्मयानंद के प्रवक्ता ओम सिंह की ओर से भी एक एफ़आईआर शाहजहांपुर में पिछले महीने दर्ज कराई गई थी.

पिछले महीने ही लड़की के पिता की शिकायत पर शाहजहांपुर पुलिस ने स्वामी चिन्मयानंद और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ अपहरण और धमकाने का मामला दर्ज किया था.

शोषण और धमकी सम्बन्धी लड़की का वीडियो वायरल होने के बाद कुछ वकीलों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया और लड़की के सुरक्षित मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को जांच के लिए एसआईटी बनाने का निर्देश दिया.

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यौन उत्पीड़न
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'ज़िलाधिकारी हमें धमका रहे हैं'

सोमवार को एसआईटी ने लड़की से क़रीब 11 घंटे तक पूछताछ की.

इसके बाद लड़की और उनके पिता ने मीडिया से बात की जिसमें उन्होंने एक बार फिर यह आरोप दोहराया कि स्थानीय प्रशासन और सरकार के दबाव में स्वामी चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है.

लड़की का कहना था, "चिन्मयानंद पिछले एक साल से मेरा शोषण कर रहे हैं, मेरे पास इसके सबूत भी हैं जिन्हें मैं उचित समय पर जांच एजेंसियों को दिखा भी सकती हूं, फिर भी पुलिस मेरी शिकायत नहीं दर्ज कर रही है."

लड़की का ये भी कहना था कि उसने यह शिकायत दिल्ली पुलिस में दी थी जिसे शाहजहांपुर पुलिस के पास बढ़ा दिया गया, लेकिन इस बात की पुष्टि न तो दिल्ली पुलिस ने की है और न ही शाहजहांपुर पुलिस ने.

वहीं लड़की के पिता का आरोप है कि जब से ये मामला सामने आया है, शाहजहांपुर के ज़िलाधिकारी उन्हें लगातार धमकी दे रहे हैं.

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'पुलिस अधीक्षक भी हैं ख़ामोश'

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "जब हमारी लड़की लापता हुई थी, तब भी हमने अपनी शिकायत में रेप की बात कही थी लेकिन डीएम साहब ने हमें धमकाते हुए कहा कि लड़की के अपहरण की शिकायत लिखो. उन्होंने हमसे इस मामले को ख़त्म करने और आगे न बढ़ाने को भी कहा है. मेरी मांग है कि डीएम को तत्काल यहां से हटाया जाए क्योंकि उनके रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो सकती."

इन आरोपों पर शाहजहांपुर के ज़िलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह की प्रतिक्रिया जानने की कई बार कोशिश की गई लेकिन उनकी प्रतिक्रया नहीं मिल सकी.

शाहजहांपुर के कुछ पत्रकारों का कहना है कि इस मामले में ज़िलाधिकारी ने कुछ भी कहने से साफ़तौर पर इनकार कर दिया है लेकिन सबसे दिलचस्प है शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक का ख़ामोश रहना.

शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक एस. चिनप्पा का मोबाइल फ़ोन बुधवार को लगातार स्विच ऑफ़ था तो ज़िले के दूसरे पुलिस अधिकारी मीटिंग में व्यस्तता की बात कहकर इस सवाल को टालते रहे कि आख़िर सार्वजनिक तौर पर शिकायत करने और पुलिस को लिखित शिकायत देने के बावजूद पीड़ित लड़की की एफ़आईआर क्यों नहीं दर्ज की जा रही है?

हालांकि कुछ अधिकारी इस बारे में ये भी दलील दे रहे हैं कि मामला एसआईटी के पास है और कोर्ट की निगरानी में सब कुछ हो रहा है, इसलिए अब एसआईटी ही कोई शिकायत दर्ज करेगी.

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क्या अब ज़िला पुलिस की कोई भूमिका नहीं?

यूपी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस पूरे मामले में शाहजहांपुर पुलिस कहीं है ही नहीं, इसलिए उसने रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी, ये सवाल ही सही नहीं है.

उनका कहना था, "लड़की के पिता ने जो शिकायत दी थी उसके आधार पर अपहरण और धमकी का मामला दर्ज किया गया. लड़की के वीडियो के आधार पर भी यही केस बनता था क्योंकि उसने भी रेप की बात नहीं की थी बल्कि यही कहा था कि धर्म-समाज के एक बड़े व्यक्ति ने कई लड़कियों का शोषण किया है. उसके बाद की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में हो रही है और उसी के निर्देशन पर एसआईटी का गठन हुआ है. अब यहां ज़िला पुलिस की कोई भूमिका ही नहीं है."

हालांकि ऐसा नहीं है कि एसआईटी की जांच के दौरान ज़िला पुलिस कोई नया मामला नहीं दर्ज कर सकती है.

लंबे समय से अपराध की ख़बरों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार विवेक त्रिपाठी कहते हैं, "ज़िला पुलिस को शिकायत दी जाती है, तो वो दर्ज कर सकती है. नया केस एसआईटी भी दर्ज कर सकती है. ऐसा नहीं है कि एसआईटी की वजह से ज़िला पुलिस की भूमिका ख़त्म हो गई है."

हालांकि बताया ये भी जा रहा है कि देर-सवेर बलात्कार का मामला ज़रूर दर्ज हो जाएगा क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करेगा.

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चिन्मयानंद को बचाने की कोशिश?

वहीं लड़की के पिता ने तो प्रशासन के दबाव का आरोप लगाया ही है, राजनीतिक गलियारों में भी इसकी जमकर चर्चा हो रही है.

हालांकि यह वीडियो सामने आने के बाद हो सकता है कि उनके प्रति 'राजनीतिक सहानुभूति' कम हो जाए लेकिन अब तक जिस धीमी गति से कार्रवाई हो रही है, उसे देखते हुए उनके प्रभाव को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान कहते हैं, "सरकार और ख़ासकर मुख्यमंत्री के वो बेहद क़रीबी हैं ही. सुप्रीम कोर्ट दख़ल न देता तो उनके ऊपर भला कौन हाथ डाल सकता था. अब भी कोशिशें बहुत हो रही हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती को देखते हुए लगता नहीं कि राज्य सरकार उन्हें बचा पाएगी."

बीजेपी के पूर्व सांसद चिन्मयानंद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं और राम मंदिर आंदोलन के बड़े नेताओं में शुमार रहे हैं. शाहजहांपुर में उनका आश्रम है और वो कई शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधन से भी जुड़े हैं.

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पहले भी लगे हैं यौन उत्पीड़न के आरोप

आठ साल पहले शाहजहांपुर की ही एक अन्य महिला ने भी स्वामी चिन्मयानंद पर यौन शोषण और उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था. महिला स्वामी चिन्मयानंद के ही आश्रम में रहती थी.

हालांकि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद सरकार ने उनके ख़िलाफ़ लगे इस मुक़दमे को वापस ले लिया था लेकिन पीड़ित पक्ष ने सरकार के इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी थी. फ़िलहाल हाईकोर्ट से इस मामले में स्टे मिला हुआ है.

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