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West Bengal में मुस्लिम वोटरों का है समर्थन, फिर भी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस क्यों है बेचैन?

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बंगाल में 2011 से ममता बनर्जी की सरकार है और इनकी तृणमूल कांग्रेस को मुस्लिम वोटरों का जबरदस्‍त सपोर्ट मिलता आया है। पश्चिम बंगाल में पिछले डेढ़ दशक से मुस्लिम समुदाया टीएमसी की चुनावी सफलता का एक मुख्य स्तंभ रहा है लेकिन राज्‍य में मुस्लिम समुदाया से जुड़ी घटनाओं ने विधानसभा से पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बेचैनी बढ़ा दी है।

दरअसल, बंगाल में जिस मुस्लिम समुदाय पर टीएमसी अपना एकाधिकार समझता था उसी समुदाय पर पार्टी की पकड़ कमजोर होने का संकेत 6 दिसंबर 2025 को मिला। जब टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के मुस्लिम बहुल जिले में हजारों समर्थकों की मौजूदगी में "बाबरी मस्जिद" की नींव रखी।

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हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी के खिलाफ खोला मोर्चा

वहीं इसके दो दिन बाद 8 दिसंबर 2025 को हुमांयू कबीर ने जल्‍द अपनी नई पार्टी बनाने की घोषणा की और बताया कि वह असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम और इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) से बातचीत कर रहे हैं और हम मिलकर बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

हुमायूं कबीर बोले- ममता सरकार को उखाड़ फेंकेगे

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को दिए इंटरव्‍यू में हुमायूं कबीर ने कहा हम 135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और कम से कम 90 सीटें जीतेंगे। उन्‍होंने ये भी कहा हम ममता बनर्जी की सरकार को उखाड़ फेंकेगे। कबीर ने कहा जो भी जीतेगा, मुसलमानों के पास अपनी मांगें रखने के लिए एक मंच होगा। कई जाने-माने दलों के नेता हमारे संपर्क में हैं। हम मुसलमानों के एकमात्र प्रतिनिधि बनने की कोशिश करेंगे, जिनके हितों की टीएमसी ने रक्षा नहीं की है।"

सीएम ने किया ये वादा

टीएमसी से निष्‍काषित विधायक कबीर के इस ऐलान के बाद टीएमसी का मुस्लिम वोट खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। वहीं इस सबके बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा और मुर्शिदाबाद का दौरा कर "सांप्रदायिक घृणा" समाप्त करने का वादा किया।

पश्चिम बंगाल में हैं मुस्लिम वोटरों की कुल संख्‍या?

2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगभग 27% है, और यह समुदाय मुर्शिदाबाद, मालदा तथा उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में प्रमुखता से केंद्रित है।

2021 में टीएमसी ने कितनी मुस्लिम बहुल्‍य सीटें जीती

2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने मुर्शिदाबाद की 22 में से 20 सीटें, मालदा की 12 में से 8 और उत्तर दिनाजपुर की 6 में से 4 सीटें जीतीं। चुनाव के बाद भाजपा के रायगंज विधायक टीएमसी में लौट आए थे।

मुस्लिम वोटरों का समर्थन होने के बाद भी TMC क्‍यों है बेचैन?

  • टीएमसी के भीतर बेचैनी बढ़ाने वाले अन्य कारक ओबीसी आरक्षण को लेकर मुस्लिम समुदाय में बढ़ता असंतोष है। इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार टीएमसी सरकार वक्फ कानून पर अपने विरोधपूर्ण रुख से "पीछे हट गई" और इसे लागू करने पर सहमत हो गई है।
  • अक्टूबर में मुर्शिदाबाद शहर में राज्य की नई ओबीसी सूची के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने मुसलमानों को "वंचित" करने का आरोप लगाया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 37 समुदायों को ओबीसी सूची से पूरी तरह हटा दिया गया। वहीं, शर्शाबादिया, खोट्टा, मल्लिक और राजमिस्त्री जैसे 34 प्रमुख मुस्लिम समूहों को ओबीसी-ए से ओबीसी-बी में डाउनग्रेड किया गया, जिससे नौकरियों और उच्च शिक्षा में कोटे का लाभ उठाने की उनकी संभावनाएं घट गईं।
  • संशोधित वक्फ कानून की महीनों तक आलोचना के बाद, सरकार ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को केंद्र के यूएमईईडी पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों की सूची अपलोड करने का आदेश दिया। ये निर्णय टीएमसी के लिए जमीनी स्तर पर बढ़ते असंतोष के रूप में सामने आए हैं।
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