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Landslides: भूस्खलन की घटनाओं में क्यों हो गई है बढ़ोतरी ? जानिए

नई दिल्ली, 13 अगस्त: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में राहत और बचाव का काम जारी है, जहां भूस्खलन की वजह से कम से कम 15 जिंदगियों ने दम तोड़ दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में ही राज्य में भूस्खलन की ऐसी कई घटनाएं देखने को मिली हैं, जिसमें पूरी की पूरी सड़क पल भर में सैकड़ों फीट गहरी खाई में समा चुकी हैं। पड़ोसी उत्तराखंड में भी हाल के दिनों में ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल की एक रिपोर्ट भी आई है, जिसमें धरती पर मौसम की अप्रत्याशित घटनाओं में इजाफे की चेतावनी दी गई है। जलवायु परिवर्तन के चलते कहीं बहुत ही ज्यादा गर्मी पड़ेगी तो कहीं बादल फटने जैसी घटनाएं होंगी। सवाल है कि भूस्खलन की घटनाओं में अचानक इजाफे की वजह क्या है?

भूस्खलन क्या है ?

भूस्खलन क्या है ?

सामान्य शब्दों में कहें तो भूस्खलन ढलानों पर सतह के तेजी से खिसकने की ऐसी स्थिति है, जिसमें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में चट्टान, मलबा और मिट्टी एक साथ नीचे गिर जाते हैं। भौतिकी में इसकी व्याख्या थोड़ी जटिल है। इसके मुताबिक पहाड़ों और पहाड़ी ढलानों में चट्टान और सतह (मिट्टी आदि) एक-दूसरे चिपके रहते हैं। जब किसी बाहरी दबाव की वजह से इनकी एकजुटता में कमी आती है तो भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। इंडिया टुडे ने आईआईटी रुड़की में पृथ्वी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर शारदा प्रसाद प्रधान के हवाले से बताया है कि, 'सतह के पदार्थ टकराव और सामंजस्य के कारण ढलान पर एक साथ जुड़े होते हैं, एक बार इसे हटा दिया जाता है, यह एक स्खलन या भूकंप जैसी घटना को प्रेरित करता है जिसमें तोड़ने की ताकत होती है जो लुढ़कने की स्थिति पैदा कर सकता है।' किसी भी क्षेत्र के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए चट्टानों की परख बहुत ही महत्वपूर्ण है और ऐसे स्थानों पर किसी भी तरह की गतिविधि को अंजाम देने से पहले उसे ध्यान में रखना जरूरी है।

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    भूस्खलन क्यों होता है?

    भूस्खलन क्यों होता है?

    अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक लुढकने (भूस्खलन) की घटनाएं तब होती हैं, जब गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पृथ्वी की सामग्रियों की शक्ति पर भारी पड़ता है। ऐसी स्थिति कई वजहों से पैदा हो सकती है, जिनमें बारिश, हिमपात, जल स्तर में बदलाव, धारा का कटाव, भूजल में परिवर्तन, भूकंप, ज्वालामुखी गतिविधि और इंसानी गतिविधियों की वजह से पैदा होने वाले उपद्रव। अभी जिन इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, उनके अलावा जिन क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा है, वे हैं-

    • जिन इलाकों के जंगलों में आग लगने की घटनाएं हुई हैं और इंसान की हरकतों के चलते ऊपरी हिस्से में जहां वनस्पतियों का विनाश हुआ है
    • खड़ी ढलानों और ढलानों या घाटियों के तलहटी वाले क्षेत्र
    • इंसान की वजह से ढलान में आया बदलाव
    • धारा या नदियों के किनारे वाले क्षेत्र
    • बारिश के कारण ऊंची सतहों के किनारे वाले क्षेत्र
    भूस्खलन के लिए जलवायु परिवर्तन कितना जिम्मेदार है ?

    भूस्खलन के लिए जलवायु परिवर्तन कितना जिम्मेदार है ?

    भूस्खलनों में जलवायु परिवर्तन का बहुत बड़ा रोल है, क्योंकि यह मौसम के पैटर्न में बदलाव से जुड़ा है। इसके चलते दुनियाभर में मौसम की अप्रत्याशित घटनाएं देखने को मिल रही हैं। कहीं बहुत ज्यादा बारिश और बाढ़ का संकट पैदा हो रहा है तो कहीं अत्यधिक गर्मी पड़ने से जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। भारत में भी मानसून में परिवर्तन नजर आता है और लगता है कि इसकी अवधि बढ़ गई है। पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाओं में काफी ज्यादा इजाफा हुआ है। इसके चलते भी चट्टानों और मिट्टी के बीच की पकड़ ढीली पड़ रही है। प्रोफेसर शारदा कहते हैं कि 'भारतीय भू-भाग का 17 प्रतिशत हिस्सा भूस्खलन से प्रभावित है और ज्यादातर बार यह मानवीय गतिविधियों के साथ-साथ बारिश की वजह से होता है। यदि ढलान में जमा हो रहा पानी बाहर नहीं निकलता है, तो यह अधिक दबाव बनाता है और भूस्खलन की बड़ी संभावना बन जाती है।' उनके मुताबिक ढलानों में पानी न जमा हो, उसके लिए ड्रेनेज के उपाय खोजे जाने चाहिए।

    हिमालय के क्षेत्र में क्यों बढ़ गया है भूस्खलन का खतरा ?

    हिमालय के क्षेत्र में क्यों बढ़ गया है भूस्खलन का खतरा ?

    हिमालय के क्षेत्र इसकी अनूठी चट्टानी विशेषताओं के कारण बड़े भूस्खलन की संभावना रखते हैं। ये चट्टानें दरारों से भरी हुई हैं। किसी भी बाहरी गतिविधि से इसकी सतहों की एकजुटता और टकराव की स्थिति में काफी कमी आ जाती है, जो भूस्खलन के लिए ज्यादा अनुकूल स्थिति पैदा कर देती है। प्रोफेसर शारदा के मुताबिक दरारों में पानी घुसने से ढलानों पर दबाव और ज्यादा बढ़ जाता है, और ऊपर के सतहों से पानी के बहाव से हिमालय के क्षेत्र में भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। इसके अलावा पहाड़ी इलाके से वनों की कटाई और कंक्रीट का जंगल बिछाने के लिए वनस्पतियों का विनाश भी इस समस्या की बड़ी वजह बन चुका है। वनस्पतियों की जड़ें चट्टानों और मिट्टी को बांधकर रखती हैं, लेकिन उनकी कटाई से पानी उसके अंदर घुसकर उनके मजबूत जोड़ को कमजोर कर देता है।

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