क्यों गुजरात छोड़ना चाहता है यह दलित छात्र ?

डॉक्टर मारी राज
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डॉक्टर मारी राज

बड़ी संख्या में रोगियों, दुखी चेहरों और लंबी कतारों के बीच अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में तीसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहे एक मेडिकल छात्र का इलाज चल रहा है. इनका नाम है डॉक्टर मारी राज, जिन्होंने आत्महत्या की कोशिश की थी.

डॉक्टर राज का आरोप है कि उनके वरिष्ठों ने सार्वजनिक रूप से उन्हें अपमानित किया और वरिष्ठों के लिए उन्हें कुर्सी खाली करने को मजबूर किया गया. साथ ही उन्हें सहयोगियों और वरिष्ठों को चाय देने के लिए भी कहा गया था. उनका कहना है कि यह जातिगत भेदभाव का हिस्सा है.

दक्षिण भारत के तमिलनाडु से मेडिकल स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने गुजरात पहुंचे डॉक्टर राज ने जून 2015 में यहां आने के बाद से लगातार उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किये जाने का आरोप लगाया है. उन्होंने अस्पताल के नौ डॉक्टरों के ख़िलाफ़ पुलिस शिकायत भी दर्ज की है.

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जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषाई भेदभाव

खुद को जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषाई भेदभाव का शिकार बताते हुए डॉक्टर राज अब अपने घर वापस लौटना चाहते हैं और वहां अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं. डॉक्टर राज अस्पताल की शनिवार सर्जिकल यूनिट में तैनात हैं.

तमिलनाडु में तिरुनेलवेली ज़िले की एक किसान परिवार के डॉक्टर राज ने बीबीसी से कहा, "मैं अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई देश की किसी भी संस्था से कर सकता था लेकिन मैंने गुजरात को चुना. लेकिन अब मैं अपने राज्य वापस जाना चाहता हूं."

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'योग्यता के अनुसार काम नहीं मिला'

अस्पताल के कमरे में अकेले बैठे डॉक्टर राज ने बताया कि सहकर्मियों और वरिष्ठों के सार्वजनिक अपमान के कारण उन्होंने 5 जनवरी 2018 को आत्महत्या की कोशिश की. उन्होंने बहुत सारी नींद की गोलियां ले लीं. इसके बाद उन्हें सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड ले जाया गया.

उन्होंने शाही बाग पुलिस स्टेशन में इस घटना की शिकायत दर्ज की है. डॉक्टर राज ने कहा कि उनकी जाति और अन्य क्षेत्र का होने के कारण उन्हें योग्यता के अनुसार काम नहीं दिया गया.

सर्जिकल यूनिट के विभाग प्रमुख डॉक्टर प्रशांत मेहता ने बीबीसी से कहा कि डॉक्टर राज के आरोप बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा, "उन्हें मेरे साथ केवल पिछले दो महीने से रखा गया है, इस दौरान उनसे मेरी कम बातचीत हुई है, लेकिन हमारे साथ अनुसूचित जाति के कई छात्र काम कर रहे हैं और उन्हें कभी कोई समस्या नहीं हुई."

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'मुझे सर्जरी नहीं करने दी गई'

बीजे मेडिकल कॉलेज अहमदाबाद सिविल अस्पताल परिसर का एक हिस्सा है. इसे एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल कहा जाता है. यह गुजरात के शुरुआती मेडिकल कॉलेजों में से एक है. बीजे मेडिकल कॉलेज से आधी दर्जन से अधिक संस्थाएं मान्यता प्राप्त हैं.

डॉक्टर मेहता ने कहा कि डॉक्टर राज ने 5 जनवरी को सर्जरी करने की मांग की थी. उन्होंने कहा, "विभाग प्रमुख के रूप में मैं एक छात्र को सर्जरी करने की अनुमति नहीं दे सकता. वो पिछले दो महीने में 22 सर्जरी का हिस्सा रहे हैं."

अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत डॉक्टर राज की दर्ज प्राथमिकी में डॉक्टर मेहता भी एक अभियुक्त हैं.

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पहले भी की थी शिकायत

सहायक पुलिस अधीक्षक राजेश गाधिया ने बीबीसी को बताया, "जांच शुरू कर दी गयी है और हम गवाहों के बयान दर्ज कर रहे हैं. हालांकि, अभी किसी अभियुक्त को गिरफ़्तार नहीं किया गया है."

उन्होंने कहा, "कुछ पुख्ता सबूत और गवाह इकट्ठा करके हम उन्हें गिरफ़्तार करेंगे."

डॉक्टर राज ने 5 जनवरी को हुई घटना के बारे में बताया, "उन्होंने मेरे ख़िलाफ़ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. यह पहली बार नहीं था. मैंने सितंबर 2015 में भी अस्पताल प्रशासन के पास अपनी शिकायत दर्ज की थी. तब कोई कार्रवाई नहीं हुई और ना ही यह बंद हुआ.

डॉक्टर राज कहते हैं कि उन्हें अपने वरिष्ठों के लिए कुर्सी खाली करने को कहा जाता. सभी के लिए खाने का सामान और चाय इत्यादि लाने को कहा जाता.

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अस्पताल नहीं दे रहा इलाज, भोजन

वो कहते हैं, "मैं तीसरे वर्ष का छात्र हूं और मुझे वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ सर्जरी का अधिकांश हिस्सा पूरा करने की इजाजत दी जानी चाहिए, लेकिन मुझसे हमेशा ही भेदभाव किया गया है."

उन्होंने आगे कहा, "मुझसे गुलामों की तरह बर्ताव किया गया और सिक्युरिटी गार्ड की तरह ऑपरेशन थियेटर के बाहर खड़ा रहने के लिये बाध्य किया गया. मेरे सिवा सभी रेसिडेंट डॉक्टरों को सेमिनार क्लास लेने की अनुमित दी गयी."

5 जनवरी से अस्पताल में भर्ती डॉक्टर राज का कहना है कि, "सोमवार से डॉक्टर मेरे पास नहीं आये हैं. मुझे इलाज और भोजन नहीं दिया जा रहा. ड्यूटी पर मौजूद पुलिस स्टाफ मेरे लिए भोजन की व्यवस्था करता है."

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मां ने की थी अनुसूचित जाति आयोग से शिकायत

डॉक्टर राज के बड़े भाई जापान में वैज्ञानिक हैं, जबकि उनके छोटे भाई तमिलनाडु से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं. उनकी मां एम. इंदिरा ने सितंबर 2017 में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष को अपने बेटे के साथ हो रहे कथित भेदवाव के बारे में लिखा था.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, अनुसूचित जातियों के ख़िलाफ़ अपराध दर के मामले में गुजरात 10 सबसे ख़राब राज्यों में से है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में इनमें बढ़ोतरी हुई है.

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