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Earthquake Delhi: दिल्ली में क्यों बार-बार आते हैं भूकंप? दिल्लीवासियों के लिए कितना है खतरा?

Earthquake Delhi (Bhukamp): दिल्ली-एनसीआर में 10 जुलाई 2025 की सुबह फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह 9:04 बजे झज्जर (हरियाणा) के पास रिक्टर स्केल पर 4.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद समेत राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तक महसूस किए गए।

लोग घबराकर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए, हालांकि किसी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि दिल्ली में बार-बार भूकंप के झटके क्यों महसूस किए जाते हैं। साल में दो-तीन बार दिल्ली में भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि दिल्ली में क्यों बार-बार भूकंप आता है और ये कितना बड़ा खतरा है।

Earthquake Delhi Bhukamp

🔴 दिल्ली में क्यों आते हैं बार-बार भूकंप?

दिल्ली का भौगोलिक स्थान इसे भूकंप के लिहाज से संवेदनशील बनाता है। यह शहर सीस्मिक जोन IV में आता है, जो कि उच्च खतरे वाली श्रेणी है। दिल्ली के नीचे मौजूद "दिल्ली-हरिद्वार रिज" और "अरावली फॉल्ट सिस्टम" जैसे भूगर्भीय स्ट्रक्चर, साथ ही हिमालय की ओर बढ़ती भारतीय प्लेट -सब मिलकर इस क्षेत्र को बार-बार हिलने का कारण बनाते हैं।

भारतीय टेक्टोनिक प्लेट हर साल करीब 5 सेमी की रफ्तार से यूरेशियन प्लेट की ओर बढ़ रही है। यह टकराव ही हिमालय पर्वत श्रृंखला को बनाता है, लेकिन इसके साथ ही जमीन के नीचे तनाव जमा होता है और जब वह अचानक मुक्त होता है, तो भूकंप आता है।

Seismic Zone IV: क्या होता है सीस्मिक जोन IV: दिल्ली, सीस्मिक जोन IV में स्थित है, जिसे दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) द्वारा उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना गया है। इस जोन में भूकंप सामान्यतः 5-6 तीव्रता के होते हैं और कभी-कभी 7-8 तीव्रता के झटके भी आ सकते हैं। हालांकि, भूकंपीय क्षेत्र का यह वर्गीकरण समय-समय पर बदलता रहता है, क्योंकि यह एक सतत अध्ययन और निगरानी की प्रक्रिया है।

साल 1720 के बाद से अब तक दिल्ली में 5.5 या उससे अधिक तीव्रता के कम से कम पांच बड़े भूकंप आ चुके हैं। उत्तर भारत और विशेष रूप से हिमालय क्षेत्र में, भारतीय प्लेट का यूरेशियन प्लेट से टकराव इस क्षेत्र में भूकंप की प्रमुख वजह है। ये टेक्टोनिक प्लेट्स एक स्प्रिंग की तरह ऊर्जा संचित करती हैं और जब ये एक-दूसरे के ऊपर फिसलती हैं, तो वह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, जिससे जमीन हिलती है - यानी भूकंप आता है।

DDMA की वेबसाइट के मुताबिक,

"दिल्ली के आसपास का भूकंपीय व्यवहार एक प्रमुख भूगर्भीय संरचना से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, जिसे 'दिल्ली-हरिद्वार रिज' कहा जाता है। यह अरावली पर्वतमाला की वह शाखा है, जो गंगा के मैदानों की सतह के नीचे से होते हुए दिल्ली के उत्तर-पूर्व की ओर हिमालय की दिशा में जाती है।"

🔴 क्या दिल्ली में बड़ा भूकंप आ सकता है?

हां, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि हिमालयी क्षेत्र में 8.0 या उससे अधिक तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप "ओवरड्यू" है, यानी वह कभी भी आ सकता है। और इसका असर दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत पर पड़ सकता है।

दिल्ली की बहुत सी इमारतें भूकंप-रोधी नहीं हैं, खासकर पुरानी और अव्यवस्थित तरीके से बनी कॉलोनियां। नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) के मुताबिक, दिल्ली में 6.5% मकान ऐसे हैं जिन्हें तीव्र झटकों से भारी नुकसान हो सकता है, जबकि 85% मकान मध्यम क्षति की श्रेणी में आते हैं।

🔴 दिल्ली को भूकंप से प्रभावित करने वाले प्रमुख फॉल्ट लाइन

  • हिमालयन सीस्मिक बेल्ट - जहां से 1905 का कांगड़ा भूकंप और 2015 का नेपाल भूकंप आया था।
  • दिल्ली-हरिद्वार रिज - जो दिल्ली के नीचे से होकर गुजरता है और आंतरिक भूकंपों का कारण बन सकता है।
  • अरावली-फॉल्ट सिस्टम - एक गहरा भूगर्भीय स्ट्रक्चर जो पहले भी भूकंपों के लिए ज़िम्मेदार रहा है।
  • इंडो-गैंगेटिक प्लेन की मिट्टी - यह नर्म और एल्यूवियल मिट्टी भूकंपीय तरंगों को और ज़्यादा बढ़ा देती है, जिससे हल्का भूकंप भी ज़्यादा महसूस होता है।

दिल्ली में आए प्रमुख भूकंप (इतिहास)

  • 1720 - दिल्ली में ~7.5 तीव्रता का भूकंप
  • 1803 - मथुरा भूकंप, दिल्ली में तेज़ झटके
  • 2015 - नेपाल भूकंप (7.8 तीव्रता), दिल्ली में घबराहट
  • 2023 - नेपाल में 6.4 तीव्रता, दिल्ली में भी झटके

🔴 क्या भूकंप दिल्ली को असुरक्षित बनाते हैं?

दिल्ली केवल सीस्मिक जोन-IV में होने के कारण ही भूकंप के खतरे में नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की एक SWOT (ताकत, कमजोरियां, अवसर और खतरे) विश्लेषण रिपोर्ट में पाया गया है कि दिल्ली में भूकंप-रोधी निर्माणों की कमी, घनी आबादी, असंगठित और असुरक्षित ढांचे, और भीड़भाड़ वाले इलाके भी इसे और ज्यागा असुरक्षित बनाते हैं।

भारत के वल्नरेबिलिटी एटलस (1997) के मुताबिक अगर भूकंप की तीव्रता VIII (8) मानी जाए, तो दिल्ली में लगभग 6.5% घरों को भारी नुकसान और 85% से अधिक घरों को मध्यम नुकसान पहुंचने का जोखिम है। हालांकि, DDMA का कहना है कि ये अनुमान बहुत ही सामान्य धारणाओं पर आधारित हैं, और अलग-अलग प्रकार के निर्माणों की वास्तविक भूकंपीय संवेदनशीलता को समझने के लिए और गहराई से अध्ययन की जरूरत है।

DDMA यह भी मानता है कि अगर दिल्ली में कोई बड़ा भूकंप आता है, तो उसका असर सिर्फ जानमाल की हानि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। एजेंसी यह स्वीकार करती है कि शहर में बड़ी आपदा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसकी "विशिष्ट" भूगर्भीय संरचना इसे कुछ हद तक मजबूत झटकों को सहने में सक्षम बनाती है।

DDMA के मुताबिक,

"दुर्भाग्यवश, दिल्ली के अधिकांश भवन भारतीय भूकंप-रोधी मानकों के अनुरूप नहीं हैं और उन्हें भूकंप सुरक्षा की दृष्टि से कमजोर माना जा सकता है। इसलिए, दिल्ली में एक बड़े भूकंप आपदा की वास्तविक संभावना मौजूद है, जिसके परिणाम केवल हताहतों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि राजनीतिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी बहुत दूरगामी होंगे।"

भूकंप आने क्या करें, क्या न करें?

✔ करें:

  • मजबूत जगहों पर शरण लें (टेबल, दरवाज़े का फ्रेम)
  • खुले में जाने की कोशिश करें
  • लिफ्ट का इस्तेमाल न करें

❌ न करें:

  • अफवाहें न फैलाएं
  • खिड़कियों या ऊंची अलमारियों के पास न खड़े हों
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