TMC और प्रशांत किशोर के बीच क्यों उठी मतभेद की बात ? जानिए
नई दिल्ली, 23 दिसंबर: चुनाव रणनीतिकार और इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमिटी (आई-पीएसी) के बॉस प्रशांत किशोर और तृणमूल कांग्रेस के बीच मतभेद की खबरें ऐसी उठीं की टीएमसी को आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए इसपर सफाई देनी पड़ी है। पार्टी ने यह बताने की कोशिश की है कि अभी अंदर सब ठीक-ठाक है। लेकिन, पश्चिम बंगाल के चुनाव के बाद प्रशांत किशोर जिस तरह से पर्दे के आगे से आकर बैटिंग कर रहे हैं, वह उनके अबतक के करियर में एक बड़ा बदलाव नजर आ रहा है। और टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने बुधवार को उनके संबंध में जो कुछ कहा था, वह किसी न किसी गतिरोध की ही ओर ही इशारा था।

कहां से शुरू हुआ मतभेद का मामला ?
तृणमूल कांग्रेस ने गुरुवार को ट्विटर के जरिए सफाई दी है कि पार्टी और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर या उनकी संस्था के बीच किसी तरह का मतभेद है। पार्टी ने दावा किया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी और प्रशांत किशोर की संस्था मिलकर एक टीम के तौर पर काम कर रही है। दरअसल, यह विवाद बेवजह नहीं शुरू हुआ। टीएमसी के राज्यसभा सांसद और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के करीबी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने बुधवार को दिल्ली में कहा था कि, 'हमारी एक राजनीतिक पार्टी है और आई-पीएसी हमारी राजनीतिक सहकर्मी है।' इस तरह से उन्होंने दोनों के बीच स्पष्ट लाइन विभाजित कर दी थी।
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क्यों उठी टीएमसी-पीके में मतभेद की बात ?
तृणमूल नेता ने पार्टी और पीके के बीच एक विभाजन रेखा ही नहीं खींची थी। उन्होंने यहां तक कहा था कि, 'आई-पीएसी की जिम्मेदारी जमीनी स्तर तक पहुंचने, संवाद स्थापित करने, रणनीति तैयार करने और इसी तरह से है। लेकिन, एक बाद सबको हमेशा याद रखना होगा कि तृणमूल की 21 सदस्यीय वर्किंग कमिटी आखिरी फैसला लेती है।' लेकिन, इस दौरान पार्टी अपना संविधान इस तरह से बदलने की तैयारी में भी है कि औपचारिक तौर पर भी ममता को हर फैसले को बदलने का वीटो मिल जाए।

विवाद का धुआं कब उठा ?
माना जा रहा था कि ब्रायन ने आई-पीएसी और पार्टी के बीच जो एक लक्ष्मण रेखा खींचने की कोशिश की थी, वह हाल में प्रशांत किशोर के जरिए टीएमसी में शामिल हुए कुछ नेताओं के बयान की वजह से दी गई। क्योंकि, मेघालय के कांग्रेस नेता मुकुल संगमा और गोवा के लुईजिन्हो फलेरियो ने तृणमूल में शामिल होने का श्रेय प्रशांत किशोर को ही दिया था। क्योंकि, जबतक पीके पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के लिए नीतियां बना रहे थे तबतक ऐसी लाइन खींचने की नौबत कभी नहीं आई थी। कहा जा रहा था कि कांग्रेस को लेकर उनकी टिप्पणी को भी पार्टी में अच्छे रूप में नहीं लिया गया और मीडिया रिपोर्ट्स में यहां तक कहा गया कि कोलकाता नगर निगम चुनाव में भी पार्टी ने पीके से मिले इनपुट को नजरअंदाज कर दिया।

खुद को राजनीतिक सहयोगी के तौर देखने लगे हैं पीके
अब पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस विवाद पर सफाई देते हुए लिखा गया है कि, 'टीएमसी और आई-पीएसी के बीच मतभेद या कामकाजी संबंधों के बारे में पूरी तरह से अटकलबाजी और निराधार रिपोर्टिंग में कोई दम नहीं है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में हम एक टीम के तौर पर काम करते हैं और भविष्य में भी तालमेल के साथ जारी रखेंगे।' वैसे किशोर ने आई-पीएसी की स्थापना की थी, लेकिन मई 2021 में पश्चिम बंगाल में तृणमूल की जीत के साथ इससे इस्तीफा देने का दावा किया था। इसके बाद से वह राजनीतिक बैठकों में भी सक्रिय दिखे हैं। उन्होंने बुधवार को ही वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता को दिए इंटरव्यू में कहा है,'मैं खुद को राजनेताओं के एक राजनीतिक सहयोगी के तौर पर देखता हूं, जो मेरे साथ चुनावों के मद्देनजर और उससे आगे काम करना चुनते हैं।'












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