Karnataka: कांग्रेस ने सरकार का दावा पेश करने के लिए सीएम पद पर दावेदारी कर रहे जी परमेश्वर को क्यों भेजा?
कांग्रेस ने सरकार का दावा पेश करने के लिए सीएम पद पर दावेदार रहे जी परमेश्वर को कांग्रेस प्रतिनिधि बनाकर राज्यपाल के पास भेजा। आइए जानते हैं आखिर इसके पीछे वजह क्या है?

कर्नाटक विधासभा चुनाव में बंपर जीत हासिल करने वाली कांग्रेस ने अपनी सरकार के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस ने कर्नाटक के पूर्व मुख्मयंत्री सिद्धारमैया पर विश्वास जताते हुए उन्हें दोबारा प्रदेश की कमान सौंपते हुए मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया है। वहीं डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया है।
वहीं सीएम और डिप्टी सीएम के नाम के ऐलान करने के बाद कांग्रेस ने राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए अपने वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व डिप्टी सीएम जी परमेश्वर को भेजा कांग्रेस प्रतिनिधि बनाकर भेजा है। जबकि जी परमेश्वर भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने की रेस में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के अलावा शामिल थे।
अब जबकि साफ हो चुका है कि जी परमेश्वर को ना तो सीएम बनाया जा रहा और ना ही डिप्टी सीएम तो आखिर कांग्रेस ने उन्हें ही राज्यपाल के पास कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा करने के लिए क्यों भेजा? आइए जानते हैं।
जी परमेश्वर को प्रतिनिधि बनकार भेजा?
दरअसल, कांग्रेस जो कि लंबे संघर्ष के बाद कर्नाटक में सत्ता में आई, जिसने प्रदेश ही नहीं पूरे देश भर की कांग्रेस पार्टी के लिए नई जान फूंक दी है, ऐसे में वो कर्नाटक में अपने किसी भी नेता को नाराज करके कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। जी परमेशवर को अपना प्रतिनिधि बनाकर राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा करने का भेजने का उद्देश्य उनको अहमियत देकर खुश करना है।
दलितों के नेता हैं जी परमेश्वर
जी परमेश्वर कांग्रेस के दिग्गज नेता होने के साथ दलित नेता हैं उन्होंने ये कहते हुए मुख्यमंत्री पद की मांग की थी कि दलितों ने कांग्रेस को वोट दिया है अगर वो चाहते हैं कि उनका दलित नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया जाए तो उनकी मांग जायज है। हालांकि उन्हें मुख्यमंत्री और ना ही उपमुख्यमंत्री बनाया गया है तो उनका और उनके गुट के विधायकों का गुस्सा होना लाजमी है।
कांग्रेस को सता रहा ये डर
ऐसे में कांग्रेस आलाकमान ने कांग्रेस में किसी भी तरह की फूंट से बचने के लिए अन्य वरिष्ठ नेताओं के बजाय जी परमेश्वर को अहमियत देते हुए राज्यपाल के पास अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है।
परमेश्वर ने बोली था- मैं दमन का शिकार हूं और सीएम नहीं बन सका
बता दें कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर दलित समुदाय से आते हैं। वो जब जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार में 2019 में उपमुख्यमंत्री थे तब उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वह दलित दमन के शिकार हैं, और उन्हें उनकी जाति के कारण मुख्यमंत्री बनने के अवसर से वंचित किया गया था।
दलित समूहों को प्रेरित करने की पहले कर चुके हैं कोशिश
जी परमेश्वर ने ये बात दावणगेरे क्षेत्र में चलावडी समुदाय में एक दलित समूह के सदस्यों के साथ एक बैठक में बोलते हुए, परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन में "अनिच्छा से उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया है"। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता परमेश्वर ने कहा था कि मैं दमन का शिकार हूं और सीएम नहीं बन सका।' तब परमेश्वर के इस बयान को दलितों नेताओं के बीच दलित समूहों को प्रेरित करने के प्रयास के रूप में भी देखा गया था।
कर्नाटक चुनाव में 51 आरक्षित सीटों पर कांग्रेस का दबदबा
बता दें कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में कर्नाटक के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति ने जमकर वोट दिया है। कर्नाटक की 224 सीटों में 51 सीटें आरक्षित हैं। जिसमें अनुसूचित जाति उम्मीदवार के लिए आरक्षित सीटों में से 21 पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है! एसटी सीटोंं की बात करें तो इन आरक्षित सीटों में से 14 पर कांग्रेस पार्टी ने कब्जा जमाया है।












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