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'सरकार एक "निकम्मी" चीज है', मोदी सरकार के दिग्गज मंत्री ने क्‍यों बोली ये बात? क्‍यों भड़क उठे

Nitin Gadkari Political News: पीएम मोदीनरेद्रं मोदी सरकार मंत्री नितिन गडकरी अपने शानदार काम ही नहीं अपने सधे हुए अंदाज के लिए जाने जाते है। लेकिन केंद्रीय गडकरी ने हाल ही में मंच पर से ऐसा बयान दिया है जिसने एक बार फिर सबका ध्‍यान आकर्षित किया है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक विवादास्पद बयान में सरकार को 'निकम्मी' बताया है। जानिए नितिन गडकरी जो कि स्‍वयं मोदी कैबिनेट और सरकार का हिस्‍सा हैं तो उन्‍होंने ये बात क्‍यों कही?

Nitin Gadkari

कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा कि किसी भी चीज के लिए शुल्क लेना आवश्यक है, मुफ्त में कुछ नहीं सिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में तो मुफ्तखोरों का बाजार होता है, जहां हर कोई सब कुछ मुफ्त में चाहता है, लेकिन वे (गडकरी) मुफ्त में कुछ भी नहीं देते।

सरकार एक "निकम्मी" चीज है जो...

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक "निकम्मी" चीज है जो चलती गाड़ी को भी पंक्चर कर सकती है। गडकरी ने कहा कि सरकार किसी भी कॉर्पोरेशन के भरोसे कोई काम नहीं करती, बल्कि चलती गाड़ी को पंक्चर करने में माहिर है। उन्होंने मुफ्त योजनाओं पर भी तंज कसते हुए कहा कि वे मुफ्त में कुछ भी नहीं देते।

Nitin Gadkari

"कॉर्पोरेशन के भरोसे कोई काम नहीं होता"

नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा, "मेरे चार साल के अनुभव के बाद मुझे यह समझ आया कि सरकार एक बहुत ही निकम्मी चीज है।" उन्होंने आगे कहा कि कॉर्पोरेशन के भरोसे कोई काम नहीं होता, ये तो चलती गाड़ी को पंक्चर करने में माहिर होते हैं।

क्‍यों नितिन गडकरी ने सरकार को कहा निकम्‍मा?

दरअसल, नागपुर में स्टेडियम बनवाने की अपनी इच्छा को लेकर सरकारी उदासीनता से वे काफ़ी निराश थे। इसी निराशा में उन्होंने यह बयान दिया। अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाने वाले गडकरी ने एक कार्यक्रम में मुफ्त की योजनाओं पर भी निशाना साधा।

"सबको फोकट का कुछ चाहिए"

गडकरी ने मुफ्तखोरी की मानसिकता पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हर किसी को मुफ्त में सब कुछ चाहिए, लेकिन वे मुफ्त में कुछ भी नहीं देते। उन्होंने कहा कि राजनीति में सबकुछ मुफ्त है, लेकिन ऐसी सोच नहीं होनी चाहिए।नितिन गडकरी ने कहा, "सबको फोकट का कुछ चाहिए। मैं नहीं देता फोकट में कुछ।" गडकरी नागपुर में खेलों के लिए 300 स्टेडियम बनवाना चाहते हैं, लेकिन सरकारी सुस्ती के कारण उन्हें निराशा हुई।

गडकरी ने ये किस्सा भी सुनाया

इस दौरान गडकरी ने एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि दुबई से एक व्यक्ति उनके पास आया और कहा कि वह दुबई में एक खेल स्टेडियम चलाते हैं। गडकरी ने जब पूछा कि वे इसे कैसे चलाते हैं, तो उस व्यक्ति ने कहा कि वे 15 साल का टेंडर देंगे और लाइट, पानी और कपड़े बदलने की व्यवस्था करेंगे। वे ही इसका रखरखाव करेंगे और खेलने आने वाले बच्चों से फीस लेंगे।

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