क्यों कांग्रेस की 'मंडली' में फिट बैठे इमरान प्रतापगढ़ी ? दूसरे 'इमरान' खाली हाथ
नई दिल्ली, 30 मई: कांग्रेस ने राज्यसभा के 10 उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है, वह पार्टी के अंदर और बाहर की राजनीति में बहस का मुद्दा बन गया है। कई नेताओं ने काफी भरोसे से अपने लिए उम्मीद लगाए रखी थी, उनकी उम्मीद धाराशायी हो चुकी है। जबकि, कुछ की तो जैसे लौटरी ही लग गई है। उन्हीं में से एक हैं पार्टी के युवा नेता और कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी। साफ है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश के इस शायर को महाराष्ट्र से टिकट देकर लंबे वक्त के लिए मुस्लिम राजनीति के हिसाब से दांव लगाया है। लेकिन, कांग्रेस की इस लिस्ट को देखकर यूपी के एक और 'इमरान' हैं, जिन्हें शायद आज अपनी 'गलती' पर काफी पछतावा हो रहा होगा।

कांग्रेस की लिस्ट में इमरान प्रतापगढ़ी की लगी लॉटरी
कांग्रेस की ओर से रविवार देर रात जारी राज्यसभा चुनावों के लिए 10 उम्मीदवारों की लिस्ट ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर स्थिति साफ कर दी है। पार्टी के अंदर खाने से ही आरोप लग रहे हैं कि जो गांधी परिवार के सबसे ज्यादा नजदीक हैं, उन्हीं की लॉटरी लगी है। उन्हीं में से एक शायर इमरान प्रतागढ़ी भी हैं, जो यूपी से ऊपरी सदन में जाने की सोच भी नहीं सकते थे, तो पार्टी आलाकमान ने महाराष्ट्र से उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया है। प्रतापगढ़ को अपने नाम के साथ जीवंत रखने वाले इमरान को पार्टी शायद अपना सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा बनाने की दांव चल चुकी है, क्योंकि लिस्ट से वरिष्ठ कांग्रेसी गुलाम नबी आजाद का नाम गायब है। इमरान प्रतापगढ़ी काफी युवा भी हैं।

कौन हैं इमरान प्रतापगढ़ी ?
इमरान प्रतापगढ़ी पिछला लोकसभा चुनाव यूपी के मुरादाबाद से लड़ चुके हैं और इस समय कांग्रेस के अल्पसंख्यक सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। राजनेता बनने से पहले वे शायर के तौर पर मशहूर रहे हैं। इमरान अपनी शायरी के जरिए बीजेपी को निशाना साधने की वजह से ही कांग्रेस आलाकमान के दिलों में अपने लिए बहुत ही जल्द जगह बना पाए हैं। यही वजह है कि 2019 में मुरादाबाद से लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने बाकी हारे हुए नेताओं की तरह उनपर भी महाराष्ट्र से दांव लगाया है, जहां कांग्रेस के पास इतने विधायक हैं, जिससे इनका राज्यसभा में पहुंचना मुमकिन लग रहा है। बहुत ही कम वक्त में इन्होंने सोनिया ही नहीं, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से भी नजदीकी बना ली है। लेकिन, कांग्रेस की ओर से इमरान प्रतापगढ़ी को पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे के तौर पर उभारने की कोशिश के पीछे एक और इमरान भी माने जा सकते हैं, जो पिछले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को हराने के मकसद से कांग्रेस छोड़कर सपा के साथ हो लिए थे।(दूसरी तस्वीर- प्रतापगढ़ के ट्विटर से)

इमरान मसूद के हाथ आया पछतावा ?
सहारनपुर के पूर्व एमएलए इमरान मसूद खासकर पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के सबसे बड़े जनाधार वाले नेता माने जाते थे। यही वजह है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के खिलाफ अबतक के सबसे भयानक हेट स्पीच के बावजूद राहुल गांधी ने उन्हें कांग्रेस से दूर नहीं जाने दिया। क्योंकि, कांग्रेस यही सोचती रही कि मुसलमानों के बीच मसूद का अपना जलवा है। लेकिन, इस साल यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मसूद ने अखिलेश यादव की साइकिल थाम ली थी। चुनाव परिणाम आने के बाद भी मसूद को अपने फैसले पर पछतावा नहीं था। उन्होंने मार्च के आखिर में इंडियन एक्सप्रेस से एक इंटरव्यू में कहा था, 'जहां तक कांग्रेस का सवाल है, इसी तरह के नतीजों का अनुमान था। मैंने जो कुछ भी कहा था, वह सिर्फ मेरी ही नहीं, पार्टी के अंदर के कई नेताओं की आवाज थी। चुनाव के पहले दिन से ही यह दिख रहा था कि जनता कांग्रेस को लड़ाई में नहीं देख रही है। मैं समझ नहीं पाता हूं कि जब मैं देख रहा था कि जमीन पर क्या हो रहा है, तो वे क्यों नहीं देख सके? मैंने नेतृत्व को काफी समझाया, लेकिन दुर्भाग्य से मैं नाकाम रहा।' लेकिन, शायद मसूद को अब यह पछतावा हो रहा होगा कि उस समय अगर आलाकमान की नजरों से ही देखते रह जाते तो आज राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट अलग हो सकती थी!

'मैं पूछती हूं कि क्या मैं कम योग्य हूं'
खैर, इमरान मसूद तो अभी कांग्रेस में हैं भी नहीं। लेकिन, प्रतापगढ़ी के नाम की घोषणा के साथ ही कांग्रेस की महिला सेल की महासचिव और मुंबई कांग्रेस की उपाध्यक्ष नगमा ने ट्विटर पर ताबड़तोड़ प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'हमारी भी 18 साल की तपस्या कम पड़ गई इमरान भाई के आगे।' लेकिन,नगमा ने इतने ही भर से दम नहीं लिया। उन्होंने सीधे कांग्रेस अध्यक्ष की ओर उंगली उठाते हुए लिखा, 'सोनियाजी, हमारी कांग्रेस अध्यक्ष ने मुझसे 2003/04 निजी तौर पर राज्यसभा में जगह देने का वादा किया था, जब मैंने उनके कहने पर कांग्रेस पार्टी में शामिल हुई थी, तब हम सत्ता में नहीं थे। तब से 18 साल हो चुके हैं, उन्हें मौका नहीं मिला। मिस्टर इमरान को महाराष्ट्र से राज्यसभा भेजा जा रहा है, मैं पूछती हूं कि क्या मैं कम योग्य हूं।'

कांग्रेस पर 'मंडली' हावी ?
नगमा अकेले नहीं हैं। कांग्रेस की लिस्ट को लेकर पार्टी के अंदर भारी मायूसी और नकारात्मकता की खबरें हैं। ज्यादातर नेताओं का मानना है कि पार्टी के इतने संकट से गुजरने के बावजूद लगता है कि आलाकमान की सोच और काम करने का तरीका नहीं बदला है। द टेलीग्राफ ऑनलाइन ने पार्टी के एक नाराज वरिष्ठ नेता को कोट करते हुए लिखा है, 'पार्टी में एक मंडली है और उसी मंडली को संसद में ट्रांसप्लांट किया जाएगा।'
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