भारत में क्यों तेज़ी से सामने आ रहे हैं कोरोना पॉज़िटिव मामले? जानिए, 10 बड़ी वजहें?
नई दिल्ली। वैश्विक महामारी नोवल कोरोना वायरस को उसके शुरूआती चरण में भारत तक पहुंचने से रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की गिनती एक सुरक्षित कदम में जरूर था, लेकिन लॉकडाउन में दी गई सिलसिलेवार छूट ने एक बड़ी आबादी वाले भारत की दशा और दिशा दोनों को बिगाड़ दिया है, क्योंकि महामारी का संकट शहरों के साथ-साथ गांवों की ओर धीरे-धीरे शिफ्ट हो रहा है, जिससे संभावित खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

गौरतलब है लॉकडाउन-1 से लॉकडाउन-4 तक के बीच भारत को एक लाख संक्रमित मरीजों की संख्या तक पहुंचने में कुल 109 दिन लगे थे, लेकिन 1 लाख से 4 लाख तक संक्रमित मरीजों की संख्या तक पहुंचने की रफ्तार बेहद तेज हो गया। भारत में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1 लाख से 2 लाख होने में महज 15 दिन का वक्त लगा जबकि 2 लाख से तीन लाख पहुंचने 10 दिन और 3 लाख से 4 लाख पहुंचने में महज 8 दिन का वक्त लगा। यानी भारत में 18 दिन में 2 लाख पॉजिटिव मरीज और बढ़ गए हैं।

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हालांकि अमेरिका की तुलना में भारत में पॉजिटिव मरीजों के बढ़ने का औसत कम है। अमेरिका में 4 लाख पॉजिटिव मरीज जहां 79 दिनों में दर्ज किए गए थे, वहीं भारत में 4 लाख मरीजों का आंकड़ा 143 दिनों में सामने आया है। भारत में तेजी से बढ़ रहे मामलों के लिए फौरी कारण बढ़ते टेस्टिंग की दर को कहा जा सकता है, लेकिन भारत में तेजी से बढ़े मामलों के लिए कई और कारक बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें भारत के स्वास्थ्य सेवा की स्थिति और गरीबी रेखा के नीचे एक बड़ी आबादी भी कही जा सकती है।

उल्लेखनीय है पूरे विश्व में अब तक कोरोना वायरस से 92 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और 4.7 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 1 मई, 2020 के बाद से भारत में भी तेजी से कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होना शुरू हुआ और यह क्रम लगातार बढ़ता ही जा रहा है। एक समय में भारत में रोजाना 300 से 400 मरीजों की पुष्टि हो रही थी और मौजूदा दौर में यह आंकड़ा बढ़कर प्रतिदिन अथवा 24 घंटें बढ़कर 13000 से 14000 पहुंच गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि कोरोनावायरस पॉजिटिव मरीजों में कभी अंडर 20 से बाहर रहा भारत वर्तमान में चौथा सर्वाधिक कोरोना प्रभावित राष्ट्रों में शुमार हो चुका है और कोरोनावायरस को जन्म देने वाले चीन को अकेले महाराष्ट्र राज्य ने पछाड़ दिया है, जहां संक्रमित मरीजों की संख्या 135796 हैं जबकि चीन में अभी तक कुल संक्रमित मरीजों की संख्या महज 83, 418 ही है। चीन में मृतकों की संख्या 4634 हैं जबकि मुंबई में मृतकों की संख्या 6283 पार कर गई है।

भारत कुल संक्रमित मामलों का 31.4 फीसदी महाराष्ट्र का योगदान है। यही कारण है कि भारत ने शुरूआती दौर में सबसे अधिक प्रभावित राष्ट्र स्पेन और ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है और सर्वाधिक कोरोना पॉजिटिव मामलों में भारत चौथे नंबर पर पहुंच गया है। वर्ल्डोमीटर वेबसाइट के मुताबिक देश में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या 441663 पहुंच चुकी है और मृतकों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जो अब तक 14 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है। इसलिए कोरोना के विकराल रूप को देखते हुए भारत में अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन की चर्चा होने लगी है।

उधर, कोरानावायरस की बढ़ती भयावहता को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी लेकर चिंता जाहिर की है। चेतावनी जारी करते हुए WHO कहा है कि कोरोनावायरस ज्यादा खतरनाक फेज में पहुंच चुका है। डायरेक्टर टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस कहते हैं कि हम नये और बेहद खतरनाक चरण में पहुंच चुके हैं। संभवतः WHO यह चेतावनी गुरुवार को एक ही दिन में पूरे विश्व में करीब डेढ़ लाख से ज्यादा नए मामले सामने को आधार बनाकर कहा है।

टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस ने कोरोना की तुलना 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू से करते हुए कहा कि स्पेनिश फ्लू भी एक के बाद एक तीन बार लौटी थी। यह चीन की राजधानी बीझिंग में सामने आए नए मामलों से समझा जा सकता है। टेड्रोस ने आगे कहा कि जैसे ही लोग असावधान होंगे, कोरोना का कहर और तेजी से बढ़ेगा। उनका इशारा लॉकडाउन में दी जा रही छूट पर था, क्योंकि भारत समेत लगभग सभी देशों में लॉकडाउन हटा लिया गया है।

वर्तमान में हर दिन में सामने आ रहे हैं औसतन 10 हजार से अधिक मरीज
कोरोनावायरस के रोकथामन के लिए लागू शुरूआती लॉकडाउन से देश में गत 6 मई तक कोरोना मरीजों का आंकड़ा 50 हजार था,जिसमें 98 दिन लगे थे, लेकिन प्रवासी भारतीयों की घर वापसी की शुरुआत के बाद नए मामलों के रफ्तार तेजी आ गई। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो हर दिन 10 हजार से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। इस हिसाब से देखेंगे तो पाएंगे कि हर दिन भारत में औसतन 10 हजार से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं।

भारत पहले से अधिक हो रही टेस्टिंग, इसलिए नए मामले आ रहें हैं ज्यादा
Covid-19 के नए केसेज के पीछे भारत की बढ़ी टेस्टिंग क्षमता कही जा रही है, क्योंकि दिन प्रति दिन भारत रोजाना किए जा रहे टेस्ट्स की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है और अब यह संख्या प्रतिदिन के हिसाब से हो रही टेस्टिंग एक लाख के पार हो गई है। कहा जाता है कि कांटेक्ट ट्रेसिंग को रोकने और संक्रमण को रोकने के लिए ज्यादा टेस्टिंग जरूरी है। यह कई देशों द्वारा किए गए नतीजों से साबित भी हो चुका है कि टेस्टिंग बढ़ने से केसेज अधिक संख्या में सामने आएंगे। क्योंकि अधिकतर संक्रमित मरीज एसिम्प्टोमेटिक है, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखते और उनके पॉजिटिव होने का पता केवल टेस्ट से लगता है,लेकिन इस दौरान वह इन्फेक्शन तो फैला ही सकते हैं। इसीलिए साइंटिस्ट्स और एक्सपर्ट्स बार-बार टेस्ट्स बढ़ाने की डिमांड करते हैं।

लॉकडाउन में छूट और भारी संख्या में प्रवासियों के लौटने में बढ़ा संचरण
भारत में कोरोनावायरस के नए मामलों में रोकथाम में लॉकडाउन ने बड़ी भूमिका निभाई थी, जिससे रोजाना आने वाले नए केसेज कम थे, लेकिन लॉकडाउन में दी गई छूट और प्रवासियों के लिए चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिए घर पहुंचने से नए मामलों में तेजी से वृद्धि हुई। पिछले कुछ दिनों से बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही हुई है, जिनमें ट्रेनें, बस सेवाएं और हवाई सेवाएं शामिल है, जिसके जरिए भारी मात्रा में प्रवासी मजदूर अपने राज्य पहुंच रहे हैं, जिससे शहर से गांवों की आबादी में पहचान में न आने वाले कोरोना वायरस तेजी से फैला है। बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों का डेटा देखकर यह बात साफ पता चलती है जहां प्रवासियों के पहुंचने पर केसेज की संख्या अचानक से बढ़ी हैं।

भारत में लगातार बढ़ रहे नए मामलों से केसेज का बढ़ा बेसलोड
रोजाना नए मामले सामने आने की एक वजह लगातार बढ़ता बेसलोड है। बढ़े बेसलोड से रोज भारी संख्या में नए इन्फेक्शंस सामने आएंगे, चाहे सर्ज हो या ना हो। ऐसे में नए इन्फेक्शंस की संख्या तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन नए केसेज का ग्रोथरेट लगभग वैसा ही बना हुआ है। हालांकि बीच में तो नए केसेज की ग्रोथ रेट धीमी भी हुई थी, अब रोजाना 10 हजार से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं, जिससे मरीजों का ट्रीटमेंट और केसेज की ग्रोथरेट दोनों में गिरावट दर्ज की गई है। यह पहले की तुलना में वर्तमान की केसों के रिकवरी दर से आसानी से समझा जा सकता है।

भारत में कम टेस्ट के बावजूद ग्रोथ रेट ज्यादा है, प्रति हजार महज 3.4 टेस्ट
भारत और ब्राजील में अन्य तीन देशों के मुकाबले कोरोना टेस्ट की संख्या बेहद कम होने के बावजूद नए मामले मिलने की दर उनसे कहीं ज्यादा है। एक तरफ जहां रूस प्रति एक हजार की जनसंख्या पर 87.2 टेस्ट करा रहा है, वहीं भारत का आंकड़ा महज 3.4 टेस्ट का है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के हिसाब से देश में इस समय करीब 1.3 लाख टेस्ट रोजाना कराए जा रहे हैं, जबकि रूस में यह आंकड़ा 3 लाख और अमेरिका में 5.1 लाख टेस्ट प्रतिदिन का है। विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं कि भारत में रोजाना होने वाली टेस्टिंग की क्षमता बढ़ने पर नए मामले मिलने की गति और ज्यादा तेजी से बढ़ती दिखाई देगी।

लंबे लॉकडाउन से कोरोनावायरस को फैलाने से रोकने में मदद मिली थी
चीन से फैले कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए भारत ने समझदारी दिखाते हुए जल्दी लॉकडाउन घोषित कर दिया ताकि वायरस के प्रसार को धीमा किया जा सके। भारत की तुलना में किसी और देश ने इतनी जल्दी लॉकडाउन नहीं किया। इससे सरकार को तैयारी करने का समय मिल गया। इससे कई मौतें होने से बच गईं, लेकिन भारत लॉकडाउन तक जहां भारत में कोरोना वायरस का संचरण थमा रहा, लेकिन लॉकडाऊन में दी गई छूट के बाद प्रवासियों के शहरों से पलायन में बरती गई लापरवाही ने नए मामले शहरों से गांवों तक सामने आने लग गए। सरकार ने लॉकडाउन के समय का इस्तेमाल टेस्टिंग बढ़ाने और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में किया। इनमें केरल, कर्नाटक ने बेहतर किया, लेकिन महाराष्ट्र और दिल्ली की सरकारें इसमें नाकाम रहीं।

इसलिए शहरों से गांवों की ओर फैलना शुरू हो चुका है कोरोना वायरस
लॉकडाउन में छूट का असर यह हुआ है कि संक्रमण के शहरों से गांवों की ओर फैलने के सबूत भी मिलने लगे हैं। मई की शुरुआत में लॉकडाउन में दी गई छूट के साथ ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि शहरों में रहने वाले लोगों के अपने गांवों की ओर लौटने पर संक्रमण अब तक बचे रह गए गांवों तक भी पहुंच जाएगा। फिर भी संतोष की बात सिर्फ इतनी सी है कि देश में कोविड-19 से मृत्यु दर काफी कम है। एक शीर्ष वायरोलॉजिस्ट का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में हालात गंभीर होने जा रहे हैं। दिल्ली और मुंबई के डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के मामले में वृद्धि को देखते हुए अस्पतालों में बिस्तर व दूसरे संसाधन की कमी चिंता का कारण बनी हुई है।

भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की हालत और तेजी बढ़ते मरीजों की संख्या
लॉकडाउन में छूट मिलने के साथ ही डॉक्टरों के हाथ-पांव फुलने लगे हैं।शायद यही कारण था कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत से परिचित प्रधानमंत्री मोदी ने जल्द लॉकडाऊन की घोषणा कर दी थी, लेकिन शुरूआती लॉकडाउन से हेल्थ केयर प्रणाली भारत की बड़ी आबादी को संभालने में कारगर नहीं हो सकती है। कहा गया कि पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन लगाने और हटाने या ढील देने की नीति से काम नहीं चलेगा, नतीजा सामने हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली की हालत से कौन अपरिचित है, जहां भारत के सर्वाधिक कोरोना संक्रमित मरीज हैं।

बिना लक्षण वाले पॉजिटिव केस की कान्टैक्ट ट्रेसिंग में अधिकांश राज्य फेल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में लक्षण वाले और बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए ज्यादा टेस्टिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जरूरत है. साथ ही आइसोलेशन और क्वारंटीन सेंटर्स की भी जरूरत है। क्योंकि विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल कोरोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा, इसलिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के आधार पर सुपर स्प्रेडर, फ्रंटलाइन वॉरियर्स, डिलिवरी बॉयज और जरूरी सेवाओं में लगे लोगों के संपर्क में आने वालों की टेस्टिंग करनी होगी और अगर इनमें कोई पॉजिटिव निकलता है तो उसके इलाज के साथ ही उसके कॉन्टेक्ट में आए लोगों को ढूंढकर क्वारंटीन करना होगा, लेकिन कुछेक राज्यों को छोड़कर इसको लेकर गंभीरता नहीं है।

टेस्टिंग पर हो रही है बहस, पश्चिम बंगाल है इसका बड़ा उदाहरण
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली टेस्टिंग के मामले में पूरे देश में अव्वल है। यहां प्रति 10 लाख आबादी पर 4,062 टेस्ट हुए हैं। यहां भी टेस्टिंग बढ़ने के साथ नए मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले चार दिनों में दिल्ली में 1600 से ज्यादा केस बढ़ चुके हैं। इसे भी टेस्टिंग बढ़ने का नतीजा कहा जा सकता है क्योंकि अब हर दिन 80 हजार से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं।पश्चिम बंगाल जैसे ऐसे भी राज्य हैं, जहां टेस्टिंग कम हो रही है, वहां नए मामले भी कम आ रहे हैं। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल में कम टेस्टिंग की वजह से काफी आलोचनाएं हो रही हैं। पश्चिम बंगाल में प्रति 10 लाख आबादी पर 358 टेस्ट ही हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल में कोरोना का डेथ रेट भी सबसे ज्यादा है जो 13.2 फीसदी है।

पूल टेस्टिंग से बढ़ रही है पॉजिटिव मरीजों की संख्या
कोरोना वायरस के मरीज़ों का जल्द से जल्द पता लगाने के लिए सरकार ने पहले के मुकाबले टेस्टिंग बढ़ा दी है। अब संदिग्ध इलाक़ों में पूल टेस्टिंग और रैपिड टेस्टिंग के ज़रिए कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का पता लगाया जा रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने पूल टेस्टिंग के लिए अनुमति दी है। एडवाइजरी में आईसीएमआर ने लिखा है कि जैसे कोविड19 के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में टेस्टिंग बढ़ाना महत्वपूर्ण है। हालांकि, मामले पॉजिटिव आने की दर कम है तो इसमें पूल टेस्टिंग से मदद मिल सकती है। पूल टेस्टिंग यानी एक से ज़्यादा सैंपल को एक साथ लेकर टेस्ट करना और कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाया जाता है, लेकिन पूल टेस्टिंग का इस्तेमाल कम संक्रमण वाले इलाक़ों में होता है, जहां संक्रमण के ज़्यादा मामले हैं वहां पर अलग-अलग जांच ही की जाती है।
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