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लॉकडाउन ने देश में जरूरी मेडिकल सेवाओं का किया कितना बुरा हाल, पढ़िए केंद्र सरकार की यह रिपोर्ट

लॉकडाउन ने देश में कैंसर जैसी जरूरी मेडिकल सेवाओं का किया बुरा हाल

नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते देश की स्वास्थ्य सेवा पर दबाव बढ़ा है, इस बीच 25 मार्च से लागू देशव्यापी लॉकडाउन के चलते कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को भी इलाज से वंचित रहना पड़ा है। एक सरकारी रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक देश में लॉकडाउन के दौरान कैंसर और संस्थागत बाल प्रसव सेवाएं काफी प्रभावित हुई हैं। केंद्र सरकार के पीएम-जेएवाई अंडर लॉकडाउन: एविडेंस ऑन यूटिलाइजेशन ट्रेंड्स नामक सर्वे में 1 जनवरी से 2 जून तक लॉकडाउन अवधि में प्रभवित हुई स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चौंकाने वाली बातों का खुलासा हुआ है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सर्वे में खुलासा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सर्वे में खुलासा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत के तहत बाल-प्रसव और कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को लॉकडाउन के दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पिछले 10 सप्ताह में अस्पतालों की सेवाओं में 51 प्रतिशत की गिरावट आई। बता दें कि सरकारी योजना के तहत नि: शुल्क कैंसर का इलाज करने वाले करोड़ों मरीजों को करोड़ों रुपये का लाभ होता था। लेकिन लॉकडाउन के दौरान कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल में मरीजों के प्रवेश की संख्या में 64% की गिरावट आई है। मातृ मामलों में 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। कई मरीज वाहन या एंबुलेंस की कमी के कारण अस्पताल नहीं पहुंच पाए।

पुरुषों की तुलना में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित

पुरुषों की तुलना में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित

सर्वे में कहा गया है कि आवश्यक सेवाओं की पहुंच लॉकडाउन के पहले 10 हफ्तों के दौरान एक बड़ी समस्या थी। मार्च से लेकर 2 जून के बीच आयुष्मान भारत योजना के तहत साप्ताहिक औसत के मुकाबले लॉकडाउन से पहले के बारह सप्ताह के दौरान भर्ती होने वाले मरीजों में 51 प्रतिशत की कमी देखी गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान पुरुषों की तुलना में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। असम, महाराष्ट्र और बिहार में जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे अधिक 75 प्रतिशत गिरावट दर्जी की गई जबकि उत्तराखंड, पंजाब और केरल में स्वास्थ्य सेवाओं में लगभग 25 प्रतिशत या उससे कम की गिरावट दर्ज की गई है। गांवों में स्थितियां बहुत खराब थीं।

आने वाले समय में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

आने वाले समय में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने स्वीकार किया कि इन सेवाओं की कमी के चलते बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, कोविड -19 के कारण मरने वाले लोगों के अलावा, हृदय रोगों, स्ट्रोक जैसी अन्य बीमारियों के कारण लोगों को मरते हुए नहीं देखना चाहते हैं। लॉकडाउन में लोगों को वह सेवाएं नहीं मिल सकी हैं। इस दिशा में रणनीतिक योजना और निवेश की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन अवधि में मोतियाबिंद के ऑपरेशन और संयुक्त प्रतिस्थापन जैसी नियोजित सर्जरी में 90 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि हेमोडायलिसिस में केवल 6 प्रतिशत की गिरावट आई। कार्डियोवस्कुलर सर्जरी में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है। विशेष रूप से बच्चो की डिलीवरी और कैंसर संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं में कमी देखी गई है।

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