दूसरे दलों के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' क्यों बन गई है देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस?
नई दिल्ली, 26 नवंबर: देश के राजनीतिक दलों में कांग्रेस सबसे पुरानी है। कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है, जिसका हर राज्य में एक जनाधार भी रहा है और तकरीबन सभी राज्यों में लंबे समय तक सरकारें भी रही हैं। एक लंबे समय तक ये भी कहा जाता रहा कि कांग्रेसी सरकार बनाना भी जानते हैं और फिर चलाना भी। इसके बावजूद बीते कुछ सालों में कांग्रेस जिस तरह से सिमटी है, वो राजनीतिक विश्लेषकों को परेशान करता है। इसके अलावा एक और चीज बीते 7-8 साल में दिखी है और वो है कांग्रेस पार्टी में आसानी से तोड़फोड़। ऐसा लगता है कि अगर किसी पार्टी सांसदों, विधायकों को तोड़ना सबसे आसान है तो वो है कांग्रेस। भाजपा ने कई राज्यों में कांग्रेस के 20 से ज्यादा तक विधायक तोड़कर सरकार गिराई तो हाल ही में टीएमसी ने गोवा और मेघालय में कांग्रेस को तगड़ी चोट दी है। मेघालय में तो ममता बनर्जी तकरीबन सारी कांग्रेस को ही ले उड़ीं। ऐसे में सवाल ये है कि इतनी पुरानी पार्टी इतना सॉफ्ट टागरेट कैसे है?

नेतृत्व का बंटा हुआ होना वजह?
कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व कई हिस्सो में बंटा हैं और ये कोई छुपा हुआ विषय भी नहीं रह गया है। 2014 के बाद से ही सोनिया गांधी, राहुल गांधी और फिर प्रियंका गांधी की पार्टी में अपनी-अपनी पसंद और नापसंद हैं। ऐसे में नेता और कार्यकर्ता अपनी शिकायत या बात पहुंचाने को लेकर स्पष्ट नहीं हैं कि आखिर वो किससे कहें। फिलहाल सोनिया गांधी अध्यक्ष हैं लेकिन माना जाता है कि फैसले राहुल गांधी ले रहे हैं। ऐसे में इस सबसे आलाकमान से एक दूरी नेताओं की बनी रहती है और उनका जुड़ाव पार्टी से वैसा नहीं रह जाता है।

सत्ता की राजनीति की आदत
कांग्रेस आजादी के बाद से ही ज्यादातर समय सत्ता में रही है। ऐसे में कांग्रेस के नेताओं को लेकर ये बात मशहूर है कि ये सत्ता की राजनीति करना जानते हैं। ज्यादा समय सत्ता से दूर रहने पर इनको एकजुट रखना मुश्किल है। आजादी के बाद ये पहली बार है कि कांग्रेस ना सिर्फ केंद्र में इतने लंबे समय तक सत्ता से दूर है बल्कि ज्यादातर राज्यों में भी उसकी सरकार नहीं है। ऐसे में कांग्रेस के आलाकमान को अपने नेताओं को बांधकर रखने में परेशानी हो रही है।
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फिलहाल में बेहतरी की उम्मीद ना दिखना भी कारण
कांग्रेस को लेकर एक और सबसे खराब बात ये है कि विशेषज्ञ हाल फिलहाल में पार्टी के उभार को लेकर संशय में हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में कई सालों से तीसरे और चौथे नंबर की पार्टी कांग्रेस है। वहीं उसके प्रदर्शन में जल्दी ही कोई सुधार होगा, ऐसा भी नहीं लगता। इस सबमें पार्टी के नेताओं को लगता है कि कहीं और ठिकाना तलाश लिया जाए। ऐसे टीएमसी हो, भाजपा हो या दूसरे दल, वो कांग्रेस में ही सेंधमारी करते दिखते हैं।












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