केजरीवाल-कांग्रेस को एक क्यों करना चाहते हैं बाबा रामदेव?
बाबा रामदेव ने सवाल किया कि दिल्ली में संवैधानिक और राजनीतिक संकट चल रहा है ऐसे में केजरीवाल, जो कि अपने आप को जनता का हमदर्द कहते हैं, वो पीछे क्यों हठ रहे हैं आखिरकार उनके इस कदम से केवल और केवल आम जनता ही तो परेशान हो रही है। जिस भरोसे से जनता ने केजरीवाल को चुना है उसे अब उन्हें पूरा करने के लिए सरकार बना लेनी चाहिए।
बाबा रामदेव ने तो यह बात प्रेसवार्ता करते सबके सामने कह दी लेकिन सवाल यह उठता है कि बाबा रामदेव के इन शब्दों के असली मतलब क्या है? राजनीतिक जानकार बाबा रामदेव की बातों के गंभीर मतलब निकाल रहे हैं।
केजरीवाल की जीत पर उनको बधाई देते हुए बाबा रामदेव ने एबीपी न्यूज पर कहा था कि वह केजरीवाल की जीत पर खुश हैं लेकिन अगर वह भी केजरीवाल के साथ होते तो आज केजरीवाल 29 नहीं बल्कि 36 सीट लेकर आते लेकिन कुछ कारण रहे कि हम साथ नहीं हो पाये। बाबा रामदेव की बातों से साफ था कि उन्हें केजरीवाल की ओर से समर्थन ना मिलना उन्हें आज भी खलता है।
केजरीवाल की तरह उन्होंने भी भूख हड़ताल करके लोगों को अपने साथ लाने की कोशिश की लेकिन जो भरोसा लोगों ने केजरीवाल में दिखाया वह बाबा रामदेव में नहीं दिखाया, उसके बाद बाबा रामदेव ने पुरजोर कोशिश की अरविंद केजरीवाल का साथ पाने की लेकिन अरविंद और उनकी टीम ने उन्हें लिफ्ट नहीं मारी जिस बात का अफसोस बाबा रामदेव को हमेशा रहा है।
कांग्रेस को डूबता हुआ जहाज कहने वाले बाबा रामदेव आखिरकार क्यों कह रहे हैं कि केजरीवाल, कांग्रेस के साथ हो जायें? क्या वाकई में वह केजरीवाल के हितैषी बनकर उन्हें यह बिना मांगी सलाह दे रहे हैं क्या उन्हें सच में लगता है कि कांग्रेस के साथ सरकार बनाकर अरविंद केजरीवाल वह वादे पूरे कर पायेंगे जिन वादों पर जनता ने उन्हें वोट दिया है। क्या कांग्रेस अगर केजरीवाल को बिना शर्त समर्थन देगी तो बाबा रामदेव के लिए कांग्रेस डूबता हुआ जहाज नहीं रहेगी।
बाबा रामदेव के इस बयान के बाद यह सारे सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब लोग खोज रहे हैं अगर आपके पास इन सवालों का जवाब है तो अपनी बात जरूर कमेंट बॉक्स में लिखें।













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