सड़क से विधान सभा तक कैसे पहुंचे अरविंद केजरीवाल...
बैंगलोर। विधानसभा चुनाव तो हर राज्य में हर पांच साल बाद होते हैं। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 का चुनाव इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो जायेगा क्योंकि इस चुनाव में एक ऐसा चेहरा सामने आया जो कि आम था और जिसे खास बना दिया उसके जोश, उनकी सच्चाई औऱ उनकी ईमानदारी ने। वो चेहरा था अरविंद केजरीवाल का। जिसने ाम जनता की सोच बदल डाली और एक नया इतिहास रच दिया।
कौन हैं अरविंद केजरीवाल.. जो अचानक से हमारे बीच में आ गया जिन्होंने आम जनता को खास बना दिया औऱ 15 साल से राज कर रहीं दिल्ली की सीएम शीला दीक्षित के किला को ध्वस्त कर दिया।
कभी अन्ना के अर्जुन के नाम से पहचाने जाने वाले अरविंद केजरीवाल आज से दो साल पहले साल 2011 में अन्ना के लोकपाल आंदोलन के सामने लोगों के दिलों में बस गये। साफ सुथरी छवि, स्पष्ट वादिता, मोहिल लेकिन कहती हुई मुस्कान के मालिक अरविंद केजरीवाल एक बेहतरीन सामाजिक कार्यकर्ता है।
खड़गपुर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से स्नातक केजरीवाल को आरटीआई (सूचना का अधिकार) के कार्यकर्ता के रूप में अपना जीवन शुरू किया था। लेकिन उनकी ईमानदारी और उसूलों ने उन्हें वहां ज्यादा दिन टिकने नहीं दिया। और उन्होंने नौकरी छोड़ दी। उसके बाद उन्होंने एक सामजिक प्राणी बनने का फैसला किया।
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आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई
अरविंद केजरीवाल का जन्म 6 जून, 1968 में हरियाणा के हिसार में हुआ और उन्होंने 1989 में आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल (यांत्रिक) इंजीयरिंग में स्नातक (बीटेक) की उपाधि प्राप्त की। पिता गोविंदराम केजरीवाल जिंदल स्टील में इंजीनियर थे।

आयकर आयुक्त (कमिश्नर)
1992 में वे भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस/सिविल सर्विसेस, भारतीय सिविल सेवा का एक हिस्सा) में आ गए, और पहली पोस्टिंग में उन्हें दिल्ली में आयकर विभाग में आयकर आयुक्त (कमिश्नर) नियुक्त किया गया। उन्होंने कुछ विदेशी कंपनियों के काले कारनामे पकड़े कि किस तरह वे भारतीय आयकर क़ानून को तोड़ती हैं। उन्हें धमकियां मिलीं और फिर तबादला भी हो गया, जिसके बाद उनका सरकारी सेवा से मोहभंग हो गया।

'परिवर्तन' नामक संस्था
जनवरी 2000 में, उन्होंने काम से विश्राम ले लिया और दिल्ली आधारित एक नागरिक आन्दोलन 'परिवर्तन' नामक संस्था की स्थापना की, जो एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए काम करता है।

आरटीआई का तोहफा
दिल्ली में सूचना अधिकार अधिनियम को 2001 में पारित किया गया और अंत में राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संसद ने 2005 में सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) को पारित कर दिया। इसके बाद, जुलाई 2006 में, उन्होंने पूरे भारत में आरटीआई के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के लिए एक अभियान शुरू किया।

पुरस्कार
2004: अशोक फैलो, सिविक अंगेजमेंट
2005: 'सत्येन्द्र दुबे मेमोरियल अवार्ड', आईआईटी कानपुर, सरकार पारदर्शिता में लाने के लिए उनके अभियान हेतु
2006: उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
2006: लोक सेवा में सीएनएन आईबीएन, 'इन्डियन ऑफ़ द इयर'
2009: विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार, उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए आईआईटी खड़गपुर।

आम आदमी पार्टी
सरकारी तंत्र से परेशान और तंग आकर अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनायी जिसने पहली बार दिल्ली में चुनाव लड़ा औऱ दूसरे नंबर सशक्त पार्टी बनकर उबरी। अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हरा कर इतिहास रचा।












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