क्यों अरविंद केजरीवाल को नहीं मांगने चाहिए सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह उस सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत पेश करे जिसके तहत इंडियन आर्मी ने आतंकियों के कैंप्स को तबाह किया। वहीं अगर पूर्व अधिकारियों की मानें तो केजरीवाल तो क्या किसी भी इस सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत नहीं मांगने चाहिए और कोई मांग नहीं सकता है।

दो बातें हर कोई रखे याद
इंटेलीजेंस एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व अधिकारी अमर भूषण की मानें तो सर्जिकल स्ट्राइक्स के बारे में दो चीजें काफी अहम होती हैं जिन्हें समझना चाहिए और जिन्हें लोग किनारे कर दे रहे हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक्स अक्सर गुप्त तरीके से होती हैं और कभी कोई इसे स्वीकार नहीं करता है। दूसरी वे सर्जिकल स्ट्राइक्स होती हैं जो दुश्मन के भड़काने पर उन्हें जवाब के तौर पर दी जाती हैं और हर कोई इसे स्वीकारता है कि हां हमने यह किया हैं।
पाक से उम्मीद लगा रहे केजरीवाल
दोनों ही तरह की सर्जिकल स्ट्राइक में कुछ सीमाएं होती हैं और इसके सुबूत कभी नहीं मांग सकता है कोई। भूषण कहते हैं कि केजरीवाल की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत मांगना सही नहीं है।
केजरीवाल कहते हैं कि पाकिस्तान को शक है कि यह सर्जिकल स्ट्राइक्स हुई भी है या नहीं और ऐसे में सरकार को सुबूत देने होंगे। भूषण ने केजरीवाल से सवाल किया कि क्या उन्हें उम्मीद है कि पाक इसकी पुष्टि करेगा?
क्या अमेरिका से भी सवाल पूछेंगे
भूषण के मुताबिक केजरीवाल जो बातें कर रहे हैं उससे साफ है कि वह निजता और सुरक्षा जैसे मसलों को ज्यादा नहीं समझते हैं। भूषण ने कहा कि केजरीवाल का सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सुबूत मांगना तर्क से परे है।
उन्होंने केजरीवाल से पूछा कि क्या वह अमेरिका से भी उस सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत मांगेने जिसके तहत अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था? क्या वह फ्रांस से भी उस सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में सवाल करेंगे जो उसने पेरिस आतंकी हमले के बाद अंजाम दी?
भूषण के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सुबूत मांगना बिल्कुल ही बचकाना है और भारत को जो करना चाहिए था, वह उसने किया। अब इस विषय से आगे बढ़ना होगा न कि इसे और जटिल बनाना होगा।












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