आखिर किसे मिलेगी 6 साल के अनाथ बच्चे की कस्टडी, बूढ़े दादा-दादी या फिर मौसी, कोर्ट देगा फैसला

नई दिल्ली, 07 मई। कोरोना काल में देश में कई परिवारों ने अपने करीबियों को खो दिया। लोगों के घर उजड़ गए। मासूम बच्चे अनाथ हो गए हैं। ऐसे में कोरोना काल में जो मासूम बच्चे अनाथ हुए हैं वह किसके साथ रहेंगे यह एक मुश्किल सवाल है। इसी तरह का एक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। एक 6 साल के बच्चे के माता-पिता का कोरोना काल में निधन हो गया था। ऐसे में बच्चे के दादा-दादी और मौसी के बीच इस बात को लेकर विवाद चल रहा है कि आखिर बच्चे किसके साथ रहेगा। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा।

माता-पिता की कोरोना ने ली जान

माता-पिता की कोरोना ने ली जान

बच्चे के पिता का पिछले साल 13 मई को निधन हो गया था जबकि मां का निधन भी पिछले साल 12 जून को हो गया था, जब गुजरात में कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी। बच्चे के ननिहाल वाले रिश्तेदार उसे उसके दादा के घर से ले आए। जब बच्चे के मपिता का निधन हुआ और उनका अंतिम संस्कार हो गया तो ननिहाल वाले बच्चे को उसकी मां के अंतिम संस्कार के लिए घर ले आए और उसके बाद से ही वह अपनी मौसी के साथ रह रहा है।

दादा-दादी के साथ सहज बच्चा

दादा-दादी के साथ सहज बच्चा

बच्चे के लालन-पालन, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर उसके दादा-दादी ने चिंता जाहिर की और उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में दादा-दादी ने बच्चे की कस्टडी की गुहार लगाई। हाई कोर्ट के जज ने बच्चे से बात की और अपना फैसला दिया। जज ने कहा हमारे ध्यान में यह आया है कि बच्चा अपने दादा-दादी के साथ सहज है, लेकिन वह अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है, वह यह तय नहीं कर सकता है कि वह अपनी मौसी के साथ रहे या दादा-दादी के साथ

मौसी शादीशुदा नहीं, चाहती हैं बच्चे की कस्टडी

मौसी शादीशुदा नहीं, चाहती हैं बच्चे की कस्टडी

बावजूद इसके कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी को 46 वर्षीय उसकी मौसी को दे दिया क्योंकि वह शादीशुदा नहीं हैं, वह केंद्र सरकार की कर्मचारी हैं और साझा परिवार में रहती हैं। ऐसे हालात में बच्चे का लालन-पालन बेहतर तरीके से हो सकता है। लेकिन दादा-दादी की उम्र ज्यादा है और ये लोग अपनी पेंशन पर निर्भर हैं। ग्रैंडफादर के वकील डीएन राय कोर्ट के इस फैसले से काफी नाखुश थे।

 बच्चे की शिक्षा को लेकर सवाल

बच्चे की शिक्षा को लेकर सवाल

डीएन राय ने कोर्ट में कहा कि अहमदाबाद में बच्चे की अच्छी शिक्षा हो सकती है, वह इसी शहर में बड़ा हुआ है, जब उसके माता-पिता थे तो वह इस शहर में बड़ा हुआ। अगर जरूरत पड़ी तो बच्चे के चाचा भी उसकी मदद के लिए आगे आ सकते हैं जिनका कोएंबटूर में रेस्टोरेंट है। वेकेशन बेंच के जज एमआर शाह और अनिरुद्ध बोस ने हाई कोर्ट के आर्डर पर रोक लगा दी है। बेंच ने कहा कि वह इस मामले का फैसला 9 जून को देगी, लेकिन इससे पहले बच्चे की मौसी का पक्ष सुनेगी।

कोर्ट ने दादा-दादी के पक्ष में कही ये बात

कोर्ट ने दादा-दादी के पक्ष में कही ये बात

बेंच ने कहा कि शिक्षा की सुविधा अहमदाबाद में दाहोद की तुलना में कहीं बेहतर हैं। वहीं बेंच ने 46 साल की अविवाहित मौसी को बच्चे की कस्टडी दिए जाने को लेकर उनके वकील से सवाल किया है। बेंच ने कहा कि आखिर क्यों 71 साल के दादा और 63 साल की दादी को बच्चे की कस्टडी नहीं दी जानी चाहिए। आजकल के समय में यह उम्र कुछ नहीं है, लोग ज्यादा उम्र में और भी मजबूत रहते हैं। वहीं बच्चे की मौसी के वकील ने कहा कि मौसी अविवाहित हैं और वह बच्चे को और भी अधिक ऊर्जा के साथ पाल सकती हैं तो कोर्ट ने कहा कि जब दादा-दादी बच्चे के लालन-पालन के लिए तैयार हैं तो वो और भी ऊर्जावान हैं, लिहाजा बेहतर है कि बच्चे को उनके पास ही रहने दिया जाए।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+