China support to Pakistan: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से लड़ रहा था चीन, पहली बार खुद कबूला सच

China support to Pakistan: भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए सैन्य संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पहली बार चीन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उसने युद्ध के दौरान पाकिस्तान को ऑन-ग्राउंड तकनीकी मदद दी थी।

चीनी सरकारी मीडिया (CCTV) के जरिए सामने आए इस कबूलनामे ने भारत के उन दावों पर मुहर लगा दी है, जिनमें चीन की सक्रिय भूमिका की बात कही गई थी। यह खुलासा न केवल दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ाएगा, बल्कि दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन और चीनी हथियारों की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

China support to Pakistan

Operation Sindoor: चीन ने पहली बार क्या स्वीकारा?

चीन की एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (AVIC) के इंजीनियर झांग हेंग ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह संघर्ष के दौरान पाकिस्तान में मौजूद थे। उन्होंने पुष्टि की कि उनकी टीम वहां फाइटर जेट्स और अन्य तकनीकी उपकरणों को चौबीसों घंटे चालू रखने के लिए काम कर रही थी। मई की भीषण गर्मी और एयर-रेड सायरन के बीच चीनी इंजीनियर पाकिस्तानी वायुसेना को तकनीकी बैकअप दे रहे थे। यह साबित करता है कि पाकिस्तान की सैन्य शक्ति के पीछे चीन का सीधा हाथ था।

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China Pakistan Conflict: भारतीय हमलों के सामने चीनी सिस्टम फेल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अपने रक्षा तंत्र को भारतीय वायुसेना के खिलाफ परखा, लेकिन उसे निराशा हाथ लगी। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के पास मौजूद एकीकृत वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां भारतीय हमलों को रोकने में नाकाम रहीं। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरफील्ड, रडार सिस्टम और हैंगर को भारी नुकसान पहुंचाया। इस ऑपरेशन ने यह साफ कर दिया कि युद्ध की वास्तविक परिस्थितियों में पाकिस्तानी सुरक्षा घेरा काफी कमजोर साबित हुआ।

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HQ-9 मिसाइल सिस्टम की पोल खुली

चीन ने अपने HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को पश्चिमी देशों के सिस्टम से बेहतर बताया था, लेकिन भारत के खिलाफ यह पूरी तरह फ्लॉप रहा। दावा किया गया था कि यह लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली भारतीय विमानों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में घुसने से रोकेगी, मगर हकीकत में यह रणनीतिक ठिकानों की रक्षा नहीं कर पाई। चीनी हथियारों पर पाकिस्तान का जो भरोसा था, वह इस संघर्ष के बाद बुरी तरह डगमगा गया है और चीनी तकनीक की साख गिर गई है।

क्या सिर्फ दो देशों की जंग थी?

झांग हेंग के खुलासे से यह स्पष्ट है कि यह केवल भारत और पाकिस्तान का आपसी टकराव नहीं था। चीन ने न केवल हथियार बेचे, बल्कि युद्ध के मैदान में अपने तकनीकी विशेषज्ञ तैनात करके सक्रिय हिस्सेदारी निभाई। झांग ने बताया कि कैसे उनकी टीम 50 डिग्री तापमान में भी उपकरणों को पूरी क्षमता पर रखने की कोशिश कर रही थी। इस 'एक्टिव सपोर्ट' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की विस्तारवादी और हस्तक्षेप करने वाली नीति को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है।

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