कश्मीर में मारे गए बीजेपी के तीन स्थानीय नेता कौन थे?

"मेरे बेटे तुम्हें किसने मार दिया. तुम हमें छोड़कर कहां चले गए. तुम्हारी बेटी तुम्हारा रास्ता देख रही है, तुम्हारे बिना हम कैसे जिएंगे." - बीजेपी कार्यकर्ता फ़िदा हुसैन की मां शकीला बानो अपने बेटे को याद कर अपनी छाती पीट-पीटकर रो रही हैं.
दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम ज़िले के यारी ख़ोशपुरा गांव में अपने घर के बाहर बैठीं शकीला अपने बेटे फ़िदा हुसैन की मौत का मातम मना रही थीं.
उनके आसपास कई और महिलाएं बैठी थीं जो उन्हें सांत्वना दे रही थीं लेकिन शकीला का रोना रुक ही नहीं रहा था.

शुक्रवार को फ़िदा हुसैन, उमर रहमान और हारून रशीद बेग के घर के सामने कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला.
तीनों के परिजनों के चेहरों पर ग़ुस्सा स्पष्ट देखा जा सकता था. इनकी हत्या के बाद गांव यारी ख़ोशपुरा में सुरक्षा के लिहाज़ से सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है.
दक्षिणी कश्मीर को चरमपंथियों के दबदबे वाला क्षेत्र माना जाता है.
यारी ख़ोशपुरा श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग से सिर्फ़ तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पर कई सुरक्षा कैंप हैं.
गुरुवार की देर शाम फ़िदा हुसैन (30) और उनके दो साथियों उमर रहमान (19) और हारून रशीद बेग को कुलगाम ज़िले के यारी ख़ोशपुरा गांव में मार दिया गया.
तीनों बीजेपी के कार्यकर्ता थे और उनकी हत्या का आरोप पुलिस ने चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर लगाया है.
बेटी के जन्मदिन का केक लाने गए थे फ़िदा
शुक्रवार को पैतृक गांव यारी ख़ोशपुरा में फ़िदा हुसैन और उमर रहमान के जनाज़े में सैकड़ों लोग शामिल हुए. तीसरे शख़्स का घर पड़ोसी गांव सुपत में है जहां पर उन्हें दफ़नाया गया.
फ़िदा हुसैन के पिता ग़ुलाम मोहम्मद इटू एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं. वो कहते हैं कि उनका बेटा क़ाज़ीगुंड में अपनी बेटी के लिए जन्मदिन का केक लेने गया था.
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उन्होंने कहा, "हमेशा की तरह वो अपने काम के लिए सुबह निकल गया था. मुझे नहीं मालूम था कि वो कहां गया है. रात 8 बजे के क़रीब हमने गोलियों की आवाज़ सुनी. एक घायल शख़्स ने हमें फ़ोन किया और घटना के बारे में बताया. हम 20 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच गए और हमने देखा कि तीनों लोग गाड़ी के अंदर थे और वे मर चुके थे. हम उन्हें अस्पताल लेकर गए लेकिन उनकी जान नहीं बचा सके. जन्मदिन का केक गाड़ी के अंदर था. उसकी बेटी का आज जन्मदिन था. वो सिर्फ़ एक साल की हुई है."
फ़िदा के घर से आधा किलोमीटर की दूरी पर तीनों को गोली मारी गई थी.
फ़िदा के पिता ग़ुलाम मोहम्मद ने कहा, "तीनों के पास कोई हथियार नहीं थे. मासूम लोगों को मारना कहां का साहस है? यह बुज़दिली की हरकत है. वे जहन्नुम में जाएंगे. मेरा बेटा बुरा इंसान नहीं था."
"उसके पास कोई सुरक्षा नहीं थी. कुछ समय पहले पार्टी के निर्देश पर उसे सिक्यॉरिटी ज़ोन में भेजा गया था लेकिन 10 दिनों बाद वो लौट आया. उसका कहना था कि वो अपनी बेटी को याद करता है इसलिए घर से दूर नहीं रह सकता."

ग़ुलाम अपने आंसू पोंछते हैं. उनके बेटे फ़िदा ने कुछ सालों पहले बी.फ़ार्मा की पढ़ाई पूरी की थी.
सिक्यॉरिटी ज़ोन में क्यों नहीं थे बीजेपी नेता
कश्मीर ज़ोन के आईजी पुलिस विजय कुमार ने यारी ख़ोशपुरा में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 'लश्कर-ए-तैयबा के चरमपंथियों' का यह हमला पूर्व-नियोजित लगता है.
उन्होंने कहा, "एक स्थानीय शख़्स अल्ताफ़ की ऑल्टो कार में सवार चरमपंथी फ़िदा (बीजेपी युवा मोर्चा के महासचिव) की कार के नज़दीक आए और अंधाधुंध गोलियां चलाने लगे. वे घायल हो गए और उनकी वहीं मौत हो गई."
विजय कुमार ने बताया कि ऑल्टो कार को तेलवानी गांव के नज़दीक ज़ब्त कर लिया गया है.
बीजेपी कार्यकर्ता वहां कैसे घूम रहे थे? इस सवाल पर विजय कुमार ने कहा, "5 अगस्त से पहले ऐसे 1619 लोगों को चिन्हित किया गया था जिनको ख़तरा है. उन्हें पहलगाम की सुरक्षा वाली जगहों पर रखा गया था. हालांकि, फ़िदा एक शपथपत्र देकर वहां से चले आए."
उन्होंने कहा कि वो इस बात की जांच कर रहे हैं कि वे सभी अपने घर से इतनी दूर क्या कर रहे थे.
फ़िदा के चचेरे भाई सज्जाद अहमद ने बताया कि फ़िदा को आठ गोलियां लगी थीं.
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फ़िदा के पीछे उनकी पत्नी, बेटी, छह बहनें और माता-पिता ही रह गए हैं.
फ़िदा के एक दूसरे चचेरे भाई जहांगीर अहमद ने बताया कि घटना से पहले वो उनके पास आया था और कुछ पैसे लिए थे.
उन्होंने कहा, "उन्होंने मुझे दोपहर में 3 बजे फ़ोन किया. उसे 11 हज़ार रुपये की ज़रूरत थी. लेवडोरा में वो मेरे घर आया और पैसे लिए. उसके साथ दो और लोग थे जो इस घटना में मारे गए हैं. उसने मुझसे कहा कि वो शाम में एक शादी में जाएगा. हालांकि मुझे शाम को ख़बर मिली की फ़िदा पर गोली चली है और मैं जल्दी आऊं. जब हम घटनास्थल पर पहुंचे तो तीनों शख़्स गाड़ी में मर चुके थे."
'विचारधारा का जवाब विचारों से दिया जाए'
फ़िदा के दोस्त और उनके गांव में ही रहने वाले आशिक़ हुसैन कहते हैं कि विचारधारा के आधार पर किसी को मारना ग़लत है.
उन्होंने कहा, "अगर कोई किसी राजनीतिक विचारधारा के बारे में बताता है तो आप उसे राजनीतिक रूप से जवाब दीजिए. लेकिन आप उसे मार कैसे सकते हैं? किसी को भी मारना अंतरराष्ट्रीय क़ानून और इस्लाम के ख़िलाफ़ है."
हुसैन कहते हैं कि इन हत्याओं के बाद उनके गांव में डर का माहौल है, सरकार और दूसरे नेताओं को आगे आना चाहिए और इसको देखना चाहिए.
गुरुवार को हुए हमले में उमर रहमान की भी मौत हुई थी. उमर की मौत पर उनके पैतृक गांव में महिला-पुरुष सब विलाप कर रहे हैं.
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शुक्रवार को कुलगाम के यारी ख़ोशपुरा में मारे गए शख़्स के एक मंज़िला घर के बाहर भारी भीड़ जमा थी.
उमर रहमान के चाचा मोहम्मद शाबान बेहद ग़ुस्से में थे. उन्होंने बीबीसी से कहा, "वे (चरमपंथी) सोचते हैं कि वे जिहाद कर रहे हैं. मासूम लोगों को मारना जिहाद है? वो तमिलनाडु से एक महीने पहले ही आया था. वो सीधा-साधा और ग़रीब लड़का था."
शाबान ने इन रिपोर्टों का खंडन किया कि उमर बीजेपी से जुड़े हुए थे.
हालांकि, कश्मीर बीजेपी के मीडिया इंचार्ज मंज़ूर अहमद कहते हैं कि उमर पार्टी के सदस्य थे.
बीजेपी की ज़िला कार्यकारी कमिटी के एक अन्य सदस्य कहते हैं कि उमर का परिवार डर के कारण ऐसी बातें कह रहा है.
बीजेपी कार्यकर्ता क्यों हैं निशाने पर

बीजेपी ने कश्मीर में सुरक्षा चूक के लिए पुलिस को ज़िम्मेदार बताया है.
कश्मीर बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर कहते हैं, "कुलगाम में हमारे ज़िला अध्यक्ष ने एसपी को लिखित में सुरक्षा के मुद्दे से अवगत कराया था. उस समय एसपी ने कहा था कि अगर कुछ होता है तो हम बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए उचित क़दम उठाएंगे. मैंने एसपी से कहा था कि क्या वो मर गए लोगों के क़ब्रिस्तान पर सुरक्षा मुहैया कराएंगे."
"इन सवालों पर एसपी को जवाब देना चाहिए. मैंने उप-राज्यपाल, डीजीपी और आईजी से अपील की है कि वे इस मामले को देखें. पहले भी इसी इलाक़े में हमारे दो कार्यकर्ता मारे गए हैं लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. एसपी भटका रहे हैं. इन हत्याओं के बाद एसपी ने कहा था कि यह आम लोगों की हत्याएं हैं लेकिन पार्टी के बयान के बाद उन्होंने अपना बयान बदला."
बीजेपी कार्यकर्ताओं को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? इस सवाल पर ठाकुर ने कहा, "हमारी राष्ट्रवादी पार्टी है. हम भारत माता की जय का नारा लगाते हैं और हमने पार्टी का कश्मीर में लोगों से जुड़ने का कार्यक्रम शुरू किया है. पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी इसको नुकसान पहुंचाना चाहते हैं और इस तरह की घटनाएं हो रही हैं."
बीते तीन महीनों में कम से कम 8 बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं की कश्मीर घाटी में संदिग्ध चरमपंथियों ने हत्या कर दी है.
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