Shraddha Case: कौन था वो शख्स, श्रद्धा का मर्डर करने से पहले जिससे हिमाचल में मिला था आफताब?
आफताब ने पुलिस के सामने श्रद्धा की हत्या का जुर्म कबूल लिया है, लेकिन अभी भी इस केस में कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब मिलना बहुत जरूरी है।
shraddha walker and aftab poonawalla: प्यार, लिव-इन और फिर खौफनाक मौत...श्रद्धा वॉकर की हत्या के मामले ने हर किसी को हिलाकर रख दिया है। श्रद्धा ने जिस आफताब पूनावाला के ऊपर सबसे ज्यादा भरोसा किया, उसी आफताब ने श्रद्धा को दिल दहला देने वाली मौत दी। आफताब अब पुलिस की गिरफ्त में है और श्रद्धा को इंसाफ दिलाने के लिए उसके गुनाह की कड़ी से कड़ी जोड़ी जा रही है। मंगलवार को पुलिस आफताब को उस जंगल में भी लेकर गई, जहां उसने श्रद्धा के शव के टुकड़े फेंके थे। आफताब ने पुलिस के सामने श्रद्धा की हत्या का जुर्म कबूल लिया है, लेकिन अभी भी इस केस में कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब मिलना बहुत जरूरी है।

हिमाचल में किससे मिला था आफताब
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान मार्च-अप्रैल के महीने में आफताब और श्रद्धा हिमाचल प्रदेश के टूर पर गए। दोनों ने हिमाचल में कुछ दिन साथ बिताए और यहीं एक ऐसे शख्स से इनकी मुलाकात हुई, जो दिल्ली के छतरपुर में रहता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद जब आफताब और श्रद्धा दिल्ली शिफ्ट हुए तो शुरुआत में कुछ दिन इसी शख्स के साथ उसके फ्लैट में रहे। कुछ दिन बाद आफताब ने छतरपुर में ही एक फ्लैट किराए पर लिया और श्रद्धा के साथ वहां शिफ्ट हो गया। इसके बाद उसने श्रद्धा के मर्डर की अपनी घिनौनी साजिश को अंजाम दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आफताब ने पहले से ही श्रद्धा के मर्डर की साजिश सोच रखी थी और वो शख्स कौन था, जिससे आफताब हिमाचल प्रदेश में मिला।

रात को दो बजे के बाद घर से निकलता था आफताब
श्रद्धा की हत्या करने के बाद आफताब ने उसके शव के 35 टुकड़े किए और एक बड़ा फ्रिज खरीदकर उसमें उन टुकड़ों को रखा। पुलिस पूछताछ में आफताब ने बताया कि शव के टुकड़ों को ठिकाने लगाने के लिए वो रात को 2 बजे के बाद घर से निकलता था और फिर छतरपुर के जंगलों में उन टुकड़ों को फेंक आता था। आफताब ने रात का ये वक्त इसलिए चुना, क्योंकि इस समय सड़क पर लोगों की आवाजाही ना के बराबर होती थी। मंगलवार को जब पुलिस आफताब को छतरपुर के उन्हीं जंगलों में लेकर गई, तो वहां से श्रद्धा के शव के 10 टुकड़े बरामद हुए।

शाम को 7 बजे घर आकर करता था प्लानिंग
आफताब हर दिन शाम को 6-7 बजे अपने फ्लैट पर लौटता था। इसके बाद श्रद्धा के शव के टुकड़ों को ठिकाने लगाने की प्लानिंग बनाता और रात के 2 बजने का इंतजार करता। पुलिस सू्त्रों के मुताबिक, श्रद्धा के शव के टुकड़ों को आफताब काली पन्नी में रखकर ले जाता था, लेकिन जंगल में उन टुकड़ों को पन्नी से बाहर निकालकर फेंकता था। आफताब चाहता था कि किसी भी हालत में वो टुकड़े किसी को मिलें ना। हालांकि आफताब की कोशिश कामयाब नहीं हो पाई और पुलिस ने जब सख्ती से उससे पूछताछ की, तो उसने अपना सारा गुनाह कबूल कर लिया।












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