जानिए कौन थे मेजर डेविड जिन्होंने नागालैंड में खुद झेली आतंकियों की पहली गोली
इंफाल। मंगलवार की आधी रात नागालैंड में उल्फा और एनएससीएन (के) आतंकवादियों के साथ सेना की मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में मेजर डेविन मनलूम शहीद हो गए। मेजर डेविड उस टीम को लीड कर रहे थे जिसने आतंकवादियों को मार गिराया था। मेजर डेविड की टीम ने तीन आतंकवादियों को भी मार गिराया था। मेजर डेविड मनलून की शहादत हमेशा अमर रहेगी और हमेशा लोग उन्हें याद रखेंगे। आइए आज हम आपको मेजर डेविड से जुड़े ऐसे तथ्यों के बारे में बताते हैं जो हमेशा आपको प्रेरणा देते रहेंगे। मेजर डेविड ने देश के जिस हिस्से में आतंकियों को मारा है वहां हमेशा से ही आतंकवाद हावी रहा है।

सिर्फ सेना में जाने का था सपना
मेजर डेविड के करीबी दोस्तों की मानें तो वह हमेशा से ही आर्मी ऑफिसर बनना चाहते थे। अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेजर डेविड ने कड़ी मेहनत की और आपको बता दें कि वह जहां से आते हैं वहां पर कुछ ही लोग इंडियन आर्मीऑफिसर बन पाते हैं। मेजर डेविड मणिपुर की चौराचंदपुर जिले के रहने वाले थे।

पिता सेना से रिटायर, भाई ऑफिसर
मेजर डेविड के पिता असम राइफल्स से रिटायर्ड सूबेदार हैं और आर्मी ऑफिसर बनने के लिए वह अपने पिता के ही कदमों पर चले। मेजर डेविड ने मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग के सेंट एंथोनीस स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी की थी। मेजर डेविड 2 नागा बटालियन का हिस्सा थे और 164 टेरीटोरियल आर्मी के साथ उनकी पोस्टिंग थी। जहां मेजर डेविड के पिता सूबेदार खामझालम असम राइफल्स से रिटायर हैं तो उनके छोटे भाई हाव जिमी आठ असम राइफल्स में ऑफिसर हैं। उनकी बहन की शादी असम रेजीमेंट के ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल आशुतोष से हुई है।

एनएसजी कमांडो बनने वाले थे मेजर डेविड
मेजर डेविड नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी एनएसजी का हिस्सा बनकर कमांडो बनने वाले थे। नागलैंड में जो एनकाउंटर हुआ उसमें मेजर डेविड ने चार उल्फा आतंकवादियों को मारा था और अपने जवानों की जिंदगियों की रक्षा की। एनकाउंटर से कुछ ही दिन पहले एनएसजी की तरफ से उन्हें कॉल लेटर आया था।

एनकाउंटर की पूरी कहानी
नागलैंड में बुधवार की रात 12:30 बजे एनकाउंटर तब शुरू हुआ जब पैरा कमांडो की एक टीम और नागा टेरीटोरियल आर्मी को आतंकियों के बारे में जानकारी मिली। आतंकी लापा लेंपोंगे के करीब ही थी और एनकाउंटर के समय मेजर डेविड ने अपनी टीम को लीड करने का फैसला किया था। एनकाउंटर में पहली गोली भी मेजर डेविड को ही लगी थी।

शिलॉन्ग में मातम का माहौल
मेजर डेविड ने जिस शहर से अपनी पढ़ाई पूरी की उस शहर में उनकी शहादत से तो गर्व से सबका सिर ऊंचा है लेकिन इस बात से हर कोई दुखी है कि मेजर डेविड अब कभी शिलॉन्ग नहीं आएंगे। मेजर डेविड के माता-पिता अब शिलॉन्ग में ही रहते हैं और उनके टीचर्स उनके चले जाने से मायूस हैं।












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