कौन थे कैप्टन राकेश रंजन? होर्मुज में 18 दिनों से फंसा था शिप, अब हुई मौत, परिवार की हो रही है ऐसी हालत
Captain Rakesh Ranjan: रांची के अरगोड़ा इलाके में रहने वाले कैप्टन राकेश रंजन सिंह एक अनुभवी मर्चेंट नेवी अधिकारी थे, जिन्होंने करीब 24 साल तक समुद्र में सेवाएं दीं। 47 साल के राकेश मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ के रहने वाले थे, लेकिन पिछले 18 साल से उनका परिवार रांची में ही बस गया था। अपने काम के प्रति समर्पित राकेश रंजन कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के साथ काम कर चुके थे और अंतिम समय में 'अवाना' नाम के ऑयल टैंकर जहाज पर कैप्टन के तौर पर तैनात थे।
रांची के अरगोड़ा इलाके में रहने वाले कैप्टन राकेश रंजन सिंह एक अनुभवी मर्चेंट नेवी अधिकारी थे, जिन्होंने करीब 24 साल तक समुद्र में सेवाएं दीं। 47 साल के राकेश मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ के रहने वाले थे, लेकिन पिछले 18 साल से उनका परिवार रांची में ही बस गया था। अपने काम के प्रति समर्पित राकेश रंजन कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के साथ काम कर चुके थे और अंतिम समय में 'अवाना' नाम के ऑयल टैंकर जहाज पर कैप्टन के तौर पर तैनात थे।

आखिरी कॉल और अचानक मौत
परिवार के मुताबिक 18 मार्च को कैप्टन राकेश रंजन ने आखिरी बार फोन किया था। उसी दिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह कुर्सी से गिरकर बेहोश हो गए। जहाज पर मौजूद स्टाफ ने तुरंत मदद की कोशिश की, लेकिन वहां कोई उन्नत मेडिकल सुविधा नहीं थी। स्थिति गंभीर होते देख दुबई एटीसी से एयर एंबुलेंस की मांग की गई, लेकिन युद्ध की वजह से अनुमति नहीं मिल सकी।
इलाज में देरी बनी मौत की वजह
एयरलिफ्ट की अनुमति न मिलने के बाद उन्हें बोट के जरिए दुबई के तट तक ले जाया गया, लेकिन इसमें काफी समय लग गया। जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई, लेकिन असल वजह समय पर इलाज न मिल पाना माना जा रहा है।
परिवार में मचा कोहराम
रांची के वसुंधरा अपार्टमेंट में उनके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी और दो बच्चे सदमे में हैं। बड़े भाई उमेश कुमार ने बताया कि राकेश उनके बेटे जैसे थे। परिवार की सबसे बड़ी चिंता अब उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने की है, ताकि अंतिम दर्शन हो सके। पत्नी चाहती हैं कि आखिरी बार उन्हें देख सकें, जबकि बच्चे अपने पिता के इंतजार में हैं।
दुबई में रखा है शव, भारत लाने की कोशिश
फिलहाल कैप्टन राकेश रंजन का शव दुबई के शेख राशिद अस्पताल के मॉर्चरी में रखा गया है। परिजन लगातार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक शव को भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। पटना एयरपोर्ट पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार बिहारशरीफ में किया जाएगा।
युद्ध का आम लोगों पर असर
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर सिर्फ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी भारी पड़ा है। कैप्टन राकेश रंजन की मौत इसका दर्दनाक उदाहरण है, जहां एक अनुभवी अधिकारी सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा बैठे क्योंकि युद्ध के हालात में समय पर इलाज नहीं मिल सका। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए गहरा सदमा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष कैसे दूर बैठे लोगों की जिंदगी को भी झकझोर देते हैं।












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