कौन थी ASP टिंकी, जिसे UP Police दे रही है इतना सम्मान ? जानिए

नई दिल्ली- यूपी पुलिस में एएसपी टिंकी की बहादुरी और चतुराई के चर्चे आज हर जुबान पर है। एएसपी टिंकी की मौत पिछले साल बीमारी की वजह से हो गई थी। वह सिर्फ 6 साल तक यूपी पुलिस में रही, लेकिन इतने कम वक्त में ही वह कॉन्स्टेबल पर पर नियुक्त होकर अपने काम की बदौलत एडिश्नल एसपी तक के पद पर पहुंच गई। शनिवार को मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन में एएसपी टिंकी की मूर्ति का अनावरण किया गया है और इस मौके पर पुलिस के कई बड़े अधिकारी भी मौजूद थे। वो जासूसी के काम में इतनी माहिर थी कि उसके दम पर यूपी पुलिस 49 ऐसे केस सुलझा सकी, जिसमें उसके हाथ खाली थे।

एएसपी टिंकी की मूर्ति का अनावरण

एएसपी टिंकी की मूर्ति का अनावरण

उत्तर प्रदेश पुलिस के डॉग स्कॉयड की एएसपी टिंकी की मौत पिछले साल नवंबर में हो गई थी। एएसपी टिंकी मुजफ्फरनगर पुलिस की बेहद बहादुर और चतुर अधिकारी थी। वो कितनी मेघावी थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने अपनी सूंघने की क्षमता के बदौलत 49 ऐसे केस सुलझाने में पुलिस डिपार्टमेंट की मदद की थी, जो पूरी तरह से ब्लाइंड केस नजर आ रहा था। मतलब उसमें पुलिस को कोई ऐसे सुराग हाथ नहीं लग रहे थे, जिससे वो उसे सुलझा सके। उस सुपर कॉप डॉग (स्वान) को श्रद्धांजलि के तौर पर मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन में स्वान कक्ष के बाहर शनिवार को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में उसकी प्रतिमा का अनावरण एएसपी टिंकी के सीनियर हैंडलर सुनील कुमार के हाथों कराया गया है। क्योंकि, बिजनौर ट्रांसफर होने की वजह से उसके हैंडलर महेश कुमार वहां मौजूद नहीं थे। (ऊपर की तस्वीर सौजन्य: यूपी पुलिस)

8 साल की उम्र में बीमारी की वजह से हुई मौत

8 साल की उम्र में बीमारी की वजह से हुई मौत

एएसपी टिंकी महज 8 साल की उम्र में ही बीमारी की वजह से यूपी पुलिस महकमे को छोड़कर दुनिया से चली गई। यूपी पुलिस में उसकी भर्ती ग्वालियर स्थित बीएसएफ एकैडमी के नेशनल डॉग ट्रेनिंग सेंटर से की गई थी। अपने काम के प्रति समर्पण और जासूसी के काम में उसकी काबिलियत के चलते ही उसे सिर्फ 6 साल में ही 6 प्रमोशनल मिल गए। वह यूपी पुलिस में कॉन्सटेबल के तौर पर ज्वाइन हुई थी और 6 साल में एएसपी बन गई। किसी स्वान के लिए यह एक रिकॉर्ड है। यही वजह है कि जब मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन में उसके सम्मान में उसकी प्रतिमा का अनावरण हुआ तो एसपी (सिटी) अर्पित विजयवर्गीय, एसपी (ग्रामीण) अतुल कुमार, सीओ (सिटी) कुलदीप सिंह भी मौजूद थे।

अपने काम में बहुत माहिर थी एएसपी टिंकी

अपने काम में बहुत माहिर थी एएसपी टिंकी

एएसपी टिंकी के डॉग हैंडलर महेश कुमार को इस कार्यक्रम में मौजूद नहीं रह पाने का मलाल जरूर होगा। उन्होंने उसके बारे में टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है 'पुलिस फोर्स में असाधारण प्रदर्शन करने वाले को इससे बेहतर श्रद्धांजलि क्या हो सकती है। मूर्ति की स्थापना से मेरी अबतक का सबसे बढ़िया साथी अमर हो गई है। मैं जल्दी ही जाकर एडिश्नल एसपी को मेरी ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा।' टिंकी के कारनामों के बारे में एसिस्टेंट हैंडरल कॉन्स्टेबल धरम सिंह ने कहा है, 'तकनीकी तौर पर कहूं तो स्वान के लिए यह आमतौर पर संभव नहीं है कि अपराध के 24 घंटे के बाद वह सूंघकर कुछ तय कर सके,लेकिन टिंकी की सूंघकर सुराग ढूंढ़ निकालने की क्षमता अद्भुत थी।'

जर्मन शेफर्ड नस्ल की स्वान थी टिंकी

जर्मन शेफर्ड नस्ल की स्वान थी टिंकी

एएसपी टिंकी जर्मन शेफर्ड नस्ल की स्वान थी। पुलिस वाले ने बताया है कि 2018 में उसने गांव के एक तलाब की तल से हत्या के 9 दिन बाद छिपाए गए एक शव को खोज निकाला था। जबकि हत्या उस स्थान से एक किलोमीटर दूर मुजफ्फरनगर के परसौली गांव में हुई थी। उससे एक साल पहले वह 10 किलोमीटर तक गई और मंसूरपुर इलाके से चोरों के एक गिरोह का भंडाफोड़ करवाया। धरम सिंह ने बताया कि एक बार की बात है कि उसने 10 दिन से गायब एक व्यक्ति के क्षत-विक्षत शव को खोल लिया। मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि 'टिंकी, बहादुर, चतुर और प्रतिभाशाली थी।' (आखिरी तस्वीर: सांकेतिक)

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