कौन हैं UPSC के नए चेयरमैन मनोज सोनी ? उनके बारे में सबकुछ जानिए
नई दिल्ली, 19 अप्रैल: संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य डॉक्टर मनोज सोनी ही इसके नए चेयरमैन बनाए गए हैं। इस पद पर उनका कार्यकाल एक साल से थोड़ा ज्यादा का होगा। क्योंकि,यूपीएससी के सदस्य और अध्यक्षों की नियुक्ति 6 साल या 65 वर्ष तक की उम्र के लिए होती है और अगले साल वो आयोग में 6 साल की अवधि पूरी कर लेंगे। मनोज सोनी यूपीएससी के 31वें चेयरमैन बनाए गए हैं। उनका पूरा जीवन बहुत ही कठिन संघर्ष की कहानी बयां करता है, लेकिन सदस्य से चेयरमैन बनाए जाने के बाद उनकी नियुक्ति पर भी विवाद किया गया है। आइए जानते हैं उनके बारे में और यह भी जानेंगे की विवाद में कितना दम है।

देश के सबसे कम उम्र में वाइस-चांसलर बनने का रिकॉर्ड
17 फरवरी, 1965 को जन्मे डॉक्टर मनोज सोनी ने पिछले 5 अप्रैल, 2022 को संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली है। वे 27 जून, 2023 को अपना कार्यकाल पूरा करने तक इस पद को संभालेंगे। चेयरमैन बनने से पहले मनोज सोनी यूपीएससी के ही सदस्य थे। यूपीएससी में आने से पहले मनोज सोनी अलग-अलग विश्वविद्यालयों में बतौर वाइस-चांसलर तीन-तीन कार्यकाल की सेवाएं दे चुके हैं। इसमें दो कार्यकाल उन्होंने डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में और एक कार्यकाल वडोदरा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (एमएसयू) के वीसी के तौर पर पूरा किया है। अप्रैल, 2005 में जब उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए एमएसयू के वाइस चांसलर के तौर पर हुई थी तो वह देश के तबतक के सबसे कम उम्र (40 साल) के वीसी बने थे।
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राजनीतिक विज्ञान और लोक प्रशासन के विद्वान हैं मनोज सोनी
मनोज सोनी राजनीतिक विज्ञान के विद्वान हैं और इंटरनेशनल रिलेशंस स्टडीज में उनकी स्पेशलाइजेशन है। गुजरात के आणंद स्थित सरदार पटेल यूनिवर्सिटी, वल्लभ विद्यानगर में उन्होंने 1991 से लेकर 2016 तक इंटरनेशनल रिलेशंस पढ़ाया है। इसमें वह अवधि समय शामिल नहीं है, जब वह वाइस चांसलर की भूमिका निभा रहे थे। उनकी पीएचडी की डिग्री के लिए शोध का विषय था, 'पोस्ट-कोल्ड वॉर इंटरनेशनल सिस्मेटिक ट्रांजिशन एंड इंडो-यूएस रिलेशंस'। वे 'अंडरस्टैंडिंग द ग्लोबल पॉलिटिकल अर्थक्वेक' नाम की पुस्तक भी लिख चुके हैं। मनोज सोनी को कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड और सम्मान मिल चुके हैं। वे उच्च शिक्षा और लोक प्रशासन में कई संस्थानों के बोर्ड ऑफ गवर्नस की भूमिका भी निभा चुके हैं।

अगरबत्ती बेचकर पढ़ाई की और परिवार को संभाला
मनोज सोनी 28, जून 2017 से ही यूपीएससी के सदस्य हैं। वह आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, वह जीवन को संघर्षपूर्ण तरीके से जीने का नतीजा है। जब पांचवीं क्लास में पढ़ते थे, तभी पिता का साया सिर से उठ गया था। पिता मुंबई की सड़कों पर पर छोटे-मोटे कपड़े बेचकर परिवार का गुजारा करते थे। उनके निधन के बाद इन्होंने मुंबई के चॉल में अगरबत्तियां बेचनी शुरू कीं, ताकि परिवार को सपोर्ट कर सकें और अपनी पढ़ाई के लिए भी थोड़े पैसे जुटा सकें। 1978 में उनकी मां ने मुंबई से गुजरात के आणंद जाने का फैसला किया। वे 12वीं की परीक्षा विज्ञान से पास नहीं कर सके तो उन्होंने राज रत्न पीटी पटेल कॉलेज से आर्ट्स की पढ़ाई शुरू की। इनकी पत्नी पृथा भी गुजरात के नाडियाड में एक कॉलेज में टीचर हैं।

'यूनियन प्रचारक संघ कमीशन'
जानकारी के मुताबिक सोनी बचपन से ही स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुपम मिशन से जुड़े रहे हैं। इसकी वजह शायद ये रही है कि उनके पिता भी मुंबई में इस मिशन से जुड़े हुए थे। 2020 में उन्होंने एक निष्कर्म कर्मयोगी की दीक्षा भी ली है। उनकी शिक्षा पूरी करवाने में भी मिशन का काफी सहयोग माना जाता है। सोनी के बारे में दावा किया जाता है कि उनके भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के लोगों से करीबी रिश्ते रहे हैं। इसी आधार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस संवैधानिक पद की मर्यादा पर भी सवाल उठा दिया है। उन्होंने एक न्यूज रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है, 'यूनियन प्रचारक संघ कमीशन। भारतीय संविधान को ध्वस्त किया जा रहा है, एक समय में एक संस्था को।'












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