Sandeep Valmiki: कौन हैं AAP के पूर्व मंत्री संदीप वाल्मीकि? BJP ज्वाइन करने के 6 घंटे में हुए निष्काषित

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री रह चुके संदीप वाल्मीकि को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के छह घंटे बाद ही पार्टी से निकाल दिया गया। आरोप है कि संदीप ने अपने खिलाफ लगे आरोपों के बारे में जानकारी छुपाई और पार्टी को गुमराह किया। उन्हें शनिवार शाम मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पार्टी में शामिल कराया था।

हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहनलाल बडोली ने संदीप वाल्मीकि को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इससे पहले संदीप को इसी कारण से आम आदमी पार्टी से भी निष्कासित किया गया था।

Sandeep Valmiki

कौन हैं संदीप वाल्मीकि?

आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य संदीप वाल्मीकि AAP की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने हाल ही में भाजपा ज्वाइन की थी लेकिन अपने ऊपर लगे आरोपों को छिपाने के इल्जाम में उन्हें पार्टी से निष्काषित कर दिया गया।

संदीप वाल्मीकि सोनीपत के सरगथल से हैं। उनके हालिया राजनीतिक आंदोलनों ने उनके इर्द-गिर्द विवादों के कारण काफी ध्यान आकर्षित किया है। संदीप वाल्मीकि का निष्कासन राजनीतिक दलों द्वारा अपने सदस्यों से जुड़े विवादों के जवाब में की गई त्वरित कार्रवाई को दिखाता है।

हरियाणा के सोनीपत के मूल निवासी संदीप कुमार ने 2015 में विधानसभा चुनाव में पांच बार के कांग्रेस विधायक जय किशन को हराकर राजनीतिक ख्याति प्राप्त की थी। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने उन्हें दिल्ली सरकार में मंत्री बनाया, खास तौर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री। संदीप कुमार ने 2004 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया और 2009 में मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की।

8 मार्च 2015 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संदीप कुमार का बयान वायरल हुआ। उन्होंने बताया कि वे अपनी पत्नी रितु से दिल्ली के दयाल सिंह कॉलेज में मिले थे और आठ साल पहले अपनी शादी के बाद से वे हर दिन उनके पैर छूते हैं। इस निजी खुलासे ने उनकी ओर काफी ध्यान आकर्षित किया।

मंत्री रहते हुए संदीप कुमार एक ऐसे घोटाले में फंस गए थे, जिसमें उनका एक सेक्स टेप सामने आया था। इस टेप में आपत्तिजनक सामग्री थी और राशन कार्ड जारी करने के मामले में उन पर गंभीर आरोप लगे थे। इस घोटाले के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया और पार्टी से निष्कासित कर दिया।

संदीप कुमार ने खुद का बचाव करते हुए कहा कि वह दलित समुदाय से हैं और दावा किया कि यह कांड उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की साजिश थी। अपना नाम साफ़ करने के उनके प्रयासों के बावजूद, इस विवाद ने उनके राजनीतिक करियर को काफी प्रभावित किया।

जून 2021 में संदीप कुमार ने कीर्ति किसान शेर-ए-पंजाब नाम से अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाई। हालांकि, उनकी नई पार्टी मतदाताओं के बीच पर्याप्त मान्यता या समर्थन हासिल करने में विफल रही। इस सफलता की कमी ने उनके राजनीतिक सफर में एक और झटका दिया।

10 अगस्त को संदीप कुमार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए। हालांकि, बीजेपी में शामिल होने के छह घंटे के भीतर ही पार्टी की हरियाणा इकाई ने उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया। इस त्वरित निष्कासन ने उनके उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक करियर में एक और मोड़ ला दिया।

संदीप कुमार को अपनी पत्नी के नाम पर एक सरकारी स्कूल का नाम रखने के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसके कारण सीएम केजरीवाल ने उन्हें फटकार लगाई। इन विवादों और असफलताओं के बावजूद, संदीप भारत के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में आगे बढ़ना जारी रखा।

संदीप कुमार की यात्रा उपलब्धियों और विवादों दोनों को दिखाती है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में उनकी सार्वजनिक छवि को आकार दिया है। उनकी कहानी घोटालों और आरोपों के बीच अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने में राजनेताओं के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाती है।

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