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Rouble Nagi: कौन हैं टीचर रूबल नागी? रातोंरात कैसे बनीं करोड़ों की मालकिन, कहां पढ़ाती हैं? हो रही है वाहवाही

Rouble Nagi Biography: भारत की एक ऐसी शिक्षिका, जिन्होंने ब्लैकबोर्ड नहीं बल्कि झुग्गियों की दीवारों को अपना क्लासरूम बनाया, आज दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंच पर सम्मानित हुई हैं। जम्मू कश्मीर में जन्मी रूबल नागी ने दुबई में आयोजित 'वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट' के दौरान 1 मिलियन डॉलर यानी 9 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्लोबल टीचर प्राइज (Global Teacher Prize) जीतकर इतिहास रच दिया।

यह सम्मान उन्हें दुबई के क्राउन प्रिंस हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम (Hamdan bin Mohammed bin Rashid Al Maktoum) ने दिया है। रूबल नागी को यह ग्लोबल पहचान झुग्गियों की दीवारों को शैक्षिक चित्र (मुरल्स) में बदलने के अनोखे प्रयोग के लिए मिली है।

Rouble Nagi Biography

रूबल नागी कहां और कैसे पढ़ाती हैं?

रूबल नागी झुग्गियों की दीवारों पर शैक्षिक चित्र (मुरल्स) बनाकर बच्चों को पढ़ाती हैं। वे रंगों और चित्रों के जरिए बच्चों को पढ़ना लिखना और गणित सिखाती हैं। रूबल नागी के बनाए म्यूरल्स सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण जैसे विषय भी शामिल होते हैं। करीब 24 साल पहले उन्होंने एक छोटे से कमरे में सिर्फ 30 बच्चों के साथ पढ़ाने की शुरुआत की थी। आज उनकी ये कोशिश 10 लाख से ज्यादा बच्चों तक पहुंच चुका है।

रूबल नागी करीब 8.3 से 9 करोड़ रुपये की इनामी राशि का इस्तेमाल वे भारत में नए स्कूल और लर्निंग सेंटर खोलने के लिए करेंगी। उनका लक्ष्य एक ऐसा संस्थान बनाना है जो जरूरतमंद युवाओं को मुफ्त वोकेशनल ट्रेनिंग दे सके।

कौन हैं रूबल नागी? (Rouble Nagi Biography)

8 जुलाई 1980 को जम्मू कश्मीर में जन्मीं रूबल नागी टीचर होने के साथ-साथ एक कुशल मूर्तिकार, पेंटर और आर्ट इंस्टॉलेशन एक्सपर्ट भी हैं। उन्होंने अपनी कला को समाज सेवा से जोड़ा और शिक्षा को अपना मिशन बना लिया। साल 2017 में वे राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में प्रदर्शनी के लिए आमंत्रित होने वाली पहली महिला कलाकार बनीं।

2022 में उनकी किताब The Slum Queen प्रकाशित हुई, जिसमें उन्होंने अपने संघर्ष और अनुभव साझा किए। अवॉर्ड लेते समय उन्होंने कहा कि उनका सपना बचपन से था कि भारत का हर बच्चा स्कूल जाए।

800 से ज्यादा सेंटर, लाखों बच्चों तक पहुंच (Rouble Nagi Art Foundation)

रूबल नागी ने Rouble Nagi Art Foundation की स्थापना की, जो आज देशभर में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर चला रही है। इन केंद्रों के जरिए उन बच्चों को शिक्षा दी जा रही है जो मुख्यधारा की पढ़ाई से दूर हैं।

वे विज्ञान और इतिहास जैसे कठिन विषयों को भी कला के माध्यम से आसान बनाकर पेश करती हैं। उनका मानना है कि शिक्षा सिर्फ चारदीवारी में नहीं, खुले आसमान के नीचे भी दी जा सकती है।

ग्लोबल टीचर प्राइज क्या है? (About Global Teacher Prize)

ग्लोबल टीचर प्राइज प्रतिष्ठित पुरस्कार वर्की फाउंडेशन (Varkey Foundation) द्वारा दिया जाता है। इसकी स्थापना शिक्षा उद्यमी सनी वर्की ( Sunny Varkey) ने की थी, जो GEMS एजुकेशन के संस्थापक भी हैं। यह पुरस्कार 2015 से दिया जा रहा है और 2026 में इसका 10वां संस्करण आयोजित हुआ। रूबल नागी इस सम्मान को पाने वाली 10वीं शिक्षक बनी हैं।

रूबल नागी की कहानी यह साबित करती है कि जब रचनात्मकता और संवेदनशीलता साथ चलती हैं तो बदलाव असंभव नहीं रहता। झुग्गियों की दीवारों से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया के सबसे बड़े शिक्षा मंच तक पहुंच चुका है।

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