LeT Terrorist 'Khargosh' कौन है? निकाह से सऊदी तक 'सुरंग' बनाई, पहलगाम हमले की बरसी पर था बड़ा प्लान?

LeT Terrorist Khargosh: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक ऐसा खुलासा किया, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का टॉप ऑपरेटिव उमर हैरिस उर्फ 'खरगोश' भारत से फरार होकर सऊदी अरब पहुंच गया है। उसने सज्जाद नाम से जाली पासपोर्ट बनवाया, खुद को राजस्थान का निवासी बताया और जयपुर पासपोर्ट ऑफिस से दस्तावेज लेकर देश छोड़ दिया।

जांच में नया खुलासा हुआ कि 2023-2024 तक 'खरगोश' और उसका साथी कामरान जयपुर में छिपे रहे। उन्होंने नूह-मेवात का आधार कार्ड अपडेट करवाकर वोटर आईडी और पासपोर्ट बनवाया। जयपुर के चार दीवारी इलाके में किराए पर रहा, सी-स्कीम की इलेक्ट्रॉनिक दुकान में नौकरी की, टूरिस्ट स्पॉट्स घूमा और नेपाल भी घूमने गया। निकाह वाली युवती श्रीनगर की बताई जा रही है, लेकिन जयपुर में निकाह या साथ रहने की पुष्टि अभी नहीं हुई।

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श्रीनगर पुलिस इस अंतर-राज्यीय LeT आतंकी मॉड्यूल की जांच कर रही है। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को डिटेल शेयर कर दिए गए हैं। NIA को केस सौंपा जा रहा है। राजस्थान ATS अलर्ट पर है। जयपुर में 10-15 संदिग्धों से पूछताछ हुई, सभी नूह-मेवात के बताए जा रहे हैं। यह मामला सिर्फ एक आतंकी का फरार होना नहीं, पासपोर्ट वेरिफिकेशन सिस्टम की कमजोरी, फेक आईडेंटिटी नेटवर्क, नूह-मेवात कनेक्शन और LeT की पैन-इंडिया स्ट्रैटजी का बड़ा एक्सपोजर है। ठीक पहलगाम हमले की पहली बरसी (22 अप्रैल 2026) से दो दिन पहले यह खुलासा हुआ है। अटकलें यह भी लगाई जा रही हैं कि 'खरगोश' का मॉड्यूल बरसी पर बड़ा प्लान रचा रहा था। आइए विस्तार से समझते हैं...

Who Is Terrorist Khargosh: 'खरगोश' कौन है? पाकिस्तान से कश्मीर तक का खूंखार सफर

उमर हैरिस का असली घर खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान है। पहले उसे कराची का बताया जाता था, लेकिन जांच में साफ हुआ - वहां कराची पुलिस के वांछित था। कई आगजनी के केस लंबित थे। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए 2012 में वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा। LeT ने उसे उत्तरी मार्ग से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराई।

Why Nickname 'Khargosh': उपनाम 'खरगोश' क्यों?

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सुरक्षा बलों के मुताबिक, वह बेहद चपल और चालाक था। सुरक्षा घेरा तोड़कर तेजी से छिप जाता था कि ठीक खरगोश की तरह। बांदीपोरा और श्रीनगर में सक्रिय रहा। LeT के लिए रिक्रूटमेंट, फंडिंग और लॉजिस्टिक्स संभाला।

जांच के दौरान श्रीनगर पुलिस ने एक बड़े अंतर-राज्यीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। इसमें 5 लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल्लाह उर्फ अबू हुरैरा (Pakistani Terrorist Abdullah, alias Abu Huraira) भी शामिल है, जो 16 साल से भारत में छिपा था। इस मॉड्यूल से 'खरगोश' का सीधा कनेक्शन साफ हुआ। 2012 में पाकिस्तान से आए थे उमर और कामरान। दोनों ने भारत में लंबे समय तक फेक आईडेंटिटी बनाकर काम किया।

Pahalgam Attack Anniversary: पहलगाम हमले की बरसी पर था बड़ा प्लान?

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम (बैसरन घाटी) में LeT (और TRF) ने 26 निर्दोषों (25 पर्यटक + 1 स्थानीय पोनी वाला) की जान ली थी। यह कश्मीर में 25 साल का सबसे घातक पर्यटक हमला था। आज ठीक बरसी से दो दिन पहले 'खरगोश' का मामला सामने आया। कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। एजेंसियों को आशंका है कि 'खरगोश' का मॉड्यूल बरसी पर बड़ा हमला या रिक्रूटमेंट ड्राइव का प्लान बना रहा था। LeT अब घाटी के अलावा दूसरे राज्यों में भी नेटवर्क फैला रही है। 'खरगोश' सऊदी से रिमोट कंट्रोल ऑपरेशन चला सकता है, फंडिंग, निर्देश और नई साजिशों का खेल।

जयपुर कनेक्शन: फर्जी निकाह, नूह-मेवात आधार कार्ड और 'सुरंग'

'खरगोश' की सबसे बड़ी चाल जयपुर में खेली गई। LeT OGW की बेटी (श्रीनगर की युवती) से फर्जी नाम 'सज्जाद' के तहत निकाह रचाने की बात सामने आई। नूह-मेवात का आधार कार्ड अपडेट करवाकर वोटर आईडी और पासपोर्ट बनवाया। 2023-2024 तक जयपुर में छिपा रहा। चार दीवारी इलाके में किराए पर कमरा लिया। सी-स्कीम की एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान में नौकरी की। जयपुर के टूरिस्ट प्लेसेज, मंदिर घूमा और नेपाल भी घूमने गया। मकान मालिक और दर्जनभर लोगों (सभी नूह-मेवात के) से पूछताछ हुई। नूह-मेवात के कुछ लोगों को जयपुर में उसके ठहरने का इंतजाम करने को कहा गया था।

पासपोर्ट ऑफिस में सेंध कैसे लगी?

पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है, लेकिन कई बार यह फॉर्मलिटी बन जाती है। OGW नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज (आधार, वोटर आईडी, रेंट एग्रीमेंट) और लोकल सपोर्ट ने काम आसान कर दिया। जयपुर पासपोर्ट ऑफिस में सिस्टेमिक लूपहोल उजागर हुए। निकाह के कागजात ने उसे भारतीय नागरिक जैसा लुक दे दिया। जयपुर में 10-15 संदिग्धों से पूछताछ हुई। राजस्थान ATS अब पूरी तरह अलर्ट है।

इंडोनेशिया रूट से सऊदी तक भागा 'खरगोश'

2024 में (जांच के दौरान) फर्जी पासपोर्ट की मदद से वह इंडोनेशिया पहुंच गया। वहां से सऊदी अरब। फिलहाल वह सऊदी में छिपा हुआ है। कुछ रिपोर्ट्स में गिरफ्तारी की खबर आई, लेकिन आधिकारिक सूत्र कहते हैं - वह ट्रेस हो चुका है और छिपा हुआ है। इंटरपोल और सऊदी अथॉरिटीज से सहयोग मांगा जा रहा है। यह एस्केप LeT की नई रणनीति को दिखाता है कि फेक पासपोर्ट + विदेशी रूट से भारत से बाहर निकलना और वहां से ऑपरेशन चलाना।

जांच का बड़ा खुलासा: अंतर-राज्यीय LeT मॉड्यूल

  • श्रीनगर पुलिस ने मॉड्यूल को डीप रूटेड बताया।
  • घाटी में ठिकाने।
  • राजस्थान, दिल्ली, नूह-मेवात में सपोर्ट नेटवर्क।
  • फेक आईडेंटिटी और पासपोर्ट बनाने का सिस्टम।
  • Red Fort ब्लास्ट जैसे पुराने मामलों से कनेक्शन की जांच।

मामला NIA को सौंपा जा रहा है। केंद्रीय एजेंसियां पूरे देश में पासपोर्ट वेरिफिकेशन की समीक्षा कर रही हैं।

क्यों खतरनाक है यह मामला? एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं

  • पासपोर्ट सिस्टम की कमजोरी: एक LeT आतंकी जाली पासपोर्ट लेकर भाग गया तो और कितने छिपे हो सकते हैं?
  • OGW + नूह-मेवात नेटवर्क: जयपुर जैसे शहरों में सपोर्टर्स सक्रिय। निकाह और फेक आईडी बनाना आसान हो गया।
  • LeT की नई स्ट्रैटजी: पाकिस्तान से घुसपैठ के बाद फेक डॉक्यूमेंट्स से देश भर में घूमना और विदेश भाग जाना।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा: सऊदी जैसे देशों में छिपे आतंकी वहां से फंडिंग, रिक्रूटमेंट या नई साजिश चला सकते हैं - खासकर पहलगाम बरसी जैसे मौके पर।

LeT का पैन-इंडिया खेल: 'खरगोश' सिर्फ आइसबर्ग का सिरा

लश्कर-ए-तैयबा 1989 से कश्मीर में सक्रिय है, लेकिन अब रणनीति बदली है कि घाटी के अलावा राजस्थान, दिल्ली, मेवात जैसे इलाकों में मॉड्यूल। फेक पासपोर्ट, फर्जी निकाह और OGW नेटवर्क इसका हथियार है। 'खरगोश' का केस दिखाता है कि आतंकी अब हथियार के साथ कागजात भी इस्तेमाल कर रहे हैं। श्रीनगर पुलिस की कार्रवाई ने नेटवर्क तोड़ा, लेकिन जड़ें गहरी हैं।

'खरगोश' का फरार होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चेतावनी है। जयपुर पासपोर्ट ऑफिस में लगी सेंध, नूह-मेवात आधार कार्ड, फर्जी निकाह और नेपाल घूमने वाली 'सुरंग' ने सिस्टम की कमजोरी उजागर कर दी। पहलगाम बरसी पर अगर बड़ा प्लान था तो उसे रोका गया, लेकिन समय रहते सुधार नहीं हुए तो ऐसे कई 'खरगोश' देश से बाहर निकलकर नई साजिशें रच सकते हैं।

श्रीनगर पुलिस, NIA, राजस्थान ATS और केंद्रीय एजेंसियां इस केस को पूरी गंभीरता से ले रही हैं। राष्ट्र की सुरक्षा की लड़ाई अब सिर्फ घाटी तक सीमित नहीं - पूरे भारत, राजस्थान, मेवात और विदेश तक फैली हुई है।

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