कौन हैं जस्टिस बेला त्रिवेदी, जिन्होंने कोटा के अंदर कोटा देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अकेले किया विरोध
Supreme Court Justice Bela Trivedi: सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (sc) और अनुसूचित जनजाति (ST)में कोटे के अंदर कोटा बनाकर आरक्षण देने का फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने 6:1 के बहुमत से ये फैसला दिया है। यानी चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ समेत 6 जजों ने फैसले पर सहमति दी तो वहीं इस बेंच की जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी ने असहमति पर फैसला दिया।
बेला एम. त्रिवेदी ने कहा, ''अनुच्छेद 341 के तहत अधिसूचना में अनुसूचित जातियों के रूप में सूचीबद्ध जातियों, नस्लों या जनजातियों को SC कैटेगरी में पहले से लिस्टेड जातियों को रिग्रुप या सबडिवाइड करने का अधिकार नहीं है।'' उन्होंने आगे कहा कि राज्यों द्वारा ऐसा कोई भी उप-वर्गीकरण भेदभाव और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा। अपने इस फैसले के बाद जस्टिस बेला त्रिवेदी चर्चा में आ गई हैं? आइए जानें कौन हैं?

Who is Justice Bela Trivedi: कौन हैं जस्टिस बेला त्रिवेदी?
- जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी को 2021 में सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। जस्टिस बेला त्रिवेदी गुजरात हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने वाली पहली महिला न्यायाधीश हैं। जस्टिस बेला त्रिवेदी का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
- बेला त्रिवेदी का जन्म 10 जून 1960 को गुजरात के पाटन में हुआ था। उनके पिता न्यायिक सेवा में थे, इसलिए परिवार कई जगहों पर रहा है। यही वजह है कि बेला त्रिवेदी ने कई जगहों से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है। उन्होंने वडोदरा में एमएस विश्वविद्यालय से बीकॉम-एलएलबी की पढ़ाई की।
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Justice Bela Trivedi Career: जस्टिस बेला त्रिवेदी का करियर
- अपनी कानूनी शिक्षा पूरी करने के बाद, बेला त्रिवेदी ने गुजरात बार में दाखिला लिया और लगभग 10 सालों तक सिविल और संवैधानिक कानून में काम करते हुए एक वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया।
- 10 जुलाई, 1995 को जस्टिस बेला त्रिवेदी को अहमदाबाद के सिटी सिविल और सेशन कोर्ट में सीधे जज के तौर पर नियुक्त किया गया। संयोग से उनकी नियुक्ति के समय उनके पिता भी उसी कोर्ट में जज के तौर पर काम कर रहे थे। इस वजह से उन्हें लिम्का बुक ऑफ इंडियन रिकॉर्ड्स के 1996 के संस्करण में 'एक ही कोर्ट में पिता-पुत्री जज' के तौर पर जगह मिली।

- इस दौरान बेला त्रिवेदी ने हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार ऑफ विजिलेंस, गुजरात सरकार में कानून सचिव, सीबीआई कोर्ट जज और सीरियल बम ब्लास्ट मामलों में विशेष जज जैसे कई पदों पर काम किया।
- 17 फरवरी 2011 को जस्टिस त्रिवेदी को गुजरात हाईकोर्ट का जज बनाया गया। उसी साल जून में, उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया और फरवरी 2016 में गुजरात में में वापस भेज दिया गया।
- बेला त्रिवेदी 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बनीं। बेला त्रिवेदी 9 जून 2025 को सेवानिवृत्त होने वाली हैं।
Justice Bela Trivedi Notable Judgements: जस्टिस बेला त्रिवेदी के अहम फैसले
जस्टिस बेला त्रिवेदी नवंबर 2021 में पूर्व सीजेआई यूयू ललित की अगुवाई वाली 3-न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा थी, जिसने नवंबर 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट के विवादास्पद फैसले को पलट दिया था। इस फैसले में कहा गया था कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत यौन उत्पीड़न का गठन करने के लिए 'त्वचा से त्वचा' का संपर्क आवश्यक था। पीठ ने कहा कि अधिनियम की धारा 7 के तहत 'त्वचा' और 'स्पर्श' की संकीर्ण परिभाषा अपनाने से प्रावधान की बेतुकी व्याख्या होगी और अधिनियम का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
जस्टिस बेला त्रिवेदी जनहित अभियान बनाम भारत संघ (2022) में 5-न्यायाधीशों की संविधान पीठ का भी हिस्सा थीं, जिसने 103वें संविधान संशोधन के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण को बरकरार रखा है।












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