कौन है डॉ शाहीन? लेक्चरर को मसूद अजहर की बहन ने क्यों सौंपी JeM की कमान, खुल गई व्हाइट-कॉलर आतंक की कुंडली!
Who Is Dr Shaheen Shahid: डॉ शाहीन शाहिद, जिसने एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज लेक्चरर के रूप में अपना करियर शुरू किया था, आज पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल की मुख्य कड़ी बनकर सामने आई है।
फरीदाबाद से गिरफ्तार की गई डॉ. शाहीन पर JeM की महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनीन' को भारत में स्थापित करने और उसका नेतृत्व करने का गंभीर आरोप है।

यह विंग भारत में महिलाओं के नेतृत्व में कट्टरपंथ और भर्ती का एक नया नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रही थी। इसकी गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को हैरान कर दिया है और यह दिखाता है कि कैसे हाईली एजुकेटेड प्रोफ़ेशन भी आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं।
करियर और अचानक हुई गुमशुदगी
डॉ. शाहीन सिद्दीकी (शाहिद) ने 2006 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के माध्यम से कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (GSVM) में लेक्चरर के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने 2009 से 2010 के बीच कन्नौज सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी काम किया।
क्या कहता है कॉलेज का रिकॉर्ड?
उनके सहकर्मी उन्हें एक शांत, अनुशासित और मेधावी व्यक्ति के रूप में याद करते हैं, यही वजह है कि उनके आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया है। कॉलेज के रिकॉर्ड के अनुसार, 2013 में वह बिना अनुमति के छुट्टी पर चली गई और कॉलेज की ओर से कई नोटिस भेजे जाने के बावजूद कभी वापस नहीं लौटी। नतीजतन, 2021 में राज्य सरकार द्वारा उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
व्यक्तिगत जीवन और पति से तलाक
जांच में पता चला है कि डॉ. शाहीन की शादी महाराष्ट्र के जफर हयात से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता लंबा नहीं चला और 2015 में उनका तलाक हो गया। पति से अलग होने के बाद वह हरियाणा के फरीदाबाद शिफ्ट हो गईं। इसी दौरान वह कथित तौर पर डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई और JeM मॉड्यूल के अन्य सदस्यों के संपर्क में आईं।
इस संपर्क ने उन्हें आतंकी नेटवर्क के करीब ला दिया। सूत्रों के अनुसार, उनकी कार, जिसका इस्तेमाल डॉ. मुज़म्मिल भी करते थे, में बाद में एक राइफ़ल और ज़िंदा कारतूस भी मिले थे, जिससे नेटवर्क की लॉजिस्टिक्स में उनकी सक्रिय भागीदारी का संदेह गहरा हो गया।
JeM की महिला विंग की इंडिया हेड
डॉ. शाहीन पर भारत में JeM की नई महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनीन' को चलाने का आरोप है। एजेंसियों का मानना है कि उन्हें यह जिम्मेदारी सीधे JeM संस्थापक मसूद अज़हर की बहन सादिया अज़हर ने सौंपी थी, जो पाकिस्तान में JeM की महिला विंग की प्रमुख है।
शाहीन सोशल मीडिया चैनलों के ज़रिए सीमा पार बैठे हैंडलर्स के संपर्क में थी। उनका मुख्य काम भारत में JeM के लिए सहानुभूति रखने वालों को एकजुट करके और कट्टरपंथी महिलाओं का नेटवर्क खड़ा करके संगठन के लिए भर्ती का आधार बढ़ाना था। आरोप है कि उन्होंने अपनी मेडिकल साख और पेशेवर नेटवर्क का इस्तेमाल संदेह से बचने और आतंकी मॉड्यूल के साजो-सामान (लॉजिस्टिक्स) संचालन में मदद करने के लिए एक 'कवर' के रूप में किया।
फरीदाबाद मॉड्यूल और गिरफ्तारी
इस आतंकी नेटवर्क का खुलासा दिल्ली रेड फोर्ट कार विस्फोट के बाद हुआ। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा शुरू की गई जाँच के बाद पहले डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई और डॉ. उमर यू नबी को गिरफ़्तार किया गया, जो फरीदाबाद की अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। डॉ. मुज़म्मिल की पूछताछ से डॉ. शाहीन की भागीदारी और महिला गुर्गों के साथ उनके समन्वय का खुलासा हुआ। अंततः, 11 नवंबर को डॉ. शाहीन को हिरासत में लिया गया। यह समूह एक अंतर-राज्यीय आतंकी नेटवर्क का केंद्र था, जिसमें तीनों उच्च शिक्षित पेशेवर (डॉक्टर्स) शामिल थे।
लखनऊ में छापेमारी और जांच
डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी के बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस और उत्तर प्रदेश ATS की एक संयुक्त टीम ने लखनऊ में उनके लालबाग स्थित पैतृक आवास पर छापेमारी की। इस घर में उनके भाई डॉ. परवेज़ अंसारी (जो इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं) रहते हैं। छापेमारी में ATS ने परिवार के मोबाइल फ़ोन, एक हार्ड डिस्क और कई दस्तावेज़ ज़ब्त किए और डॉ. परवेज़ अंसारी को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
डॉ. शाहीन के पिता, सैयद अहमद अंसारी ने मीडिया को बताया कि उन्हें अपनी बेटी के किसी भी आतंकी लिंक के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस हाई-प्रोफ़ाइल मामले की जाँच अब राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली है, जो उनके अकादमिक रिकॉर्ड, सोशल मीडिया कनेक्शन और विदेशी संपर्कों की गहन जाँच कर रही है।












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