कश्मीर वार्ता दिनेश्वर शर्मा के हवाले, जानें इनका पूरा प्रोफाइल
जानिए कौन हैं दिनेश्वर शर्मा,
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आईबी के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा को जम्मू-कश्मीर की शांति प्रक्रिया में भारत सरकार के नुमाइंदे के तौर पर नियुक्त किया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये जानकारी दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि दिनेश्वर शर्मा को पूरा अधिकार होगा कि वो किससे बातचीत करना चाहते हैं और किससे नहीं। उन्हें सरकार की ओर से इसके लिए उन्हें पूरी आजादी होगी। राजनाथ ने हुर्रियत से भी बातचीत करने से भी इंकार नहीं किया। राजनाथ ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर दिए अपने भाषण में ही कह दिया था किकश्मीर मसला न गाली से, न ही गोली से, बल्कि कश्मीरियों को गले लाने से हल होगा।


कश्मीर में शान्ति कायम करना प्राथमिकता
दिनेश्वर शर्मा ने अपनी नियुक्ति के बाद कहा कि उनका पूरा जोर इस बात पर होगा कि कश्मीर में अमन कायम हो। शर्मा ने कहा 'मैं उम्मीद करता हूं कि कश्मीर के लोग मेरी नियुक्ति को सकारात्मकता से लेंगे।' दिनेश्वर शर्मा ने कहा कि कश्मीर के लोग हिंसा से उकता गए हैं और वो शान्ति चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो कश्मीर के लोगों के साथ संवाद कायम करेंगे।

कौन है दिनेश्वर शर्मा
1979 बैच के आईपीएस अधिकारी दिनेश्वर शर्मा कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए होने वाली शांति वार्ता में सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी दिनेश्वर शर्मा बिहार के गया जिले के पाली गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने करियर के 23 साल अलग-अलग एजेंसियों के साथ काम किया है और उन्हें कूटनीतिक मामलों का मंझा हुआ खिलाड़ी माना जाता है। शर्मा ने आईबी प्रमुख के रूप में पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के साथ भी काम किया है।

कश्मीर में गुजरा है लंबा वक्त
दिनेश्वर शर्मा को मृदु भाषी और लो-प्रोफाइल रहने के लिए जाने जाते हैं। आईबी के निदेशक बनने से पहले वह आईबी में सर्विलांस विभाग के प्रमुख रहते हुए उन्होंने एजेंसी को कई अभियानों की अगुवाई की है। आईपीएस सर्विस में आने से पहले दिनेश्वर शर्मा का चयन इंडियन फोरेस्ट सर्विस के लिए भी हुए फिर वो आईपीएस में सेलेक्ट हो गए। शर्मा अपने कार्यकाल में काफी समय तक कश्मीर में भी तैनात रहे हैं, ऐसे में उन्हें कश्मीर के सामाजिक और राजनीतिक हालातों की काफी जानकारी है। ऐसे में अब जब उन्हें केंद्र सरकार ने कश्मीर भेजा है तो उनका तजुर्बा काफी मददगार साबित हो सकता है।












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