BJP President: कौन हैं दिनेश शर्मा? भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने की रेस में आया जिनका नाम, जाति से हैं ब्राह्मण
BJP President Election 2025 (Dinesh Sharma): भाजपा में इन दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर हलचल तेज है। पार्टी के भीतर से मिल रहे संकेत साफ बताते हैं कि इस बार समीकरण कुछ अलग तरह से साधे जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हाल ही में चुने गए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन-दोनों ही ओबीसी पृष्ठभूमि से आते हैं। देश की मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दलित समुदाय से थे। ऐसे में पार्टी और संघ के भीतर यह राय बन रही है कि संतुलन के लिए अब बारी किसी ब्राह्मण नेता की है।
चर्चा तो यहां तक है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही नए अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है और नवरात्रि के दौरान इसकी औपचारिक घोषणा संभव है। नामों की सूची में उत्तर प्रदेश के कद्दावर ब्राह्मण नेता और पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा का नाम चर्चा में आगे बताया जा रहा है। संकेत साफ हैं कि भाजपा अपने जातीय गणित में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। ऐसे में आइए जानते हैं दिनेश शर्मा और उनके राजनीतिक सफर के बारे में।

कौन हैं दिनेश शर्मा? भाजपा के सधे हुए ब्राह्मण चेहरे की कहानी (Who Is Dinesh Sharma)
दिनेश शर्मा का जन्म 12 जनवरी 1964 को हुआ। पेशे से वे प्रोफेसर हैं और लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग से लंबे समय तक जुड़े रहे। 1988 में उन्होंने बतौर शिक्षक अपनी पारी शुरू की और आगे चलकर विभाग में प्रोफेसर बने। पढ़ाई-लिखाई की दुनिया से आने के बावजूद उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से रहा। यही जुड़ाव उन्हें राजनीति की मुख्य धारा तक ले गया।
छात्र राजनीति से भाजपा तक का सफर (Dinesh Sharma Political career)
दिनेश शर्मा ने राजनीति की शुरुआत ABVP से की और लखनऊ महानगर अध्यक्ष भी बने। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर काम किया। भाजपा संगठन में उन्होंने धीरे-धीरे हर पायदान पर अपनी जगह बनाई। 1998 में वे उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष बने।
अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ाव
2004 का लोकसभा चुनाव दिनेश शर्मा के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। उस वक्त वे लखनऊ से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव कार्यालय के संयोजक रहे। इस जिम्मेदारी ने उन्हें पार्टी के बड़े नेताओं के और करीब ला दिया।
लखनऊ के मेयर बने और लोकप्रियता बढ़ी
नवंबर 2006 में दिनेश शर्मा पहली बार लखनऊ के मेयर चुने गए। खास बात यह रही कि भाजपा के इस गढ़ में उन्हें सवर्णों और शिया मुसलमानों दोनों का मजबूत समर्थन मिला। 2012 में वे दोबारा बड़े अंतर से मेयर बने। इसी दौरान उनका कद पार्टी में लगातार बढ़ता गया।
राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री
2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद दिनेश शर्मा को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया और गुजरात का प्रभारी भी बनाया गया। उसी साल उन्होंने भाजपा की सदस्यता अभियान का नेतृत्व किया, जिसकी वजह से पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताने लगी।
उपमुख्यमंत्री के तौर पर भूमिका
2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार बनी तो दिनेश शर्मा को लखनऊ का मेयर रहते हुए ही उपमुख्यमंत्री बनाया गया। उन्हें उच्च एवं माध्यमिक शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
संसद तक का सफर
मार्च 2022 में कैबिनेट फेरबदल के दौरान ब्रजेश पाठक ने उनकी जगह उपमुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद 2023 में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया और वे बिना किसी विरोध के संसद के उच्च सदन के सदस्य चुने गए।
दिनेश शर्मा की पहचान एक सधे हुए, संगठनप्रिय और सहज नेता की है, जिनके पास संगठन से लेकर सत्ता तक का लंबा अनुभव है। यही कारण है कि उनका नाम अक्सर भाजपा के बड़े पदों की दौड़ में शामिल होता है। इसी वजह से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में भी उनका नाम आ रहा है।












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