कौन हैं 63 साल के BJP नेता, जिन्होंने कांग्रेस की 18 साल छोटी महिला नेत्री से की चौथी शादी, लेकिन अब हुआ विवाद
Deepak Joshi Marriage Controversy: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक शादी सबसे बड़ी सुर्खी बनी हुई है। वजह सिर्फ उम्र का फासला नहीं, बल्कि दूल्हा-दुल्हन की राजनीतिक पहचान, पुराने रिश्तों के दावे और अदालत तक पहुंचे विवाद हैं। मामला है 63 साल के बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री दीपक जोशी का, जिन्होंने कांग्रेस की 18 साल छोटी महिला नेत्री पल्लवी राज सक्सेना से शादी की है। तस्वीरें सामने आते ही यह निजी फैसला एक बड़े सार्वजनिक विवाद में बदल गया।
कौन हैं दीपक जोशी, जिनकी शादी पर बवाल (Who is Deepak Joshi)
दीपक जोशी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी के बेटे हैं। कैलाश जोशी को प्रदेश की राजनीति में 'राजनीति का संत' कहा जाता रहा है और उन्हें भाजपा का पितृ पुरुष माना जाता है। दीपक जोशी खुद भी लंबे समय तक भाजपा में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। वे बागली और हाटपिपल्या से विधायक रहे और शिवराज सिंह चौहान सरकार में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

🟡 आर्य समाज मंदिर में हुई दीपक और पल्लवी की शादी, तस्वीरें हुईं वायरल
दीपक जोशी और पल्लवी राज सक्सेना की शादी 4 दिसंबर 2025 को भोपाल के आर्य समाज मंदिर में हुई। सामने आई तस्वीरों में दीपक जोशी पल्लवी की मांग में सिंदूर भरते दिख रहे हैं। ये तस्वीरें पहले खुद पल्लवी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं और बाद में डिलीट कर दीं। इसके बाद कांग्रेस नेता बृजेंद्र शुक्ला ने इन्हें शेयर कर दोनों को बधाई दी और यहीं से मामला चर्चा के केंद्र में आ गया।
🟡 दो महिलाओं ने किया दीपक जोशी की पत्नी होने का दावा
शादी की खबर सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया, जब दो अन्य महिलाओं ने खुद को दीपक जोशी की पत्नी बताया। इनमें नम्रता जोशी और शिखा जोशी मित्रा शामिल हैं। शिखा का दावा है कि उन्होंने 2016 में दीपक जोशी से शादी की थी।
वहीं नम्रता का कहना है कि वे उनकी पत्नी हैं और उनके घर में रहती हैं। इन दोनों मामलों से जुड़े विवाद कोर्ट तक पहुंचे हुए हैं। दीपक जोशी की पहली पत्नी विजया जोशी का 2021 में कोरोना के दौरान निधन हो चुका है।

🟡 पल्लवी सक्सेना का पक्ष, रिश्ता पूरी तरह कानूनी
पल्लवी सक्सेना ने पूरे मामले पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि उनकी शादी सामाजिक और कानूनी रूप से पूरी तरह वैध है। दीपक जोशी के परिवार के बुजुर्ग खुद उनके घर रिश्ता लेकर आए थे। उनके पिता गुलाबचंद तामोट, जो पूर्व पीएस रहे हैं, की सहमति से विवाह तय हुआ। घर पर हल्दी और मेहंदी की रस्में हुईं, जिसमें करीबी दोस्त और रिश्तेदार शामिल रहे।
पल्लवी ने अन्य महिलाओं के दावों को विरोधाभासी बताया। उन्होंने कहा कि शिखा 2016 की शादी का दावा करती हैं, जबकि दीपक जोशी की पहली पत्नी विजया जोशी का निधन 2021 में हुआ था। इसके अलावा 2018-19 में शिखा अपने पति गौतम मित्रा के साथ रह रही थीं। नम्रता जोशी के मामले में उन्होंने कहा कि तलाक का केस कोर्ट में है और नम्रता पर आईटी एक्ट के तहत वारंट जारी है। पल्लवी ने अश्लील टिप्पणियों और फोटो वायरल करने को लेकर क्राइम ब्रांच और साइबर सेल में शिकायत भी दर्ज कराई है।
🟡 पल्लवी सक्सेसा बोलीं- रिश्ता सिर्फ शादी नहीं, बल्कि दो टूटे हुए लोगों का सहारा
पल्लवी सक्सेना भावुक होते हुए बताती हैं कि यह रिश्ता सिर्फ शादी नहीं, बल्कि दो टूटे हुए लोगों का सहारा है। वे पिछले 17 साल से तलाक के दर्द, पैरालिसिस अटैक और डिप्रेशन से जूझ रही थीं। उनके मुताबिक दीपक जोशी ने उन्हें मानसिक संबल दिया। पल्लवी का बेटा साहिब दीपक जोशी को पिता मानता है और दीपक के बच्चे भी पल्लवी को मां के रूप में स्वीकार कर चुके हैं। पल्लवी का कहना है कि जब दिल और सोच मिलते हैं, तो उम्र मायने नहीं रखती।

🟡 दीपक जोशी बोले, गलती हो सकती है, बेईमानी नहीं
विवाद बढ़ने पर दीपक जोशी ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि वे सार्वजनिक जीवन जीते हैं और यह मामला 2006 से चला आ रहा है। कुछ प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं, इसलिए अभी सार्वजनिक टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि गलती हुई हो सकती है, लेकिन बेईमानी नहीं की। अगर दोषी होंगे तो कानून सजा देगा और निर्दोष होंगे तो बरी किया जाएगा। उन्होंने भोपाल में मीडिया के सामने पूरा पक्ष रखने की बात कही है।
🟡 कांग्रेस की प्रतिक्रिया, निजी मामला लेकिन असर सार्वजनिक
कांग्रेस प्रवक्ता चंद्रपाल सिंह सोलंकी ने कहा कि यह दीपक जोशी का निजी मामला है, लेकिन राजनीति से जुड़े लोगों को सादगीपूर्ण जीवन जीना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ गलतियों का प्रायश्चित संभव होता है, लेकिन कुछ का समाज पर गहरा असर पड़ता है।
🟡 दीपक जोशी का राजनीतिक सफर (Deepak Joshi Political Career)
- 1983: दीपक जोशी ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता युवा मोर्चा की कार्यकारी समिति के सदस्य बने। इसके बाद लंबे समय तक संगठन से जुड़े रहे।
- 1984: भोपाल के सरकारी हमीदिया कॉलेज में छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और एक साल के लिए छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए।
- 1991 से 1994: बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल की कार्यकारी परिषद के सदस्य रहे। इस दौरान शैक्षणिक और प्रशासनिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई।
- 2000: संगठन में पकड़ मजबूत होने के बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया।
- 2003: पहली बार विधायक बने। बागली विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर 12वीं विधानसभा में पहुंचे और कांग्रेस उम्मीदवार श्यामलाल बाबूलाल को 17,574 मतों से हराया।
- 2008: विधानसभा क्षेत्र बदला और हाटपिपल्या से चुनाव लड़ा। कांग्रेस के राजेंद्र सिंह बघेल को पराजित कर दूसरी बार विधायक बने।
- 2013: लगातार तीसरी बार हाटपिपल्या सीट से जीत दर्ज की। एक बार फिर राजेंद्र सिंह बघेल को हराया और शिवराज सिंह चौहान सरकार में राज्य मंत्री बनाए गए। उन्हें स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास जैसे विभाग मिले।
- 2018: विधानसभा चुनाव में हाटपिपल्या सीट से कांग्रेस के मनोज चौधरी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसी चुनाव के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी।
- 2020: ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में शामिल हुए। हाटपिपल्या समेत 28 सीटों पर उपचुनाव हुए, लेकिन भाजपा ने दीपक जोशी की जगह कांग्रेस से आए मनोज चौधरी को टिकट दिया। यहीं से दीपक जोशी की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी।
- 2021: कोरोना की दूसरी लहर में पत्नी विजया जोशी का निधन हो गया। इस निजी त्रासदी के बाद दीपक जोशी की राजनीतिक सक्रियता काफी कम हो गई।
- दिसंबर 2022: भ्रष्टाचार के मुद्दे पर खुलकर सामने आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बागली क्षेत्र की नगर परिषदों में प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित करोड़ों के घोटाले की जांच की मांग की। स्थानीय और प्रदेश स्तर पर सुनवाई न होने से असंतोष बढ़ा।
- 2023: भाजपा नेतृत्व से लगातार उपेक्षा से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने उन्हें खातेगांव सीट से टिकट दिया, लेकिन चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
- 2024: बुधनी विधानसभा उपचुनाव के दौरान दीपक जोशी ने एक बार फिर भाजपा में वापसी कर ली। इसके साथ ही उनका राजनीतिक सफर एक नए मोड़ पर पहुंच गया।












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