Bhopal Lok Sabha Chunav: भोपाल सांसद कौन ? नहीं पता, लेकिन वोट मोदी को ही देंगे, जानिए माहौल क्या है
Lok Sabha Election 2024: क्या माहौल है यह जानने के लिए वन इंडिया हिंदी की टीम पूरे मध्यप्रदेश प्रदेश के दौरे पर है। टीम ने मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में चर्चा करके लोगों की राय जानी है और चुनावी माहौल को समझने का प्रयास किया है।
राजधानी भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र के गांवों में, लोगों ने बताया कि पिछले 5 सालों में पंचायत में विकास के काम तेजी से हुए हैं, लेकिन सांसद का नाम उन्हें पता नहीं है। इसके बावजूद, वे मोदी सरकार के कामों से खुश हैं और एक बार फिर भाजपा को मौका देने का मन बना रहे हैं।

जब पंचायत कार्यालय में आई हुई महिलाओं से संवाददाता लक्ष्मी नारायण मालवीय ने सांसद के कामों के बारे में पूछा तो महिलाएं सांसद का नाम तक नहीं बता पाई। ग्रामीण सविता बाई ने कहा कि हमें सांसद के बारे में कुछ नहीं पता, लेकिन मोदी जी, जो काम कर रहे हैं उसे हम खुश हैं। हमें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है।
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जूते चप्पल बेचने वाले अकरम शेख ने कहा कि वे पिछले 10 सालों से जूता चप्पल बेच रहे हैं और उन्हें सांसद का नाम तक नहीं पता है, लेकिन उन्हें मोदी सरकार के काम पसंद आ रहे हैं। अकरम ने कहा, "पिछले 5 सालों में हमारा मटेरियल थोड़ा महंगा हुआ है, लेकिन ग्राहक कम दाम में ही जूते चप्पल खरीदना चाहते है, जिससे इनका मुनाफा कम हुआ है"

इसके बाद, सब्जी व्यापारी अरविंद खटीक ने बताया कि वे कई सालों से सब्जी बेचने के काम रहे हैं लेकिन पिछले 5 सालों में सब्जी मार्केट में काफी बदलाव देखा है। उनके अनुसार भोपाल की सब्जी मंडियों में काफी सुधार आया है। अब पहले की तरह मंडी में गंदगी दिखाई नहीं देती है। हालांकि उन्हें सरकार की किसी भी योजना का फायदा नहीं मिल रहा, लेकिन उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। उन्हें भी सांसद का नाम नहीं पता है, लेकिन वोट मोदी और भाजपा को ही देंगे।

इसके बाद वन इंडिया के संवाददाता ने उत्तर प्रदेश से भोपाल में पानी-पुरी बेचने आए शंकर जाटव से सवाल पूछा कि इस बार लोकसभा चुनाव में क्या माहौल दिख है? शंकर जाटव हंसते हुए कहा, "माहौल तो टाइट नजर आ रहा है, जिस तरह महंगाई बढ़ रही है, उसने आम आदमी का जीना मुश्किल कर दिया है। उन्हें भोपाल में पानी पुरी का धंधा करते हुए 15 साल हो गए हैं 5 साल पहले उनके रूम का किराया ₹1500 था, लेकिन अब ढाई हजार रुपए देने होते है। आलू से लेकर मैंदा तक महंगा हो गया, लेकिन पानी पुरी खाने वाले लोग अभी भी कम पैसों में ज्यादा पानी पुरी मांगते हैं"। वही भोपाल सांसद के कामों पर उन्होंने कहा कि उन्हें सांसद द्वारा किए गए कोई काम नजर नहीं आता, लेकिन मोदी सरकार अच्छा काम कर रही है। हालांकि उन्हें लगता है कि इस बार बदलाव हो सकता है।

भोपाल लोकसभा सीट की बात करें तो इसके अंतर्गत आठ विधानसभा सीटे आती हैं जहां पर अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के वाटर भारी संख्या में है। इसके अलावा दलित और मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं। यहां की जनसंख्या करीब 27,80,575 है, जिसमें से 23 प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं और 77 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। भोपाल सीट का इतिहास शुरुआत में कांग्रेस समर्थित रहा लेकिन करीब ढाई दशक से भारतीय जनता पार्टी का यहां कब्जा है। राजधानी भोपाल की हुजूर विधानसभा क्षेत्र में सामान्य व ओबीसी मिलकर करीब 74% वोट है। जिसमें सिंधी समाज का 15% और मीणा समाज का करीब 14% वोट लोकसभा चुनाव में असर करता है।
2019 के लोकसभा चुनाव में भोपाल के परिणाम क्या थे ?
2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को यहां से सांसद प्रत्याशी बनाया था। वहीं भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाया था इसके बाद चुनाव परिणाम में साथ भी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 8,66,482 वोट मिले है, जबकि दिग्विजय सिंह को 5 लाख 1660 वोट प्राप्त हुए थे। पिछले आठ चुनावों की बात करें तो, इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा रहा है। हालांकि इस बार भोपाल में मुकाबला काफी दिलचस्प होगा, क्योंकि सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के विवादित बयानों के कारण उनके टिकट बदलने की चर्चा भी जोरों पर है।












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