आया 15 अगस्त- नक्शे में किसने बांटा था भारत को
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) क्या आपने कभी सिरिल रेडक्लिफ का नाम सुना है? उनका भारत के विभाजन से बहुत गहरा नाता रहा है। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें भारत के बंटवारा करने की कठिन जिम्मेदारी सौंपी थी। दरअसल भारत का बंटवारा नहीं हुआ था। बंटवारा तो हुआ था पंजाब और बंगाल का।
उन्होंने कहा जाता है कि नक्शे पर ही बांटा था दोनों प्रातों को। वे दिल्ली के तुगलक रोड़ के बंगले में रहकर देश को बांट रहे थे। मुख्य बात ये देखी जा रही थी कि अगर कोई हिन्दू क्षेत्र है,तो वह भारत में मिले, अगर मुस्लिम है तो पाकिस्तान में। हां, भौगोलिक स्थितियों को भी देखा जा रहा था। इस बाबत उनकी कुछ विशेषज्ञ मदद कर रहे थे।
16 अगस्त को दी रिपोर्ट
हालांकि भारत स्वतंत्र हुआ 15 अगस्त 1947 को और पाकिस्तान विश्व नक्शे पर आया 14 अगस्त, 1947 को, पर इस बात का फैसला रेडक्लिफ ने अपनी रिपोर्ट 16 अगस्त को सौंपी थी कि कौन सा इलाका भारत में रहेगा और कौन सा पाकिस्तान में जाएगा।
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पेशे से था वकील
रेडक्लिफ पेशे से वकील थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट लार्ड माउंटबेटन को राजधनी दिल्ली में। उस वक्त पंडित जवाहर लाल नेहरु, लियाकत अली खान (पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री), सरदार बलदेव सिंह (भारत के पहले रक्षा मंत्री), समेत बहुत से अहम लोग मौजूद थे।
पाकिस्तान तो जलपईगुड़ी और दार्जिलिंग की भी मांग कर रहा था। पर ये हो ना सका। पर पाकिस्तान को पंजाब में गुरुदासपुर नहीं मिला। हालांकि वहां मुसलमान बहुमत में थे। इसी तरह से उसे लाहौर मिल गया हालांकि देश के बंटवारे के वक्त वहां हिन्दू बहुमत में थे।
राम के पुत्र ने बसाया
माना जाता है कि लाहौर को भगवान राम के पुत्र लव ने बसाया था। उन्हीं के नाम पर लाहौर बना। लाहौर महाराजा रंजीत सिंह की राजधानी भी थी। देश के बंटवारे के कुछ दिनों के बाद रेडक्लिफ लंदन चले गए। कहते हैं, उन्हें डर था कि उनके फैसले से नाराज कुछ लोग उनका खून कर सकते हैं।













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