WHO की चीफ साइंटिस्ट का दावा- स्वस्थ बच्चों को बूस्टर डोज की जरूरत नहीं
नई दिल्ली, 19 जनवरी: देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर का कहर जारी है। हाल ही में 15-18 आयुवर्ग के लिए भी वैक्सीनेशन प्रोग्राम भारत सरकार ने शुरू किया था। साथ ही 60 साल से ज्यादा उम्र (गंभीर बीमारी) वाले लोगों को प्रीकॉशन डोज दी जा रही। इसके बाद से सवाल उठ रहे थे कि क्या पूरी तरह से स्वस्थ बच्चों और किशोरों को भी बूस्टर डोज की जरूरत है। इस पर अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन का जवाब सामने आया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौम्या ने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की इम्यूनिटी में कुछ कमी की बात सामने आ रही है, लेकिन अभी इस पर ज्यादा शोध की जरूरत है। वहीं अभी इस बात के भी सबूत नहीं मिले हैं कि स्वस्थ बच्चों और स्वस्थ किशोरों को बूस्टर डोज की जरूरत है। वैसे डब्ल्यूएचओ ने आबादी के कुछ कमजोर वर्गों (बुजुर्गों और बीमार लोगों) को बूस्टर शॉट्स देने की आवश्यकता को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है। स्वामीनाथन ने कहा कि प्रमुख विशेषज्ञों का एक ग्रुप इस हफ्ते के अंत में बैठक करेगा। जिसमें इस पर विचार होगा कि बूस्टर डोज पर कैसे फैसला लिया जाए।
Recommended Video
अमेरिका दे रहा बूस्टर डोज
आपको बता दें कि मौजूदा वक्त में अमेरिका में बच्चों को भी बूस्टर डोज दी जा रही है। वहां के शीर्ष नियामक एफडीए ने इसी महीने की शुरुआत में फाइजर और बायोएनटेक की तीसरी डोज को मंजूरी दी थी। वहीं इजरायल भी 12 साल के ऊपर के बच्चों को बूस्टर डोज देने का प्लान बना रहा है। इसी तरह के हालात जर्मनी में भी हैं, वहां हाल ही में एक कंपनी ने 12-17 आयुवर्ग के लिए बूस्टर शॉट की सिफारिश की है।
स्वास्थ्य कर्मियों के लिए जरूरी
सौम्या स्वामीनाथन के मुताबिक बूस्टर डोज का उद्देश्य सबसे कमजोर और गंभीर बीमारी वाले लोगों की रक्षा करना है। स्वास्थ्य कर्मियों को भी इसकी जरूरत है। जिस वजह से उन्हें दिया जा रहा है। इस पर अभी बहुत ज्यादा अध्ययन की जरूरत है।












Click it and Unblock the Notifications