धरती पर अकेली बच गई है यह चिड़िया, इसके बाद प्रजाति खत्म, चिल्का झील है आखिरी बसेरा

भुवनेश्वर, 5 मई: व्हाइट ग्रे-हेडेड स्वैम्फेन पृथ्वी पर एक ही बच गई है और वह भी ओडिशा के सबसे विशाल झील में। अगर इस पक्षी को कुछ हो गया तो यह प्रजाति धरती से डायनासोर की तरह विलुप्त जाएगी। इसके बारे में एक शोध हुआ और वह एक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुआ है। यह चिड़िया अभी चिल्का झील के इलाके में है, जो देश के पूर्वी तट पर खारे पाने की विशाल झील है और अपनी सुंदरता के लिए देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है। लेकिन, सवाल व्हाइट ग्रे-हेडेड स्वैम्फेन का है, जिसे अब धरती पर दोबारा से देख पाने की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है।

धरती पर अकेली बच गई है यह चिड़िया

धरती पर अकेली बच गई है यह चिड़िया

पृथ्वी पर अब सिर्फ एक ही सफेद सलेटी-सिर वाला स्वैम्फेन (व्हाइट ग्रे-हेडेड स्वैम्फेन) पक्षी बच गया है। इस पक्षी का आखिरी बसेरा ओडिशा है, जिसके साथ ही पक्षियों की यह प्रजाति धरती से विलुप्त हो जाएगी। यह चिल्का झील के उत्तरी किनारे पर मंगलाजोड़ी वेटलैंड में है, जो कि इसका आखिरी बसेरा साबित होने वाला है। इसके बारे में प्रतिष्ठित 'विल्सन जर्नल ऑफ ओरिन्थोलॉजी' में शोध छपा है। 3 मई को प्रकाशित इस आर्टिकल का टाइटल है, 'फर्स्ट रिपोर्ट ऑफ डायल्युटेड प्लमेज इन ग्रे-हेडेड स्वैम्फेन (प्रोफिरियो पोलियोसेफलस) एंड ए रिव्यू ऑफ कलर एबरेशंस इन स्वैम्फेन'।

अद्वितीयता ही है इसकी पहचान

अद्वितीयता ही है इसकी पहचान

तीन-सदस्यीय रिसर्च टीम में शामिल खोर्धा के अवैतनिक वाइल्डलाइफ वार्डन सुभेंदू मलिक, श्री श्री यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर शक्ति नंदा और अंगुल के असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट आशुतोष मलिक ने इस विलुप्त हो रही चिड़िया की पहचान की है। आनुवांशिक रूप से कमजोर पड़ने की वजह से इस दुर्लभ चिड़िया का पंख लगभग पूरा सफेद हो चुका है। लेकिन, इसकी आंखें रंगीन हैं, जो कि स्वैम्फेन प्रजाति की सामान्य विशेषता है। इसकी सही पहचान करने में इतनी दिक्कतें थीं कि निष्कर्ष तक पहुचने में एक साल से ज्यादा का वक्त लग गया। लेकिन, शोधकर्ताओं ने पूरी लगन से शोध जारी रखा और तब जाकर उन्हें इसकी अद्वितीयता का पता चला। (पहली तस्वीर के अलावा, सभी सलेटी-सिर वाली स्वैम्फेन या बैंगनी स्वैम्फेन की)

मुर्गी के आकार की होती है बैंगनी स्वैम्फेन

मुर्गी के आकार की होती है बैंगनी स्वैम्फेन

दूसरी तरफ बड़ी दलदली इलाकों और झीलों से सटे ईख के खेतों में पाया जाने वाली सलेटी-सिर वाली स्वैम्फेन या बैंगनी स्वैम्फेन पूरे देश में पायी जाती है। मुर्गी के आकार वाला यह पक्षी बैंगनी-नीले रंग का होता है। इसकी बड़ी चोंच लाल रंग की होती है। यह चिड़िया सामान्य तौर पर 45 से 50 सेंटीमीटर तक की हो सकती है।

सफेद सलेटी-सिर वाला स्वैम्फेन शक्ति नंदा ने ली थी

सफेद सलेटी-सिर वाला स्वैम्फेन शक्ति नंदा ने ली थी

एक्सपर्ट का मानना है कि पंख के रंग में पतन का खेतों में अंदाजा लगा पाना बहुत ही मुश्किल काम था, जिसकी कई वजहें हैं। इसमें पक्षी से दूरी, उसका मूवमेंट, उचित प्रकाश की कमी। सुभेंदू के मुताबिक 'समीक्षकों के पास देखने और अन्य विवरणों को लेकर कई सवाल थे, जिन्हें हम सफलतापूर्वक बता पाने में सक्षम रहे।' सुभेंदू ने कहा कि उनका लेख ग्रे-हेडेड स्वैम्फेन में 'लगभग पूरी तरह से हल्का सफेद फंख' का यह पहला मामला है। इस चिड़िया की तस्वीर शक्ति नंदा ने ली थी, जिसे उन्होंने फेसबुक पर डाल दिया।

समूहों में पाई जीती है बैंगनी स्वैम्फेन

समूहों में पाई जीती है बैंगनी स्वैम्फेन

ईबर्ड डॉट ओआरजी के मुताबिक सलेटी-सिर वाली स्वैम्फेन या बैंगनी स्वैम्फेन एक बड़ी नीले-बैंगनी रंग की पानी में रहने वाली चिड़िया है। इसकी चोंच और माथा लाल होता है। इसके पैर भी लाल होते है। यह अपनी पूंछ को अक्सर झटकती है। यह तालाबों, झीलों में रहना पसंद करती है और अक्सर छोटे समूहों में पाई जाती है।

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