क्या चौथी बार नीतीश के हाथ आएगी सत्ता या तेजस्वी बिगाड़ेंगे खेल, जानें बिहार चुनाव से जुड़ी 10 अहम बातें
नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बीच बिहार में आज विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। वैसे राज्य में 243 सीटें हैं, लेकिन आज सिर्फ 71 सीटों पर ही वोटिंग हो रही है, बाकी दूसरे चरण का चुनाव 3 और तीसरे चरण का 7 नवंबर को होगा। वहीं 10 तारीख को रिजल्ट आएगा। इस बार सीएम नीतीश कुमार को सीधे टक्कर तेजस्वी यादव दे रहे हैं। तो वहीं एनडीए की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी ने बीजेपी-जेडीयू का साथ छोड़कर अकेले ही मोर्चा खोल दिया है। जिस वजह से वोट का समीकरण उलझ सा गया है। आइए जानते हैं बिहार चुनाव से जुड़े कुछ अहम तथ्य-

- कोरोना महामारी की वजह से बिहार चुनाव में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जिस वजह से एक बूथ पर मतदाताओं की संख्या 1600 की जगह 1000 तक ही रखी गई है। इसके अलावा नक्सल प्रभावित इलाकों को छोड़कर सभी जगहों पर एक घंटे वोटिंग का वक्त बढ़ाया गया है। वहीं जो बुजुर्ग हैं, उन्हें पोस्टल बैलट की सुविधा दी गई है। संक्रमण से बचाव के लिए मशीनों को साफ किया गया। साथ ही थर्मल स्कैनिंग और मास्क लगाने के बाद ही एंट्री मिल रही है। कोरोना पॉजिटिव मरीज भी बाद में वोट दे सकते हैं।
- वहीं इस चुनाव में जेडीयू और बीजेपी के बीच दूरी बढ़ती हुई दिख रही है। एक ओर सुशील मोदी और रविशंकर प्रसाद को छोड़कर किसी बड़े नेता ने जेडीयू प्रत्याशी का प्रचार नहीं किया, तो वहीं दूसरी ओर पोस्टर में भी दोनों पार्टियों ने अपने ही नेताओं का चेहरा लगाया है।
- पीएम मोदी अब तक बिहार में तीन रैलियां कर चुके हैं। उन्होंने ने भी सिर्फ एनडीए के लिए वोट मांगा। नीतीश और जेडीयू का जिक्र बहुत कम जगहों पर ही किया। हालांकि अमित शाह पहले ही साफ कर चुके हैं बिहार में सीटें चाहें ज्यादा हों या कम, जीत के बाद एनडीए नीतीश को ही कुर्सी पर बैठाएगी।
- वहीं तेजस्वी यादव की स्थिति में कभी अच्छा सुधार हुआ है। उनकी कई रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी। उन्होंने वादा किया है कि सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग में 10 लाख नौकरियों की घोषणा होगी। इसके अलावा वो रोजगार, महंगाई जैसे मुद्दे पर नीतीश कुमार को जमकर घेर रहे हैं।
- वहीं विपक्ष ने इस बार सत्ताधारी पार्टी जेडीयू की टेंशन बढ़ा दी है। जिस वजह से कई मौकों पर नीतीश कुमार अपना आपा खोते दिखे। एक बार जब उनकी सभा में लालू और तेजस्वी के लिए नारे लगे तो उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि वोट देना है तो दीजिए वरना चुप रहिए। वहीं दूसरी ओर आरजेडी के वादे की तरह उन्होंने 19 लाख नौकरियों का ऐलान किया है।
- खुद को पीएम मोदी का वफदार बताने वाले एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान बिहार में बागी हो गए। इसके बाद उन्होंने एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया। चिराग की इन दिनों बिहार में काफी चर्चा है। एक ओर वो बीजेपी का गुणगान कर रहे हैं, तो वहीं बिहार में उसी की सहयोगी पार्टी जेडीयू की जमकर आलोचना। वैसे बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन हैं लेकिन चिराग का दावा है कि वो बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे।
- बीजेपी अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का श्रेय ले रही है तो वहीं दूसरी ओर चिराग ने भी सीतामढ़ी में मां सीता का भव्य मंदिर बनवाने का वादा किया है। वैसे तो चिराग एक एक्टर के रूप में प्लाप रहे हैं, लेकिन पिता के जाने के बाद वो चुनाव को अच्छे से मैनेज करने में जुटे हैं।
- वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को जब एनडीए ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था, तो उसके बाद नीतीश की पार्टी जेडीयू एनडीए से अलग हो गई थी। इसके बाद महागठबंधन में शामिल होकर नीतीश ने सरकार बनाई। बाद में लालू यादव के जेल जाने के बाद नीतीश ने फिर से बीजेपी का साथ पकड़ लिया। अब देखने वाली बात ये होगी कि कौन सी पार्टी सत्ता के लिए किससे हाथ मिलाती है।
- वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी जेडीयू के साथ आ गई है। जिस वजह से मांझी का मुकाबल इमामगंज सीट पर आरजेडी उम्मीदवार उदय नारायण चौधरी है। वहीं दूसरी ओर निशानेबाज श्रेयसी सिंह को भी बीजेपी ने जमुई से टिकट दिया है। उनके और आरजेडी विधायक विजय प्रकाश के बीच कड़ी टक्कर है। श्रेयसी पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं।
- इस चुनाव में वीआईपी पार्टी ने महागठबंधन का साथ छोड़ दिया है। वीआईपी पार्टी के मुखिया ज्यादा सीटें और डिप्टी सीएम का पद चाहते थे। इसके बाद उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया। दलित वोटों को देखते हुए उन्हें 11 सीटें मिली हैं।












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