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सोशल मीडिया पर अब लोगों ने मोदी से पूछा कहां है मेडल?

लखनऊ। जी हां, रियो ओलंपिक में भारत की बद्तर स्थिति को देखते हुए लोगों ने सरकार, उसकी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। साथ ही भारत सरकार पर तंज कसने का एक अस्त्र खोज निकाला है। दरअसल वो अस्त्र है पीएम मोदी का एक वी़डियो, जिसमें पीएम मोदी तत्कालीन सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

Where is Olympic medal PM Narendra Modi asked People?

मेडल पर पीएम मोदी पर तंज

वे ये कहते नजर आ रहे हैं कि इतना बड़ा देश गोल्ड मेडल नहीं मिला। फलाना देश ये कर गया, क्या इस देश की शिक्षा व्यवस्था को इसके साथ जोड़कर रखा गया, क्या युवाओं को मौका दिया गया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने सुझाव भी दिया कि अगर सेना के जवानों को ही काम दिया जाए कि नये रिक्रूट किए गए जवानों की मैपिंग की जाए तो पांच-सात-दस तो हमारे सेना के जवान ही ला सकते हैं। सोच चाहिए सोच। फिर सबके सब हाथ पकड़कर बैठे रहना।

सबसे बड़ा दल पर झोली खाली

बीते कई महीनों मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा होती रही कि रियो ओलंपिक में हिस्सा लेने वाला भारतीय दल किसी भी दक्षिण एशियाई देश के मुक़ाबले में सबसे बड़ा है। इससे इस बात की संभावना बढ़ी थी कि भारतीय खिलाड़ी इस बार बेहतर प्रदर्शन करेंगे। लेकिन उम्मीद के इतर भारत के हाथ सिर्फ और सिर्फ निराशा लगी।

लोगों ने कहा

भोगेंद्र ठाकुर नाम की एफआईडी से कमेंट किया गया है कि अगली बार जुमलेबाजी में हम सारे पदक हासिल करेंगे। जबकि माया राजेश त्रिवेदी ने इस वीडियो में कमेंट किया है कि सोच की बात की थी न....तो बना तो दिए शौचालय। अब गोल्ड मेडल अगली बार।

खेल विश्लेषकों ने बताई मेडल न पाने की वजह

विश्लेषकों के मुताबिक भारत के हाथ लगने वाली निराशा की वजह सरकार द्वारा मुहैया कराई जा रहीं आधी-अधूरी सुविधाएं एवं पोषण के उपयुक्त स्तर की कमी है। गर भारत के लोग स्वस्थ होंगे और देश में बेहतर कोचिंग और ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी, तब खिलाड़ी भी पदक जीतना शुरू कर देंगे। हालांकि सभी जगह इसी तरह से स्थितियां नहीं हैं । या कहें क्रिकेट को छोड़कर सुविधाओं का स्तर बेहद दोयम किस्म का है। भारतीय क्रिकेट टीम को मीडिया के साथ सरकार भी तवज्जो देती है, विदेशी कोच ट्रेनिंग के लिए मुहैया कराती है। पर, अन्य खेलों के लिए इंतजाम वैसे नहीं हैं। भारत में पश्चिमी देशों जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं जो कि नाकामी का एक बड़ा कारण है।

निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर सवालों पर सवाल

खेलों में निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर सवालों पर सवाल किए जा रहे हैं। जो कि जायज भी हैं। लेकिन सवाल खिलाड़ियों से पहले व्यवस्थाओं के लिहाज से हैं। संस्कृति से हैं। क्योंकि गर हम प्रतिभागी होने के नाते कहें या फिर आम व्यक्ति होने के लिहाज से शारीरिक मेहनत नहीं करते हैं तो सुविधाओं का भी कोई फायदा नहीं है।

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