जब सुशांत सिंह राजपूत ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ी, तो उनके पापा ने क्या कहा था ?

मुंबई, 13 जून: बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की सोमवार को पहली पुण्यतिथि है। उनकी मौत का राज अबतक नहीं खुल पाया है और मामला अदालत और जांच सीबीआई के अधीन पड़ा हुआ है। कहते हैं कि बॉलीवुड में कदम रखने और फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त हो जाने के बावजूद सुशांत सिंह राजपूत की किताबों में दिलचस्पी कभी खत्म नहीं हुई थी। शूटिंग खत्म होने के बाद देर रात जहां मुंबइया फिल्मों के कलाकार रंगीन पार्टियों में वक्त गुजारते हैं, वहीं सुशांत अपने कमरे की छोटी सी लाइब्रेरी में मनपसंद किताबों में खो जाना पसंद करते थे। वह दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के ब्रिलियंट स्टूडेंट थे, लेकिन जब उनके सामने यह करियर बुलंदियों पर ले जाने के लिए हाथ फैलाए खड़ा था, तब उन्होंने अचानक से ऐक्टिंग की दुनिया में अपना हुनर आजमाने का फैसला कर लिया। सुशांत सिंह राजपूत बिहार के जिस बैकग्राउंड से आते थे, उसमें इंजीनियरिंग की पढ़ाई का क्या मायने है, कोई मुंबइया हीरो शायद ही कभी समझ पाएगा। इसलिए उनके लिए यह फैसला लेना आसान नहीं था, उन्हें अपना पिता और परिवार के बाकी सदस्यों का सामना करना था।

'पढ़ाई छोड़ने का फैसला घर में बम फोड़ने से कम नहीं था'

'पढ़ाई छोड़ने का फैसला घर में बम फोड़ने से कम नहीं था'

सुशांत सिंह राजपूत कितने बेहतर ऐक्टर थे, इसकी गवाही उनकी फिल्में देती हैं। लेकिन, उनके लिए यह इसलिए और भी बड़ी बात थी कि वो एक होनहार स्टूडेंट थे और उनमें इस क्षेत्र के लिए गजब की रचनात्मकता भी थी। यह बात तो सब जानते हैं कि वो प्रतिष्ठित दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्र थे, जो अब दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के नाम से जानी जाती है। लेकिन, सुशांत सिंह राजपूत ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधूरी छोड़कर अपने जीवन का सबसे बड़ा फैसला लिया। वो अपने कई इंटरव्यू में कह चुके थे कि इसकी वजह यही थी कि वह अभिनेता बनना चाहते थे। लेकिन, 2017 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब उन्होंने पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया तो उनके परिवार वालों खासकर उनके पापा की प्रतिक्रिया क्या थी ? उन्होंने कहा कि उनके लिए यह अपने परिवार पर बम गिराने से कम नहीं था।

'मैं एक अंतरिक्ष यात्री बनना चाहता था'

'मैं एक अंतरिक्ष यात्री बनना चाहता था'

उसी इंटरव्यू में सुशांत ने यह बताया था कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में इतने मेधावी में होते हुए भी ऐसा फैसला क्यों किया। वो बोले, 'फिजिक्स में नेशनल ओलंपियाड जीता और दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया', लेकिन यह फील्ड उनकी पसंद का नहीं था। उनका कहना था, 'इंजीनियरिंग मेरी पसंदी नहीं थी। मैं एक अंतरिक्ष यात्री बनना चाहता था, और फिर बाद में एयरफोर्स का पायलट। मुझे याद है कि जब मेरे माता-पिता ने मुझसे कहा था कि ऐसा नहीं होने वाला है, तो मैंने अपना टॉप गन पोस्टर फाड़ दिया था। जाहिर है, मैं एक इंजीनियर बनने जा रहा था। हो सकता है कि उस दिन मैंने जो ड्रामा किया था, उससे सभी को पता चल गया हो!...... '

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    स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी का ऑफर ठुकरा वर्सोवा पहुंच गए

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    सुशांत कितने ऊंचे दर्जे के इंजीनियरिंग स्टूडेंट थे इसका अंदाजा इसी से लगता है कि उन्हें स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप का भी ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने तो तय कर लिया था कि करनी तो ऐक्टिंग ही है। अपने फैसले के बारे में उन्होंने और खुलकर बताया, 'स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी जाने की बजाए, जहां से मुझे स्कॉरशिप का ऑफर मिला था, मैंने कॉलेज छोड़ दिया और वर्सोवा (मुंबई का एक इलाका) पहुंच गया, जहां 1 आरके (एक रूम किचन) में 6 और लोगों के साथ मिलकर रहा।'

    'बेटा, डिग्री ले लेता...'

    'बेटा, डिग्री ले लेता...'

    उन्होंने अपने फैसले पर परिवार वालों, खासकर पिता की प्रतिक्रिया के बारे में भी बताया था। उन्होंने कहा था, '2006 की बात है, कॉलेज में मेरा फाइनल ईयर था, जब मैंने अपने घर में यह बम फोड़ा था। वो तो चौंक गए थे! इतने चौंक गए थे कि वे कुछ बोल ही नहीं पा रहे थे और मैंने उनकी चुप्पी को उनकी मंजूरी मान ली.....उस समय यह बहुत मुश्किल था, लेकिन अब अलग है। मेरे डैड को यह अच्छा लगता है जब ठहलने के दौरान लोग उनसे मिलते हैं, मेरी कोई नई क्लिपिंग दिखाते हैं.....सही में उन्हें मुझपर गर्व होता है। लेकिन, आज भी, हमारी लगभग हर बातचीत के आखिर में वो यही कहते हैं- 'बेटा, डिग्री ले लेता...'।

    कॉलेज से मिली थी मानद डिग्री

    कॉलेज से मिली थी मानद डिग्री

    सुशांत ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी, लेकिन 2015 में उनके कॉलेज ने उन्हें मानद उपाधि दी। उस वक्त उन्होंने एक बयान में कहा था, 'मैं इस इंविटेशन से हैरान हूं। एक मेधावी छात्र होने के बावजूद, मैंने अपने सपने-'बॉलीवुड' को पूरा करने के लिए अपने तीसरे वर्ष में इंजीनियरिंग छोड़ दी। यह वास्तव में बहुत ही भावनात्मक है कि मेरा इंजीनियरिंग कॉलेज मुझे उसकी 75वीं वर्षगांठ पर मानद उपाधि देना चाहता है। '

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