सूर्य जब 'सोया' रहता है तो क्या होता है ? भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा दुर्लभ रहस्य
कोलकाता, 3 अक्टूबर: सूरज इस साल की शुरुआत से बहुत ही ज्यादा सक्रिय रहा है। अभी भी सूर्य देवता अपनी पूरी गति में हैं। उसकी सक्रियता ने बड़ी संख्या में दुनिया की सबसे अमीर शख्सियत एलन मस्क के अत्याधुनिक सैटेलाइट को भी भस्म कर दिया है। लेकिन, अरबों साल के इतिहास में सूरज हमेशा इतना ही उग्र नहीं रहा है। ऐसे भी समय गुजरते हैं, जब धरती से यह तारा बिल्कुल ही शांत या सोया हुआ नजर आता है। अब तक यही मालूम था कि इस सुषुप्तावस्था में सूरज बिल्कुल ही निढाल होता है। लेकिन, अब वैज्ञानिकों ने 10 हजार साल के रिकॉर्ड के आधार पर पाया है कि ऐसा नहीं होता। बड़ी बात ये है कि यह सफलता भारतीय शोधकर्ताओं को ही मिली है।

सूर्य सुषुप्तावस्था में भी दिखता है
सूरज इस साल अबतक शुरू से बहुत ही ज्यादा ऐक्टिव रहा है। यह अपने सौर चक्र के चरम पर पहुंच चुका है। सिर्फ पिछले हफ्ते की ही बात करें तो इसकी वजह से तीन सोलर फ्लेयर, 18 कोरोनल मास इजेक्शन और 1 भूचुंबकीय तूफान की स्थिति पैदा हुई है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि सूरज हमेशा इतना ही सक्रिय दिखाई पड़ेगा। कई बार ऐसा होता है कि सूरज पूरी तरह से शांत नजर आता है। इतना शांत जैसे लगता है कि हमारे सौर मंडल का यह प्रमुख तारा सो रहा हो। कोलकाता स्थित 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च' के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज' के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि जब सूर्य की यह गतिविधियां पूरी तरह थम जाती हैं तो क्या होता है। कैसे फिर से इसफर बड़े-बड़े विस्फोटों की स्थिति बनती है और कैसे यह अपने खतरनाक सौर भड़काव से सौर मंडल के दूसरे ग्रहों को संकट में भी डालना शुरू कर देता है।
Recommended Video

सूरज कब सोता है ?
सूर्य पर कई बार ऐसा होता है कि इसकी गतिविधियां पूरी तरह से शांत पड़ जाती हैं और कोई सनस्पॉट नजर नहीं आता। इस अवधि को ग्रैंड मिनिमम कहते हैं। इसकी पहचान ऐसे होती है कि इस समय सोलर रेडिएशन और पर्टिक्युलेट आउटपुट बहुत ही कम हो जाता है। शोधकर्ताओं ने जानकारी जुटाई है कि साल 1645 से 1715 के दौरान ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब सनस्पॉट बहुत ही कम रह गए थे। सूर्य की उम्र 4.6 अरब साल की है और उसके बीच में ऐसे पड़ाव आते रहते हैं। वैसे तो सूर्य पर जो कुछ भी होता रहता है, वैज्ञानिकों को उसकी जानकारी मिलती रहती है। लेकिन, जब यह स्थिर अवस्था में होता है तो इसके ध्रुवीय और आंतरिक क्षेत्रों की बहुत कम जानकारी मिल पाती है। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में बड़े पैमाने पर सूर्य का चुंबकीय चक्र रुक जाता है। लेकिन, अब भारतीय वैज्ञानिकों ने पाया है कि ऐसा नहीं है कि इस समय सूर्य पर सारी गतिविधियां पूरी तरह से बंद हो जाती हैं।

सूर्य जब सोया रहता है तो क्या होता है ?
आईआईएसईआर के पीएचडी के शोधार्थी चित्रदीप साहा ने संगीता चंद्रा और प्रोफेसर दिब्येंदु नंदी के साथ जो रिसर्च किया है, उसमें पाया है कि शांत काल में भी सूर्य के अंदरूनी चुंबकीय क्षेत्र में काफी व्यस्तता बनी रहती है। अलबत्ता कंवेक्शन जोन में चुंबकीय गतिविधि कमजोर चक्र के रूप में होती है, जिससे सनस्पॉट नहीं बन पाता। यह शोध रॉयल ऐस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसके नतीजे में बताया गया है कि जब सूर्य गहरी नींद में होता है, तब भी इसके ध्रुवीय और आंतरिक भाग में मंथन जारी रहता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि सूरज का आंतरिक डायनेमो मेकेनिज्म शांत अवस्था में भी अपने कठिन काम में जुटा रहता है।

10,000 साल लंबे कंप्युटर सिम्युलेशन पर आधारित शोध
इस रिसर्च पेपर के लीड ऑथर चित्रदीप साहा ने इंडिया टुडे डॉट इन से कहा है कि उनका शोध 10,000 साल लंबे कंप्युटर सिम्युलेशन पर आधारित है। जिससे पता चलता है कि ग्रैंड सोलर मिनिमम की लंबी अवधि में इसके सतह पर सौर विस्फोट की संख्या काफी कम रहती है। लेकिन, कंवेक्शन जोन में प्लाज्मा की गति की निरंतरता और अशांत उतार-चढ़ाव की वजह से सूरज को अपने सामान्य चुंबकीय गतिविधि को फिर से शुरू करने में मदद मिलती है।

भविष्य के सौर मिशन के लिए अहम शोध
यह शोध सूर्य के भविष्य के मिशन पर काम करने के लिए प्रेरित करेगा, जिसका फोकस उसके आंतरिक हिस्से और ध्रुवीय हिस्से पर होगा, जो कि खगोलविदों के लिए अभी भी रहस्य बना हुआ है। इस समय नासा का पार्कर सोलर प्रोब और यूरोप का सोलर ऑर्बिटर इसके नजदीक जा रहा है, ताकि इसके बारे में और बेहतर समझ बनाई जा सके। भारत भी आदित्य एल-1 मिशन को लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहा है, जिससे सूर्य को अधिक विस्तार से समझने में मदद मिलेगी।












Click it and Unblock the Notifications