Mumbai Monsoon 2020 date: जानिए मानसून कब पहुंच रहा है मुंबई, कोरोना संकट के बीच बढ़ाएगा मुश्किल
मुंबई। दक्षिण पश्चिम मानसून भारत के केरल में 1 जून को पहुंच चुका है,मानसून के असर के चलते केरल समेत देश के कई राज्यों में बारिश की सिलसिला जारी है, भारतीय मौसम विभाग IMD ने कहा है कि इस बार मानसून की बारिश अच्छी होगी, जो कि किसानों के लिए बढ़िया खबर है तो वहीं दूसरी तरफ देश के कई राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली-एनसीआर के अलावा अन्य राज्यों में भी प्री-मानसून एक्टिविटीज शुरू हो गई हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि मानसून एक्सप्रेस आपके राज्य में कब पहुंचेगी, तो इसक जवाब भी आईएमडी ने अब दे दिया है।

11 जून को मुंबई पहुंचेगा मानसून
विभाग के मुताबिक अगर मानसून एक्सप्रेस इसी रफ्तार से आगे बढ़ी तो ये 11 जून के आस-पास मुंबई और कोंकण पहुंचेगा और इस दौरान मुंबई में भारी बारिश देखने को मिलेगा, कोरोना संकट से पहले से ही जूझ रहे मुंबई के लिए भारी बारिश मुश्किल का सबब बन सकती है।

इन राज्यों में इस तारीख को पहुंचेगी मानसून एक्सप्रेस
जबकि मानसून बिहार में 15 से 20 जून के बीच, झारखंड में तो यह 15 जून तक और राजधानी दिल्ली में 20 जून तक पहुंचेगा और महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश में भी इसी दौरान मानसून आ सकता है तो वहीं स्काईमेट के मुताबिक दिल्ली में मानसून 20 जून के आस-पास पहुंचेगा और इस बार सामान्य से अधिक बारिश होगी।

अगले कुछ घंटों में यहां होगी तेज बारिश
भारतीय मौसम विभाग ने अगले तीन घंटों के अंदर उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में आज तेज हवा के साथ बारिश होने की आशंका व्यक्त की है। आईएमडी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर, मिर्जापुर, वाराणसी, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, ललितपुर, झांसी, महोबा, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गौतम बौद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, बिजनौर, अलीगढ़, मथुरा, संभल, बदायूं, हाथरस, मुरादाबाद, कानपुर जिले और आसपास के क्षेत्र में अगले तीन घंटों के अंदर आंधी-पानी आ सकता है, तो वहीं हरियाणा के करनाल, सोनीपत, पानीपत, केरल के तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पठानमथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, मलप्पुरम और कन्नूर में भारी बारिश की आशंका है।

जानिए आखिर 'मानसून' कहते किसे हैं?
मानसून मूलतः हिंद महासागर एवं अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली हवाओं को कहते हैं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी वर्षा करातीं हैं। ये ऐसी मौसमी पवन होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक, प्रायः चार माह सक्रिय रहती है। इस शब्द का प्रथम प्रयोग ब्रिटिश भारत में (वर्तमान भारत, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश) एवं पड़ोसी देशों के संदर्भ में किया गया था। ये बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाली बड़ी मौसमी हवाओं के लिये प्रयोग हुआ था, जो दक्षिण-पश्चिम से चलकर इस क्षेत्र में भारी वर्षाएं लाती थीं। हाइड्रोलोजी में मानसून का व्यापक अर्थ है- कोई भी ऐसी पवन जो किसी क्षेत्र में किसी ऋतु-विशेष में ही अधिकांश वर्षा कराती है।












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