जब शीला दीक्षित को छूकर निकल गई थी मौत, टाइम बम से उड़े थे कार के परखच्चे

नई दिल्‍ली। देश में सबसे अधिक समय तक महिला मुख्‍यमंत्री रहने वालीं और कांग्रेस की दिग्‍गज नेता शीला दीक्षित का शनिवार को निधन हो गया। वह 81 बरस की थीं। शीला दीक्षित लंबे समय से बीमार चल रही थीं और एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में आखिरी सांसें लीं। रविवार को निगमबोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। वह अभी दिल्ली कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष थीं। शीला दीक्षित की मृत्यु के बाद कई राजनेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ ने उनके साथ काम करने का अनुभव साझा किया है तो कुछ ने उनके विजन की तारीफ। इसी बीच बाटला (गुरदासपुर) कांग्रेस के पूर्व मंत्री और शीला दीक्षित के करीबी माने जाने वाले अश्वनी सेखड़ी ने उनकी कुछ यादें साझा कीं। जानिए उन्‍होंने क्‍या बताया

1985 में बम बलास्ट में बाल-बाल बच गई थीं शीला दीक्षित

1985 में बम बलास्ट में बाल-बाल बच गई थीं शीला दीक्षित

एक अखबार से खास बातचीत में अश्वनी सेखड़ी ने शीला दीक्षित के लिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा 1985 के लोकसभा चुनाव में शीला दीक्षित कांग्रेस की रैली संबोधित करने के लिए बटाला पहुंची थीं। रैली बटाला के लीक वाला तालाब मैदान में थी। रैली के बाद बटाला के जीटी रोड पर स्थित पैरामाउंट होटल में नेताओं के खाने का प्रबंध किया गया था। सेखड़ी ने बताया कि शीला दीक्षित की कार होटल के बाहर पहुंची और वह कार से निकल कर होटल चली गईं। इसी दौरान उनकी खड़ी कार में बम ब्लास्ट हो गया। कार पूरी तरह जलकर राख हो गई। इसका जिक्र शीला दीक्षित ने अपनी किताब सिटिजन दिल्ली, माय टाइम्स माय लाइफ में भी किया था।

बम ब्‍लास्‍ट के पीछे खालिस्तान कमांडो फोर्स का हाथ था

बम ब्‍लास्‍ट के पीछे खालिस्तान कमांडो फोर्स का हाथ था

मामले की जांच में सामने आया कि इस बम ब्लास्ट के पीछे खालिस्तान कमांडो फोर्स का हाथ सामने आया था। इस दौरान आसपास ठेले और रेहडिय़ों पर खड़े तीन-चार बच्चे भी घायल हो गए, जिनमें से कुछ की बाद में मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम शीला दीक्षित एक दिलेर व मेहनती नेता थीं।

पंजाब से था शीला दीक्षित का खास नाता

पंजाब से था शीला दीक्षित का खास नाता

तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित का कपूरथला (पंजाब) से बेहद करीबी रिश्ता था। शीला दीक्षित का बचपन कपूरथला में बीता था। शहर के सिविल अस्पताल के सामने परमजीत गंज स्थित ननिहाल में उनका जन्म हुआ। शीला तीन बहनों में सबसे बड़ी थीं। उनकी प्राथमिक शिक्षा कपूरथला स्थित हिंदू पुत्री पाठशाला में हुई। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी शीला कपूरथला आती रहती थीं।

कभी किसी से शीली ने नहीं की ऊंची आवाज में बात

कभी किसी से शीली ने नहीं की ऊंची आवाज में बात

पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह ने शीला दीक्षित के काम के तरीकों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं की। उन्होंने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रहते शीला दीक्षित पर कभी भी कोई आरोप नहीं लगे और उन्होंने एक विजन के साथ दिल्ली का विकास किया। शीला दीक्षित से अपनी दोस्ती को याद करते हुए नटवर सिंह ने कहा कि जब वह कठिन समय से गुजर रहे थे तो शीला दीक्षित ने उनका साथ दिया।

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