रामनाथ कोविंद: जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले उस खास बंगले में घुसने नहीं दिया गया
नई दिल्ली। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का आज 75वां जन्मदिन है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देशभर के नेताओं ने उन्हें बधाई दी है। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1945 को हुआ था। जुलाई, साल 2017 में महामहिम की कमान संभालने वाले राष्ट्रपति कोविंद का आज भी पैतृक निवास कानपुर के कल्याणपुर में स्थित है। वह बेहद साधारण परिवार से हैं। जब वह देश के राष्ट्रपति पद के लिए नियुक्त किए गए थे, तब बिहार के राज्यपाल थे। एक बार ऐसा भी हुआ था जब उन्हें हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थित एक खास बंगले में प्रवेश तक करने नहीं दिया गया था।
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दोस्त आचार्य देवव्रत के आवास में ठहरे थे
हिमाचल प्रदेश के शिमला में भारत के राष्ट्रपति का आवास रिट्रीट है। जब कोविंद यहां गए तो सुरक्षाकर्मी ने उनसे कहा था कि उनके पास राष्ट्रपति के दफ्तर से अपेक्षित अनुमति नहीं है। बात उनके राष्ट्रपति बनने से पहले की है। वह 30 मई, 2017 को अपनी शादी की सालगिराह वाले दिन इस रिट्रीट में परिवार सहित गए थे, जहां से उन्हें वापस लौटना पड़ा था। दरअसल रामनाथ कोविंद अपने परिवार के साथ 29 मई को शिमला पहुंचे थे और यहां हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के सरकारी आवास राजभवन में ठहरे थे। दोनों ही अच्छे दोस्त हैं और एक ही दिन राज्यपाल भी नियुक्त किए गए थे। 29 मई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दोस्त देवव्रत की शादी की सालगिराह थी और वह तोहफे के तौर पर आम के छह बक्से लेकर गए थे।

शिमला घूमना चाहते थे कोविंद
इसके अगले दिन यानी 30 मई को कोविंद की शादी की सालगिराह थी और वह परिवार के साथ शिमला घूमना चाहता थे। हालांकि उन्हें इस बात की ज्यादा जानकारी नहीं थी कि यहां घूमने के लिए अच्छी जगहें कौन सी हैं। ऐसे में राज्यपाल देवव्रत के सलाहकार प्रोफेसर शशिकांत शर्मा ने उन्हें घूमने की कुछ जगहों के बारे में बताया। जिनमें रिजर्व फॉरेस्ट और रिट्रीट का नाम शामिल था। जब राष्ट्रपति शिमला रिट्रीट गए तो उन्हें वहां से वापस लौटना पड़ा था क्योंकि उनके पास वहां जाने की पूर्व अनुमति नहीं थी।

राष्ट्रपति बनने से पहले नहीं मिली थी एंट्री
इसपर शशिकांत शर्मा ने कहा था कि उन्होंने कोविंद को सैग वन क्षेत्र जाने के लिए कहा था। शर्मा कहते हैं कि मुझे लगा कि उनके पास रिट्रीट जाने का वक्त नहीं होगा लेकिन जब बाद में वो वहां गए तो उन्हें गेट से ही लौटना पड़ा। ये रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए नियुक्त किए जाने से करीब तीन हफ्ते पहले ही बात है। उस समय इस मामले में शर्मा ने कहा था कि सुरक्षाकर्मियों को इस बात का पता नहीं था कि जिस व्यक्ति को उन्होंने प्रवेश करने से रोका था, उनके खुद भारत के राष्ट्रपति के तौर पर उसी रिट्रीट में लौटने की संभावना है। बाद में रामनाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति पद के लिए चुने भी गए।

1850 में बनाया गया था रिट्रीट
आपको बता दें ये रिट्रीट मशोब्रा में पहाड़ी स्थल पर स्थित है और इसे साल 1850 में बनाया गया था। जिसके बाद साल 1895 में इसपर ब्रिटिश वायसराय ने कब्जा कर लिया था। राष्ट्रपति साल में कम से कम एक बार रिट्रीट का दौरा करते हैं और इस दौरान पूरा कार्यालय यहां शिफ्ट भी होता है। रिट्रीट को लेकर ये किस्सा आज भी खूब याद किया जाता है।












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