बंगले का किराया भरने लायक नहीं थीं प्रियंका गांधी, वाजपेई को लिखी थी चिट्ठी!

नई दिल्‍ली। सुनने में आपको थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन यह सच है कि एक समय ऐसा था कि जब प्रियंका गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को चिट्ठी लिखकर अपने घर का किराया कम करने का अनुरोध किया था।

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एक आरटीआई में इस बात का खुलासा हुआ है कि वर्ष 2002 में यानी से आजे 14 वर्ष पहले प्रियंका गांधी अपने बंगले का किराया जो कि 53,000 था, उसे अपनी हैसियत के मुताबिक नहीं बताया था।

क्या कहा था प्रियंका ने

इंग्लिश डेली टाइम्‍स ऑफ इंडिया के मुताबिक नोएडा के देव आशीष भट्टाचार्य ने यह आरटीआई दायर की थी। इस आरटीआई में आठ जुलाई 2003 के कैबिनेट कमेटी नोट का हवाला दिया गया है। प्रियंका की चिट्ठी के बाद उनके घर का किराया घटा दिया गया था।

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फिलहाल प्रियंका दिल्‍ली के लोधी एस्‍टेट स्थित टाइप VI में रह रही हैं। लुटियंस दिल्‍ली में स्थित यह एक सरकारी घर है और इसका किराया वर्तमान समय में वह 31,300 रुपए अदा कर रही हैं।

प्रियंका गांधी ने सात मई 2002 में वाजपेई सरकार को चिट्ठी लिखी थी कि 53,421 रुपए किराए की जो रकम तय की गई है, वह काफी ज्‍यादा है। वह इतना किराया नहीं अदा कर सकती है।

प्रियंका ने किया अनुरोध

प्रियंका ने सरकार को बताया कि बंगला एसपीजी के कहने पर लिया है और बंगले के एक बड़े का हिस्‍सा एसपीजी ही कर रही है।

प्रियंका ने तब सरकार ने अनुरोध किया कि वह पुरानी दर पर किराए को अदा कर सकती हैं जो कि 28,451 रुपए है। प्रियंका की ही तरह बाकी लोगों ने भी यही मांग की थी।

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31 जनवरी 2004 तक प्रियंका पर किराए के 3.76 लाख रुपए बकाया हो गए थे। प्रियंका की चिट्ठी के बाद 24 जुलाई 2003 से स्पेशल लाइसेंस फी संशोधित कर 8888 कर दी और बाकी लोगों के लिए भी किराया कम कर दिया गया।

अटल बिहारी वाजपेई की एनडीए सरकार ने प्रियंका के परिवार को तीन और लोगों पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल, ऑल इंडिया टेररिस्‍ट फ्रंड के प्रमुख एमएस बिट्टा और न्‍यूजपेपर पंजाब केसरी के एडीटर रहे अश्विनी कुमार को वीआईपी इलाके में घर दिए थे।

अभी तक पहले जैसा है किराया

वर्तमान में जहां अश्विनी अपना बंगला छोड़कर जा चुके हैं तो वहीं प्रियंका, गिल और बिट्टा 31,300 रुपए के मासिक किराए पर घरों में रह रहे हैं।

कैबिनेट कमेटी ने इन चारों को प्राइवेट सिटीजंस माना था और कहा था कि सुरक्षा कारणों की वजह से इन्‍हें घर दिए गए थे। क‍मेटी के मुताबिक घर देने में सारे नियमों का पालन किया गया था।

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