Birthday Special: जब ’एक्सीडेंटली’ प्राइम मिनिस्टर बने मनमोहन सिंह
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज यानी 26 सितंबर को अपना 91वां जन्मदिन मना रहे हैं। 1932 में जन्मे मनमोहन सिंह भारत के 13वें प्रधान मंत्री थे। उन्होंने 2004-2014 तक बतौर प्रधानमंत्री का किया। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद अगर लंबे समय तक कोई देश का प्रधानमंत्री रहे है, वो मनमोहन सिंह ही थे।
एक अर्थशास्त्री होने के अलावा उन्होंने 1982-1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में भी कार्य किया। आज उनके जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई अन्य नेताओं ने पूर्व पीएम को शुभकामनाएं दी।

साल 2004 से 2014 तक मनमोहन सिंह ने बतौर प्रधानमंत्री कार्यकाल संभाला। प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ 1970-1980 के दशक के दौरान उन्होंने भारत सरकार में कई अहम पदों पर काम किया। वे मुख्य आर्थिक सलाहकार, रिजर्व बैंक के गर्वनर और योजना आयोग के प्रमुख के तौर पर भी कार्यरत रहे। मनमोहन सिंह ने बतौर वित्त मंत्री भी काम किया है। वर्तमान में वे राजस्थान से राज्यसभा के सदस्य भी हैं।
विदेशी मूल के विवाद के चलते कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पीएम बनने से इंकार कर दिया था और ये पद मनमोहन सिंह को सौंप दिया गया था। वे इस पद पर 22 मई 2004 से 26 मई 2014 तक रहे। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार नहीं थे बल्कि एक्सीडेंटल पीएम थे। उन्हें संयोग से ये पद मिल गया था। हालांकि, मनमोहन सिंह ही नहीं देश के कई ऐसे पीएम रहे हैं जिनका अचानक ही नाम आगे आ गया था।
1991 में नरसिम्हा राव की राजनीतिक पारी का अंत हो गया था। विनय सीतापति अपनी किताब हाफ लायन हाऊ पीवी नरसिम्हा राव ट्रांसफॉर्म्ड इंडिया में लिखते हैं कि नरसिम्हा राव इस हद तक रिटायरमेंट मोड में चले गए थे कि उन्होंने दिल्ली के मशहूर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की सदस्यता के लिए आवेदन कर दिया था ताकि अगर भविष्य में वो कभी कुछ दिन के लिए दिल्ली आएं तो उन्हें रहने की दिक्कत ना हो।
लेकिन अचानक चीजें उस वक्त पलट गईं जब 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या हो गई। इस घटना के कुछ घंटों के ही अंदर बीबीसी के परवेज आलम ने उनसे नागपुर में संपर्क किया तो उनकी बातचीत से उन्हें जरा सा भी अंदाजा नहीं लगा कि वे भारत के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं।
राजीव गांधी की बत्या के बाद नटवर सिंह ने बीबीसी को बताया कि सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी के पूर्व प्रधान सचिव पीएन हक्सर को 10 जनपथ तलब किया। सवाल उठने लगे कि कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए कौन शख्स सबसे उपयुक्त हो सकता है। ऐसे में सबने उपराष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा का नाम लिया।
इसके बाद हक्सर ने ही नरसिम्हा राव का नाम आगे बढ़ाया। इसके बाद नरसिम्हा राव ने शपथ ग्रहण समारोह से तीन घंटे पहले मनमोहन सिंह के पास विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दफ्तर में मनमोहन सिंह से कहा कि मैं आपको वित्त मंत्री बनाना चाहता हूं। उन्होंने सिंह से कहा कि अगर सफलता मिलेगी तो इसका श्रेय हम दोनों को मिलेगा लेकिन अगर असफलता हाथ लगती है तो आपको जाना होगा।












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