दुष्यंत कुमार ने जब अमिताभ बच्चन के बारे में की थी भविष्यवाणी

अमिताभ बच्चन
Reuters
अमिताभ बच्चन

30 दिसंबर हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि है. हिंदी में लिखी ग़ज़लों से अपनी एक अलग पहचान क़ायम करने वाले दुष्यंत कुमार ने 1975 में आज ही के दिन भोपाल में दुनिया को अलविदा कहा था.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में उनकी लिखी पांडुलिपियों का एक संग्रहालय है. दुष्यंत कुमार की पत्नी राजेश्वरी त्यागी ने वर्ष 2013 में इस संग्रहालय को एक ख़ास चिट्ठी सौंपी थी.

सत्तर के दशक में दुष्यंत कुमार ने अमिताभ बच्चन के नाम एक ख़त लिखा था, तब अमिताभ एक उभरते हुए अभिनेता थे जो कामयाबी की ऊँचाइयों पर जा रहे थे.

मगर उस वक्त दुष्यंत कुमार कहाँ जानते थे कि उनका 'प्रिय अमित' एक दिन महानायक कहलाएगा.

दुष्यंत कुमार ने अमिताभ को ये ख़त फिल्म 'दीवार' देखने के बाद लिखा था जिसमें उन्होंने बच्चन के अभिनय की तारीफ़ों के पुल बांधे थे.

ख़त में दुष्यंत ने लिखा कि दीवार में अमिताभ का 'अभिनय इतना अच्छा था कि ऐसा लगा ही नहीं कि वो एक्टिंग कर रहे हैं'. साथ ही लिखा कि अमिताभ ने 'अपना रोल इतने आत्म विश्वास के साथ निभाया है कि वो सिर्फ़ और सिर्फ़ तारीफ़ के काबिल है'.

यही नहीं दुष्यंत ने अपने पत्र में शशि कपूर का ज़िक़्र करते हुए लिखा कि उनके जैसा सितारा भी फ़िल्म में अमिताभ के आगे छोटा लग रहा था.

दुष्यंत कुमार
BBC
दुष्यंत कुमार

'हरिवंश का बेटा'

चिट्ठी में दुष्यंत कुमार ने अमिताभ से अपने इलाहाबाद के दिनों का भी ज़िक्र किया जब वो हिंदी के महान कवि और अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन के घर भी जाया करते थे.

उन्होंने लिखा है कि वैसे तो वो बच्चन परिवार के दिल्ली निवास पर भी कई बार गए, लेकिन उन्हें नहीं पता था 'हरिवंश का बेटा' इस मुक़ाम पर पहुंच जाएगा कि वो उसे एक ख़त लिखना चाहेंगे.

संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने 2013 में बीबीसी को बताया था कि ये पत्र दुष्यंत कुमार ने अपने हाथ से लिखा था जिसकी टाइप्ड प्रति अमिताभ बच्चन को भेजी गई थी.

राजुरकर ने ये भी बताया कि हरिवंश राय बच्चन के हाथ से लिखे तक़रीबन 50 पत्र भी संग्रहालय में हैं जिसे देखने के लिए एक बार जया बच्चन बग़ैर किसी पूर्व सूचना के संग्रहालय पहुंच गई थीं.

चिट्ठी में ये भी लिखा है कि जया बच्चन जब भोपाल में थीं तो वो बहुत छोटी थीं. उन्होंने लिखा है कि वो तब ऑल इंडिया रेडियो में काम करते थे और अक़्सर जया बच्चन के घर जाया करते थे.

हरिवंश राय बच्चन और दुष्यंत कुमार समकालीन कवि के साथ-साथ अच्छे मित्र भी थे.

(बीबीसी हिन्दी पर ये लेख सबसे पहले 5 मार्च 2013 को प्रकाशित हुआ था)

https://www.youtube.com/watch?v=Uz9pCDOeQq8

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