Veer Savarkar: जब चरण सिंह ने सावरकर की जयंती मनाने से किया था इनकार, कही थी ये बात
वीर सावरकर की जयंती को लेकर विवाद चल रहा है। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह ने भी वीर सावरकर की जयंती को मनाने से इनकार कर दिया था। लेकिन इसकी वजह उन्होंने बिल्कुल अलग बताई थी।

Veer Savarkar: संसद की नई बिल्डिंग का रविवार को उद्घाटन हो गया। अहम बात यह है कि 28 मई को संसद की नई बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ और इसी दिन वीर सावरकर की जयंती भी मनाई जाती है। तमाम विपक्षी दलों ने संसद की नई बिल्डिंग के उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार किया। वहीं पीएम मोदी ने संसद की नई बिल्डिंग में वीर सावरकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट करके लिखा, आज का दिन 28 मई, पंडित नेहरू ने भारत में संसदीय लोकतंत्र पोषित करने में सबसे ज्यादा भूमिका निभाई, उनका 1964 में निधन हो गया था। सावरकर जिनकी विचारधारा के चलते महात्मा गांधी की हत्या हुई।
गौर करने वाली बात है कि पंडित नेहरू का पुण्यतिथि और सावरकर की जयंती एक ही दिन होती है। जिस तरह से कांग्रेस वीर सावरकर को लेकर लगातार विरोध करती है उसकी वजह से सत्ता और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिलता है।
वीर सावरकर की जयंती को मनाए जाने को लेकर विवाद की चर्चा करें तो जब चौधरी चरण सिंह दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उसी वर्ष 27 मई को भारतीय जनसंघ के नेता कृष्ण स्वरूप ने सदन में पूछा था कि क्या सरकार सावरकर की जयंती मनाने की योजना बना रही है, क्या इसके लिए कोई कमेटी बनेगी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उस वक्त के मंत्री गेंदा सिंह ने कहा था कि इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है। बावजूद इसके जब स्वरूप लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे तो चरण सिंह ने कहा मुझे जनसंघ के नेता की ओर से पहले भी इस तरह की अपील प्राप्त हुई है, जिसके बारे में पहले ही जवाब दिया जा चुका है।
चौधरी चरण सिंह ने पत्र के जवाब में लिखा था कि यह अच्छा सुझाव है लेकिन इतने कम समय में जयंती को मनाने के कार्यक्रम की तैयारी नहीं की जा सकती है। स्वरूप ने पूछा कि क्या 1971 के बाद सरकार जयंती को मनाएगी तो मुख्यमंत्री ने कहा जहां तक सावरकर के बलिदान की बात है, इसपर संदेह नहीं किया जा सकता है।
हमने अपनी युवावस्था में उनसे काफी प्रेरणा ली। कई और लोगों ने देश के लिए अपना बलिदान दिया है। शायद सावरकर सर्वोच्च बलिदान देने वालों में शामिल हैं, लेकिन सवाल यह है कि कितने लोगों की जयंती हम सरकारी स्तर पर मनाएंगे।
जयंती को सिर्फ एक राज्य में मनाने का सवाल नहीं है बल्कि देशभर में मनाने की बात है। कल को रानी लक्ष्मी बाई, तांत्या टोपे को लेकर मांग उठेगी। हर किसी ने बलिदान दिया है। अगर कोई एनजी इसके लिए काम करती है तो सरकार मदद कर सकती है, लेकिन फिलहाल हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है।












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