Wheat:एक्सपोर्ट बैन के अलावा कीमत नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम क्या हैं, कितने दिनों में घटेंगे दाम ? जानिए
नई दिल्ली, 15 मई: गेहूं की वैश्विक किल्लत की वजह से इसकी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सबसे बड़ा कदम ये उठाया है कि फिलहाल इसके निर्यात को रोक दिया है। इससे पहले सरकार इसकी कीमतें नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठा चुकी थी। अब सरकार और एक्सपर्ट दोनों का मानना है कि आने वाले दिनों में आटे और गेहूं की कीमतें घटनी शुरू हो जाएंगी और जाहिर है कि इसका खाने-पीने की बाकी चीजों पर भी बड़ा व्यापक असर पड़ेगा; और आखिरकार बढ़ती महंगाई पर भी काफी हद तक नियंत्रिण लगने की उम्मीद है। आप इस आर्टिकल में देश में इस समय गेहूं से जुड़ी सारी वास्तविक परिस्थितियों को समझिए।

सरकार को महंगाई पर नियंत्रण होने की उम्मीद
भारत सरकार ने गेहूं निर्यात पर पाबंदी लगाने का फैसला करके यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से पहले से ही तमाम परेशानियां झेल रही दुनिया में खलबली मचा दी है। लेकिन, भारत के पास अपने, अपने पड़ोसियों और कुछ बेहद जरूरतमंद देशों की खाद्य सुरक्षा को देखते हुए शायद इस कदम से बेहतर कोई विकल्प नहीं था। अलबत्ता, इसने पहले से किए गए सप्लाई के वादों को पूरा करने का भी संकल्प दोहराया है। दरअसल, वैश्विक मांग की वजह से निर्यात के दबाव और मौजूदा साल में आउटपुट कम होने की आशंका के चलते गेहूं और आटा की कीमतें जिस तरह से बढ़ने लगी थीं, सरकार के पास उसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया था। वाणिज्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने स्पष्ट तौर पर इस फैसले के बारे में कहा कि 'पहला प्रमुख लक्ष्य महंगाई को नियंत्रित करना है। ' उन्होंने यह भी बताया कि 'वैश्विक किल्लत या कथित किल्लत के दौरान जमाखोरी की एक प्रवृत्ति हो जाती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ऐसा नहीं हो सकेगा।' हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला स्थाई नहीं है।

गेहूं निर्यात पर पाबंदी का फैसला क्यों लेना पड़ा ?
रबी के चालू सीजन में 111 मिलियन टन गेहूं उत्पादन अनुमानित था। लेकिन, संशोधित आउटपुट में 6 मिलियन टन की कमी आ गई, मतलब यह 105 मिलियन टन रह गया। इसके चलते संशोधित सरकारी खरीद का अनुमान भी 19.5 मिलियन टन रहा। इसमें सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 13 मई, 2022 तक 18 मिलियन टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। अनुमानित उत्पादन थोड़ा कम रह मुख्य वजह देश के कुछ इलाकों में जनवरी-फरवरी में अप्रत्याशित बारिश हो सकती है।
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गेहूं निर्यात पर पाबंदी के अलावा कीमत कंट्रोल के अन्य कदम ?
सरकार को पहले से ही अंदाजा था कि दुनिया में गेहूं के दो प्रमुख निर्यातक यूक्रेन और रूस के बीच लड़ाई की वजह से इसकी वैश्विक मांग बढ़ेगी। यही वजह है कि किसानों ने भी सरकारी मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इसे बेचने की जगह मुनाफे में निजी कारोबारियों के हाथों में खेतों से ही बेचना शुरू कर दिया था। इसके चलते सरकार करीब सवा दो वर्षों से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत दिए जाने वाले मुफ्त राशन में 5.5 मिलियन टन गेहूं की जगह चावल देना तय किया। इसके अलावा नेशनल फूड सिक्योरिटी ऐक्ट के तहत रखे जाने वाले 6.1 मिलियन टन गेहूं को भी चावल से बदल दिया गया। ओपन मार्केट सेल स्कीम की अनुमति भी नहीं दी जा रही है। निर्यात की छूट सिर्फ वहां है, जिनके साथ लेटर्स ऑफ क्रेडिट के तहत मौजूदा करार हो चुका है। भविष्य में सरकार की इजाजत से सिर्फ वहीं निर्यात की अनुमति होगी, जिन्हें खाद्य सुरक्षा के तहत इसकी आवश्यकता पड़ेगी।

सरकार के फैसले से जमाखोरों का खेल बिगड़ेगा
गेहूं कारोबारियों और निर्यातकों का भी कहना है कि निर्यात पर रोक लगने से घरेलू बाजारों में इसकी कीमतों के नियंत्रण में मदद मिलेगी। नेशनल कमोडिटीज मैनेजमेंट सर्विस लिमिटेड के एमडी और सीईओ सिराज चौधरी ने मीडिया से कहा है, 'ऐसे कारोबारी और किसान हैं, जो अपने गेहूं के स्टॉक को रोक रहे हैं, ताकि ज्यादा कीमत बढ़ने का इंतजार कर सकें। इससे उन्हें अपने स्टॉक को रिलीज करना पड़ जाएगा।' सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खुदरा बाजार में 8 मई को 1 किलो गेहूं के आटे की कीमत 33 रुपये थी, जो कि पिछले साल के मुकाबले 13 फीसदी ज्यादा है। इसी साल मार्च में गेहूं और आटे की महंगाई 7. 77% थी, जो कि अप्रैल में बढ़कर 9. 59% पहुंच गई। वहीं गेहूं की वैश्विक कीमत की बात करें तो फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से यह अबतक 40% बढ़ चुकी है।

कितने दिनों में गेहूं-आटे के घटेंगे दाम ?
खाद्य सचिव सुधांशु पांडे का कहना है कि देश में गेहूं और आटे की खुदरा कीमत पिछले एक साल में 19% तक बढ़ गई है और निर्यात रोकने के फैसले से इसकी घरेलू कीमत हफ्ते-दो हफ्ते में कम होने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि यह अनुमान लगाना संभव नहीं है कि कीमतें कितनी कम होंगी, 'लेकिन, इसमें कोई संदेह नहीं है कि घरलू दाम एक या दो हफ्ते में घट जाएंगे।'












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