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देश के किसानों की चमकी किस्मत, MSP से ज्यादा भाव पर बिक रहा है गेहूं, खेतों में ही अच्छी कीमत दे रहे व्यापारी

नई दिल्ली, 20 अप्रैल: पिछले साल नवंबर तक देश में किसानों का एक वर्ग एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की मांग को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रहा था। आज हालात ने ऐसी करवट ली है कि किसानों को कहीं जाना भी नहीं पड़ रहा है और उनके गेहूं के पैसे खेतों में ही पहुंच जा रहे हैं और वह भी एमएसपी से भी ज्यादा कीमत पर। इसके पीछे बहुत बड़ी वजह गेहूं की मांग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ इजाफा माना जा रहा है, जिसके चलते इसकी कीमतें वैश्विक स्तर पर उछाल मार रही हैं। आलम यह है कि सरकार भी गेहूं खरीद का टारगेट कैसे पूरा करेगी, इस पर सवालिया निशान लग गया है, क्योंकि गेहूं की डिमांड तो खुले बाजार में ही बहुत ज्यादा है।

गेहूं की मांग बढ़ने से किसानों की चांदी

गेहूं की मांग बढ़ने से किसानों की चांदी

सरकार इस साल अबतक करीब 14,000 करोड़ रुपये कीमत पर 6.92 मिलियन टन गेहूं खरीद चुकी है। इसमें पंजाब से 32,16,668 टन, हरियाणा से 27,76,496 और मध्य प्रदेश से 8,98,679 टन गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी गई है। लेकिन, व्यापारियों और एक्सपर्ट का मानना है कि 1 अप्रैल से शुरू हुए सीजन में सरकार की खरीद घटकर लगभग आधी रह जाएगी। इसकी वजह ये है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इसकी वैश्विक कीमतों में इजाफा हुआ है और किसानों को व्यापारियों के हाथों में बेचना ज्यादा मुनाफे का सौदा लग रहा है। हालांकि, सरकार कह रही है कि उसने पिछले साल जो 44.4 मिलियन टन गेहूं खरीद का टारगेट फिक्स किया था, उसे वह पूरा कर लेगी। लेकिन, जानकार मान रहे हैं कि असल में सरकारी खरीद साल 2022-23 में 25 मिलियन टन तक ही होने की संभावना है और हो सकता है कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए ज्यादा चावल उपलब्ध करवानी पड़ जाए।

कुल उत्पादन रिकॉर्ड 111.32 मिलियन टन रहने का अनुमान

कुल उत्पादन रिकॉर्ड 111.32 मिलियन टन रहने का अनुमान

इस साल गेहूं का कुल उत्पादन रिकॉर्ड 111.32 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो कि पांच सीजन के औसत उत्पादन 103.88 मिलियन टन से ज्यादा है। वैसे मौसम संबंधी दिक्कतों के चलते पैदावार के लक्ष्य को लेकर कुछ आशंकाएं भी जाहिर की जा रही हैं, लेकिन कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि ज्यादा फर्क देखने को नहीं मिलेगा। बहरहाल किसानों के नजरिए से अच्छी खबर ये है कि एक तरफ जो एमएसपी को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है, वहीं अब किसानों को उससे कहीं ज्यादा कीमत प्राइवेट में गेहूं बेचने पर ही मिलने लगी है और यही वजह है कि सरकारी खरीद के लक्ष्य पूरा होने पर संदेह खड़ा किया जा रहा है।

एमएसपी से ज्यादा कीमत पर गेहूं बेच रहे हैं किसान

एमएसपी से ज्यादा कीमत पर गेहूं बेच रहे हैं किसान

केंद्र सरकार ने गेहूं पर 2,015 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी तय कर रखी है। लेकिन, देश के कई हिस्सों में व्यापारी किसानों को इससे ज्यादा मूल्य दे रहे हैं। मसलन, मध्य प्रदेश के गुणवत्ता वाले गेहूं की देशभर में मांग रही है। इस बार राजधानी भोपाल की करोंद मंडी में गेहूं का भाव इस समय 2,200 रुपये से लेकर 2.300 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है। यही नहीं कुछ बहुत ही अच्छी क्वालिटी का गेहूं तो 3,000 रुपये क्विंटल से भी ज्यादा में उठ रहा है। प्रदेश की हरदा, खंडवा जैसी अनाज मंजियों से भी यही खबर है कि किसान एमएसपी भूल चुके हैं और व्यापारियों के हाथों सीधा गेहूं बेच रहे हैं।

खेतों से ही व्यापारी ले जा रहे हैं गेहूं

खेतों से ही व्यापारी ले जा रहे हैं गेहूं

बिहार के भोजपुर इलाके में भी यही हाल है। यहां खेतों से सीधे गेहूं उठाया जा रहा है और पड़ोस के यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक इसकी सप्लाई हो रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि इससे अच्छा क्या हो सकता है कि अपने खेत में ही दाम दे जा रहे हैं। फ्लोर मिल मालिकों ने किसानों के खेतों से सीधे माल उठाने के लिए अपने एजेंटों को छोड़ रखा है। किसानों को लग रहा है कि सरकारी खरीद के चक्कर में वह गेहूं बेचने के बाद पैसे मिलने का इंतजार क्यों करें, जब हाथ के हाथ ही कैश थमाए जा रहे हैं। किसान तो सीधा ये देख रहे हैं कि पिछले साल के मुकाबले प्रति क्विंटल 500 से 600 रुपये ज्यादा दाम उन्हें घर बैठे ही मिल जा रहा है। गरीब किसानों तक भी यह संदेश पहुंच रहा हैकि रूस-यूक्रेन युद्ध ने उनके गेहूं को सोना बना दिया है।

सरकार ने 1 करोड़ टन गेहूं निर्यात का लक्ष्य रखा है

सरकार ने 1 करोड़ टन गेहूं निर्यात का लक्ष्य रखा है

भारत सरकार ने साल 2022-23 में घरेलू जरूरत को पूरा करने के बाद 1 करोड़ टन गेहूं निर्यात का लक्ष्य तय कर रखा है। इसमें से 10 लाख टन गेहूं तो सिर्फ मिस्र खरीद रहा है, जिसने रूस और यूक्रेन की लड़ाई के मद्देनजर भारत को अपने गेहूं सप्लायर के रूप में मंजूर किया है। एक्सपर्ट पहले से मान रहे हैं कि अगर उत्पादन में गर्मी की वजह से थोड़ा भी असर पड़ा तो इसकी घरेलू कीमतों में ही 5 से 7 फीसदी इजाफा होगा, जबकि निर्यात की वजह से किसानों की लॉटरी तो पहले ही लगने लगी है। दावे के मुताबिक दिसंबर और जनवरी में भारी बारिश और गर्मी के मौसम की समय से पहले शुरुआत होने के चलते पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 10 से 35% उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अगर यह वाकई में हुआ तो जिन किसानों के पास गेहूं होगा उनका मुनाफा और ज्यादा बढ़ना तय है।

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