पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर हामी भरने से भारत को होंगे ये फायदे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को केरल के कोझीकोड में जब इस बात की घोषणा की है कि भारत जलवायु परिवर्तन से जुड़े पेरिस समझौते को स्वीकार करेगा। पीएम मोदी के इस ऐलान का अमेरिका ने स्वागत किया है तो वहीं, इस बात की भी अटकलें तेज हो गई हैं कि इससे भारत को फायदा क्या होगा?

पीएम मोदी ने घोषणा की है कि 2 अक्टूबर महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर भारत पेरिस समझौते को आधिकारिक तौर पर स्वीकार करेगा। इसके यह मायने हैं कि अब भारत दुनिया भर के उन शीर्ष देशों में शामिल होगा जो अलग-अलग अभियानों की नीतियां तैयार करते हैं।

इन 55 देशों के गुट में शामिल हो जाएगा भारत

इन 55 देशों के गुट में शामिल हो जाएगा भारत

जलवायु परिवर्तन के पेरिस समझौते पर सहमति जताते ही भारत 55/55 कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए अपनी सीट पक्की करेगा। इसके मुताबिक, जब 55 देश, जो 55 फीसदी ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के जिम्मेदार हैं, समझौते पर सहमति देंगे तो फिर सभी देश एक कॉन्फ्रेंस में बैठेंगे और आगे के नियम तय होंगे।

जयवायु परिवर्तन अब ग्लोबल मुद्दा बन चुका है, जो आगे चलकर ऊर्जा और तकनीकी से लेकर व्यापार तक में प्रभावी हो सकता है। पेरिस एग्रीमेंट को लेकर पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच न सिर्फ फोन पर बातचीत हुई बल्कि आमने-सामने की मुलाकातों में भी इसका जिक्र हुआ। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसमें भारत ने प्रो-एक्टिव भूमिका निभाई है। जो बीते सालों में भारत की रणनीति के विपरीत है।

NSG सदस्यता में मिल सकता है फायदा

NSG सदस्यता में मिल सकता है फायदा

जयवायु परिवर्तन डील बराक ओबामा की विरासत का एक हिस्सा है। इसका समर्थन करके मोदी ने यह संकेत दिए हैं कि भारत इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। जबकि कुछ दिन पहले ही भारत ने इस पर सहमति जताने को लेकर अमेरिका के बयान का खंडन किया था।

भारत ने जून में न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (NSG) सदस्यता को पेरिस समझौते से जोड़ने का दांव चला था, हालांकि तब इसे नहीं माना गया। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने इस बात से साफ इनकार किया था। हालांकि अब इस पर सहमति बन सकती है, या फिर भारत को इसका फायदा मिल सकता है।

चीन से मुकाबला भी एक बड़ी वजह

चीन से मुकाबला भी एक बड़ी वजह

दो हफ्ते पहले अमेरिका और चीन ने घोषणा की थी कि उन्होंने पेरिस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। इस वजह से भारत पर भी दबाव बढ़ा। क्योंकि भारत पर फिर से राह में रोड़ा बनने का इल्जाम लग सकता था। चीन की तत्काल हामी से भी भारत को एक्शन लेने में जल्दी दिखानी पड़ी।

एक जिम्मेदार देश की छवि बनेगी

एक जिम्मेदार देश की छवि बनेगी

यह भारत की वैश्विक स्तर पर मजबूत और जिम्मेदार देश के तौर पर छवि बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। खासकर हाल ही में पाकिस्तान के साथ बढ़ी कड़वाहट पर सैन्य ऑपरेशन की योजना और सिंघु नदी समझौता तोड़ने जैसे संकेत देकर भारत ने दुनिया की नजर में मजबूत राष्ट्र बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

ऊर्जा, पर्यावरण और जल समिति की अरुणाभा घोष ने कहा, 'निश्चित रूप से यह भारत के लिए आगे चलकर फायदे का सौदा साबित होता। खासकर HFC (hydrofluorocarbons) नेगोशिएसन में इसका फायदा मिलेगा, जहां भारत यह साबित कर सकेगा कि वह समस्या नहीं समाधान है। भारतीय कंपनियां पहले ही HFC के पेटेंट-फ्री सॉल्यूशन पर काम कर रही हैं।'

यहां भी मिलेगा फायदा

यहां भी मिलेगा फायदा

अगर बड़े स्केल पर देखें तो पेरिस समझौते पर सहमति जताने से आने वाले समय में पेरिस में होने वाली UNCCC की बातचीत भारत का महत्व बढ़ जाएगा। ICAO में इंटरनेशनल एविएशन नेगोशिएशन पर भी इसका असर दिखेगा, जहां कार्बन टैक्सेज पर चर्चा होनी है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि भारत ने इसके समानांतर इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसे मूवमेंट भी सेट कर रखे हैं। अगर भारत पेरिस समझौते को नहीं मानता तो उसकी नीयत पर सवाल उठेंगे।

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